होमगार्ड की आयु-सीमा छूट खत्म करने पर ब्योरा मांगा

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिपाही भर्ती में होमगार्ड अभ्यर्थियों को तीन वर्ष की आयुसीमा छूट को अचानक समाप्त करने के मामले में राज्य सरकार व पुलिस भर्ती बोर्ड से जानकारी मांगी है। यह आदेश न्यायमूर्ति विकास बुधवार ने शिवम सिंह व 22 अन्य की याचिका पर अधिवक्ता ऋषभ केसरवानी को सुनकर दिया है। एडवोकेट केसरवानी का कहना है कि मामला 32,679 सिपाही एवं समकक्ष पदों की सीधी भर्ती से जुड़ा है। भर्ती में राज्य सरकार ने गत पांच जनवरी को पहले आयुसीमा में तीन वर्ष की छूट दी गई थी बोर्ड ने अचानक आयुसीमा छूट को समाप्त कर दिया होमगार्ड श्रेणी के अभ्यर्थियों को अधिकतम आयुसीमा में तीन वर्ष की छूट देने का निर्णय लिया था।
निर्णय के बाद बड़ी संख्या में होमगार्ड अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। बाद में 22 जनवरी को बोर्ड ने अचानक इस आयुसीमा छूट को खत्म कर दिया, जिससे अनेक होमगार्ड अभ्यर्थी आवेदन के अयोग्य हो गए। कोर्ट ने मामले में जानकारी मांगते हुए अगली सुनवाई के लिए 12 फरवरी की तारीख लगाई है।
परीक्षा में पर्चा लीकव अफवाह रोकेगी क्यूआरटी
लखनऊ। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा में पर्चा लीक कराने व सोशल मीडिया पर इसे लेकर अफवाह फैलाने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली गई है। राज्य व जिला स्तर पर क्विक रिस्पांस टीमें (क्यूआरटी) बनाई गई हैं। पर्चा व कापियों की सुरक्षा को रात में भी स्ट्रांग रूम का औचक निरीक्षण होगा। केंद्रों पर एसटीएफ भी नजर रखेगी। परीक्षा
18 फरवरी से शुरू हो रहीं यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा 8033 केंद्रों पर होगी। इसमें 52.30 लाख परीक्षार्थी शामिल होंगे। ऐसे में नकल के साथ-साथ पर्चा लीक कराने वाले नकल माफिया व सोशल मीडिया पर पर्चा लीक की भ्रामक सूचना डालने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अगर कहीं कोई अफवाह व पर्चा लीक होने की खबर सामने आती है, तो क्यूआरटी समय रहते नियंत्रण करेगी। अफवाह फैलाने वालों को चिह्नित किया जाएगा कोई नेटवर्क है तो ध्वस्त किया जाएगा।
पर्यवेक्षकों की तैनाती
यूपी बोर्ड परीक्षा में नकल रोकने के लिए मंडल व जिलों में एक-एक पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। अयोध्या में निदेशक साक्षरता अनिल भूषण चतुर्वेदी, लखनऊ में संयुक्त शिक्षा निदेशक विवेक नौटियाल, देवीपाटन में सीटीई प्राचार्य अजय कुमार सिंह को पर्यवेक्षक बनाया गया है।
यूपी बोर्ड : परीक्षा से ठीक पहले विद्यार्थियों के विवरण में संशोधन
छात्रों के नाम, विषय आदि की त्रुटियों में संशोधन के बाद जारी होंगे प्रवेश पत्र
प्रयागराज। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट यूपी बोर्ड परीक्षा 18 बिंदुवार पढ़ाई से मिलेंगे अच्छे अंक पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र भी हल करें
फरवरी से शुरू हो रही है। परीक्षा में शामिल होने वाले ऐसे छात्रों जिनके नाम, विषय, माता-पिता के नाम आदि में गड़बड़ी है, उसे यूपी बोर्ड संशोधन करने में जुटा है। ऐसे में परीक्षा के बाद होने वाली परेशानी से छात्रों को बेवजह बोर्ड का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। संशोधन के बाद छात्रों को संशोधित प्रवेश पत्र भी दिए जाएंगे। छात्रों के विवरण में त्रुटि संशोधन के नाम पर होने वाली परेशानी से बचाने के लिए यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने एक मौका देते हुए प्रदेश के सभी डीआईओएस को निर्देशित किया था कि आवश्यक प्रपत्रों के साथ 25 जनवरी तक प्रधानाचार्यों से संशोधन के लिए आवेदन पत्र प्राप्त कर लें।
साथ ही सभी प्रकरणों के परीक्षण के बाद अवशेष त्रुटियों, रिस्टोर व डिलीट का विद्यालयवार विवरण साक्ष्यों, अभिलेखों और अपनी संस्तुति के साथ 31 जनवरी तक अनिवार्य रूप से संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को उपलब्ध करा दें।
पांच क्षेत्रीय कार्यालयों प्रयागराज, मेरठ, वाराणसी, बरेली और गोरखपुर तमाम संशोधन के प्रकरण आए हैं। लेकिन बोर्ड के द्वारा संशोधन कार्य अभी नहीं किया जा सका है। उधर बोर्ड सचिव भगवती सिंह का कहना है कि विवरण में संशोधन के बाद परीक्षार्थियों को संशोधित प्रवेश पत्र भी जारी किए जाएंगे।
यूपीएसएसएससी ऑनलाइन कराएगा अभिलेख परीक्षण
लखनऊ। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) जल्द ही विभिन्न भर्तियों के लिए अभिलेख परीक्षण की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने जा रहा है। इसके लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के सहयोग से एक विशेष ऑनलाइन मॉड्यूल विकसित किया जा रहा है।
इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन के लिए लखनऊ स्थित आयोग कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे उनका समय और खर्च दोनों बचेंगे।
वर्तमान व्यवस्था में आयोग पीईटी स्कोर के आधार पर अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट करता है और इसके बाद अभिलेख परीक्षण के लिए बुलाया जाता है। अब यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से होगी।
आयोग के सचिव अवनीश सक्सेना ने बताया कि अर्हता, आरक्षण और अन्य आवश्यक प्रमाण पत्र केवल आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपलोड किए जाएंगे। किसी अन्य माध्यम से दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी दस्तावेज में कमी होगी तो अभ्यर्थियों को ऑनलाइन ही सुधार का अवसर मिलेगा।
इस नई प्रणाली से चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और परिणाम भी शीघ्र जारी किए जा सकेंगे। जल्द ही इससे संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
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