असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा रद्द करने का फैसला सही : हाईकोर्ट
भर्ती परीक्षा 2025 के मामले में 224 याचिकाएं खारिज

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी परीक्षा में निष्पक्षता से समझौता नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा-2025 के परिणाम को निरस्त करने के फैसले को सही ठहराते हुए कुमारी लक्ष्मी समेत 224 अभ्यर्थियों की याचिकाएं खारिज कर दीं। कहा कि केवल लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित होना अंतिम चयन नहीं माना जा सकता। क्योंकि, साक्षात्कार अभी बाकी था।
कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को किसी त्रुटिपूर्ण और संदिग्ध परीक्षा प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। जांच में सामने आया कि प्रश्नपत्र लीक होने से सीमित संख्या में अभ्यर्थियों को लाभ मिला था, जो पूरी परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।
910 पदों पर भर्ती के लिए अप्रैल 2025 में दो दिन 52 केंद्रों पर परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के तुरंत बाद पेपर लीक के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई। एसटीएफ जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद परीक्षा रद्द करने की सिफारिश की गई। कोर्ट ने कहा कि अभ्यर्थियों को नए सिरे से होने वाली लिखित परीक्षा में भाग लेने का अवसर मिलेगा, जिसका कार्यक्रम पहले ही जारी किया जा चुका है।
कटऑफ से ज्यादा अंक पाने वालों को नियुक्ति का मौका दें
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग की असिस्टेंट ऑपरेटर (रेडियो) भर्ती-2005 से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाते हुए संशोधित परिणाम में कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर दिया जाना चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने विभव सिंह और विक्रांत कुमार यादव की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया दिया। 2005 की यह भर्ती प्रक्रिया अनियमितताओं के आरोपों के चलते पहले निरस्त कर दी गई थी। बाद में कोर्ट के निर्देश पर जांच कर संदिग्ध अभ्यर्थियों को अलग किया गया और संशोधित परिणाम घोषित किया गया। जांच में अभ्यर्थियों को संदिग्ध पाया गया, जिसके बाद मेरिट लिस्ट में बदलाव हुआ।
नियुक्ति से पहले दूसरी शादी दुराचार नहीं पर शिक्षक बनने की पात्रता खत्म
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी सेवा में आने से पहले की गई दूसरी शादी (यदि पति/पत्नी पहले से विवाहित हो) को दुराचार मानकर सजा नहीं दी जा सकती, लेकिन इससे नियुक्ति की वैधता पर गंभीर असर पड़ता है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने रीना की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की। कहा कि आचरण नियमावली केवल सेवा में कार्यरत कर्मचारियों पर लागू होती है। इसलिए नियुक्ति से पहले की घटनाओं के आधार पर अनुशासनात्मक दंड नहीं दिया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि यदि किसी महिला ने ऐसे पुरुष से विवाह किया है, जिसकी पहली पत्नी जीवित है तो वह शिक्षक सेवा नियमावली-1981 के नियम 12 के तहत पद के लिए अयोग्य मानी जाएगी।
पर्याप्त समय के बावजूद इंजीनियर को क्यों नहीं बचाया जा सका
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता की डूबने से मौत के मामले में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ नोएडा में इंजीनियर के डूबने का मामला जवाब मांगा है। पूछा है कि घटनास्थल पर पुलिस, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ जैसी विशेषज्ञों की टीम थीं, पर्याप्त समय के बावजूद युवक को बचाया नहीं जा सका। यह सवाल न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान उठाया। कहा कि हलफनामे में यह स्पष्ट करना होगा कि बचाव के लिए क्या कदम उठाए गए थे। वहां मौजूद टीम के सदस्यों, कमांडिंग ऑफिसर के नाम क्या थे।
250 केंद्रों पर आज से शुरू होगा कॉपियों का मूल्यांकन
यूपी बोर्ड : मूल्यांकन कार्य में लगाए गए 1.53 लाख कार्मिक पहली बार सॉफ्टवेयर से नियुक्त हुए 6980 प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद अंकेक्षक, प्रधानाचार्यों को मिली जिम्मेदारी
हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन आज से 250 केंद्रों पर शुरू होगा। इसमें हाईस्कूल की कॉपियों की जांच के लिए 117, इंटरमीडिएट स्तर की कॉपियों की जांच के लिए 111 और दोनों कॉपियों की जांच के लिए 22 मूल्यांकन केंद्र बनाए गए हैं। इस कार्य में 1.53 लाख कार्मिक लगाए गए हैं।
परिषद के सचिव भगवती सिंह ने कहा है कि मूल्यांकन की निष्पक्षता तथा पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। 18 मार्च से एक अप्रैल तक प्रदेश के 250 केंद्रों पर मूल्यांकन होगा।
75 संकलन केंद्रों से उत्तर पुस्तिकाओं को मूल्यांकन केंद्रों को भेज दिया गया है। मंगलवार को नियुक्त शिक्षकों व कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी कराया जा चुका है। मूल्यांकन कार्य के संचालन के लिए 75 मुख्य नियंत्रक और 250 उप नियंत्रकों की नियुक्ति की गई है।
हाईस्कूल की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए लगभग 4300 अंकेक्षक, 8550 उप-प्रधान परीक्षक और 83,800 परीक्षक नियुक्त किए गए हैं। वहीं इंटरमीडिएट स्तर पर करीब 2590 अंकेक्षक, 5300 उप प्रधान परीक्षक और 48,990 परीक्षकों की तैनाती की गई है।
प्रयागराज। हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा-2026 की उत्तर पुस्तिकाओं के गुणवत्तापूर्ण और त्रुटिरहित मूल्यांकन के लिए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने पहली बार सॉफ्टवेयर के माध्यम से 6980 अंकेक्षक (ऑडिटर) नियुक्त किए हैं, इनमें प्रधानाचार्य और वरिष्ठ शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। परिषद का मानना है कि इस नई व्यवस्था से प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को त्रुटिरहित और निष्पक्ष परिणाम मिल सकेगा।
