पीसीएस मुख्य परीक्षा में इंटरव्यू के लिए 2719 अभ्यर्थी सफल
947 पदों पर भर्ती के लिए पिछले साल 29 जून से दो जुलाई तक कराई गई थी परीक्षा
)। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने सम्मिलित राज्य/प्रवर (पीसीएस) अधीनस्थ सेवा परीक्षा-2024 की मुख्य (लिखित) परीक्षा का परिणाम बुधवार देर रात जारी कर दिया। मुख्य परीक्षा में 2719 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए सफल घोषित किया गया है। परिणाम आयोग की वेबसाइट https://uppsc.up.nic.in पर उपलब्ध है।
पीसीएस के 947 पदों पर भर्ती के लिए मुख्य परीक्षा वर्ष 2025 में 29 जून से दो जुलाई तक लखनऊ व प्रयागराज के विभिन्न केंद्रों में आयोजित की गई थी। मुख्य परीक्षा में 13,776 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। चयन में 24 प्रकार के 947 पद हैं। इनमें एक प्रकार के 60 पद ऐसे हैं, जिन पर चयन केवल लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाना है।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग
हालांकि, इस पद का परिणाम अंतिम चयन परिणाम के साथ घोषित किया जाएगा। बाकी 887 पदों पर चयन लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार के आधार पर किया जाना है जिसके सापेक्ष 2719 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए सफल घोषित किया गया है।
आयोग के सचिव अशोक कुमार के अनुसार, परीक्षा के संबंध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 15 रिट याचिकाएं विचाराधीन हैं। याचिकाओं से जुड़े अभ्यर्थियों (याचीगण) का परिणाम घोषित नहीं किया गया है। परीक्षा परिणाम संबंधित याचिकाओं में पारित न्यायालय के निर्णय के अधीन रहेगा।
वहीं, उत्तर प्रदेश के बाहर की महिला अभ्यर्थियों का परिणाम उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से योजित विशेष अपील में उच्च न्यायालय द्वारा पारित अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। सचिव के अनुसार, मुख्य परीक्षा में अभ्यर्थी जिन-जिन पदों के लिए सफल घोषित किए गए है, उन पदों के लिए अधिमान्यता एवं साक्षात्कार के बारे में विस्तृत सूचना अलग से जारी की जाएगी।
अंतिम चयन परिणाम के बाद जारी होंगे प्राप्तांक, कटऑफ
यूपीपीएससी के सचिव अशोक कुमार के अनुसार परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के प्राप्तांक, कट ऑफ अंक आदि की सूचनाएं पीसीएस परीक्षा का अंतिम चयन परिणाम घोषित होने के बाद जारी की जाएंगी। इसलिए प्राप्ताकों एवं कट ऑफ अंकों के बारे में सूचना का अधिकार अनिधिनयम-2005 के तहत प्रार्थनापत्र प्रेषित न किए जाएं।
स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा के लिए पुलिस की व्यवस्था अनिवार्य
जिनके बच्चे परीक्षा देंगे, उन्हें नहीं बनाया जाएगा उस केंद्र का व्यवस्थापक और कक्ष निरीक्षक
प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। परिषद ने स्पष्ट किया है कि किसी भी परीक्षा केंद्र पर ऐसे केंद्र व्यवस्थापक, वाह्य केंद्र व्यवस्थापक या कक्ष निरीक्षक की तैनाती नहीं की जाएगी, जिनके बच्चे उसी केंद्र पर परीक्षा दे रहे हों। यही नहीं स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा के लिए सशस्त्र पुलिस बल की व्यवस्था अनिवार्य रूप से कराई जाएगी।
माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने निर्देश दिए हैं कि सशस्त्र पुलिस बल की व्यवस्था के साथ ही स्ट्रॉन्ग रूम में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को मोबाइल फोन लेकर प्रवेश न दिया जाए। इस संबंध में प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि गत वर्ष जिन अधिकारियों की तैनाती वाह्य केंद्र व्यवस्थापक के रूप में की गई थी, उनकी पुनः तैनाती नहीं की जाएगी।
सचिव ने निर्देशित किया है कि प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर कम से कम 50 प्रतिशत स्टाफ की तैनाती वाह्य विद्यालयों से करने में राजकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के योग्य, वरिष्ठ व अच्छी छवि वाले अध्यापकों को प्राथमिकता दी जाए।
निरीक्षण के दौरान यदि किसी परीक्षा केंद्र पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित केंद्र व्यवस्थापक एवं वाह्य केंद्र व्यवस्थापक को तत्काल हटाकर, वहां राजकीय या अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य को केंद्र व्यवस्थापक या वाह्य केंद्र व्यवस्थापक और उक्त परीक्षा केंद्र के वरिष्ठतम अध्यापक को सह-केंद्र व्यवस्थापक नियुक्त कर शेष परीक्षाएं कराई जाएंगी। साथ ही जांच के बाद दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई भी की जाएगी।
परीक्षा केंद्रों पर होंगी डबल लॉक युक्त चार अलमारियां
सचिव ने बताया कि प्रत्येक परीक्षा केंद्रों पर डबल लॉक युक्त चार अलमारियों की व्यवस्था की जाएगी। प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय डबल लॉक युक्त अलमारी के पहले लॉक की एक चाबी वाह्य केंद्र व्यवस्थापक के पास रहेगी। उसी लॉक की दूसरी चाबी स्टेटिक मजिस्ट्रेट के पास सुरक्षित रहेगी। डबल लॉक केवल स्टेटिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में ही खोला जाएगा। आपात स्थिति में केंद्र व्यवस्थापक की अनुपस्थिति में स्टेटिक मजिस्ट्रेट के पास सुरक्षित चाबी का उपयोग किया जाएगा
प्राथमिक शिक्षकों को दस साल तक हर महीने 7000 रुपये देना बंधुआ मजदूरी
सुप्रीम कोर्ट सख्त : यूपी सरकार को 2017-18 से प्रतिमाह 17000 रुपये भुगतान के निर्देश नियुक्त अंशकालिक संविदा प्रशिक्षकों/ शिक्षकों को 2013 में 11 महीने की संविदा अवधि के लिए निर्धारित उनके 7000 रुपये प्रति माह के मानदेय में संशोधन का अधिकार
है। यह संशोधन, यदि वार्षिक रूप से नहीं तो समय-समय पर पीएबी के विवेकानुसार किया जाना चाहिए था। चूंकि पीएबी ने वर्ष 2017-18 के लिए इस मानदेय को 17000 रुपये
प्रति माह निर्धारित किया था, इसलिए इस योजना के तहत नियुक्त सभी प्रशिक्षक /शिक्षक वर्ष 2017-18 से अगले संशोधन तक उपरोक्त दर 17000 रुपये प्रति माह पर मानदेय प्राप्त करने के पात्र हैं।
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