अंकेक्षक मूल्यांकित उत्तरपुस्तिकाओं में से 15 प्रतिशत कॉपियों का रैंडम परीक्षण करेंगे कि मूल्यांकन में किसी प्रकार की त्रुटि या अंक गणना में गलती न हो। पहले यह जिम्मेदारी मूल्यांकन केंद्रों के उप नियंत्रकों के माध्यम से तय होती थी, लेकिन पूर्व में कई तकनीकी और अंक गणना संबंधी त्रुटियां सामने आने के बाद परिषद ने व्यवस्था में बदलाव किया है।
यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि त्रुटिरहित और गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए प्रधानाचार्यों की वरिष्ठता, प्रशासनिक अनुभव और शैक्षणिक विशेषज्ञता के आधार पर उन्हें अंकेक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। इससे लोगों में मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ेगी और समाज व अभिभावकों के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा।
एडेड जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षकों की कमी
प्रयागराज। प्रदेश के सहायता प्राप्त (एडेड) जूनियर हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापकों की भारी कमी से शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वर्ष 2019 के बाद से नई भर्तियां नहीं होने से प्रदेश के हजारों विद्यालय शिक्षक संकट से जूझ रहे हैं, जिससे पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है।
प्रदेश में 3049 सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल हैं। नियमानुसार इनमें 1438 प्रधानाध्यापक और 8656 सहायक अध्यापकों के पद होने चाहिए, लेकिन काफी संख्या में पद खाली पड़े हैं।
मार्च 2026 में भी काफी प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। इससे यह संकट और गहरा सकता है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019 तक क्या मुझे वो भर्तियां हुई थीं, लेकिन 31 अक्तूबर 2019 को भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई।
दिसंबर 2019 में लिपिक और परिचायक की भर्तियों के लिए नई नियमावली बनाई गई। साथ ही जिन विद्यालयों में छात्रों की संख्या 100 से कम है, वहां प्रधानाध्यापक का पद समाप्त कर केवल तीन अध्यापकों की तैनाती का प्रावधान कर दिया गया।
ऐसे विद्यालयों में न तो परिचायक और न ही लिपिक की नियुक्ति का नियम रखा गया है। मार्च 2020 में प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए अधियाचन भेजे जाने के बाद वर्ष 2021 में प्रधानाध्यापक के 390 और सहायक अध्यापकों के 1507 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी।
निदेशालय के अनुसार, सहायक अध्यापक के 1504 और प्रधानाध्यापक के 390 पदों पर आवेदन मांगे गए थे। हालांकि पिछले वर्ष सत्यापन के दौरान सहायक अध्यापकों के 1262 और प्रधानाध्यापकों के 253 कर दिए गए।
रामकुमार भारद्वाज बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले में 19 फरवरी को उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उच्चीकृत विद्यालयों का सत्यापन कराया गया। इसके बाद रिक्त पदों की संख्या और घटा दी गई। सूत्रों के अनुसार, अब भर्ती करीब 635 सहायक अध्यापक और लगभग 200 प्रधानाध्यापक पदों तक सीमित हो सकती है।
एडेड जूनियर हाईस्कूलों में अध्यापकों की कमी
सूबे में 3049 सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल, प्रभावित हो रहा पठन-पाठन
प्रयागराज। प्रदेश के सहायता प्राप्त (एडेड) जूनियर हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापकों की भारी कमी से शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वर्ष 2019 के बाद से नई भर्तियां नहीं होने से प्रदेश के हजारों विद्यालय शिक्षक संकट से जूझ रहे हैं, जिससे पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है।
प्रदेश में 3049 सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल हैं। नियमानुसार इनमें 1438 प्रधानाध्यापक और 8656 सहायक अध्यापकों के पद होने चाहिए, लेकिन काफी संख्या में पद खाली पड़े हैं।
मार्च 2026 में भी काफी प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। इससे यह संकट और गहरा सकता है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019 तक भर्तियां हुई थीं, लेकिन 31 अक्तूबर 2019 को भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई।
दिसंबर 2019 में लिपिक और परिचायक की भर्तियों के लिए नई नियमावली बनाई गई। साथ ही जिन विद्यालयों में छात्रों की संख्या 100 से कम है, वहां प्रधानाध्यापक का पद समाप्त कर केवल तीन अध्यापकों की तैनाती का प्रावधान कर दिया गया।
ऐसे विद्यालयों में न तो परिचायक और न ही लिपिक की नियुक्ति का नियम रखा गया है। मार्च 2020 में प्रधानाध्यापक व्यापक और सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए अधियाचन भेजे जाने के बाद वर्ष 2021 में प्रधानाध्यापक के 390 और सहायक अध्यापकों के 1507 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। निदेशालय के अनुसार, सहायक अध्यापक 1504 और प्रधानाध्यापक के 390 पदों पर आवेदन मांगे गए थे। हालांकि पिछले वर्ष सत्यापन के दौरान सहायक अध्यापकों के 1262 और प्रधानाध्यापकों के 253 कर दिए गए।
रामकुमार भारद्वाज बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले में 19 फरवरी को उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उच्चीकृत विद्यालयों का सत्यापन कराया गया। इसके बाद रिक्त पदों की संख्या और घटा दी गई। सूत्रों के अनुसार, अब भर्ती करीब 635 सहायक अध्यापक और लगभग 200 प्रधानाध्यापक पदों तक सीमित हो सकती है।
उधर, अपर शिक्षा निदेशक कामता प्रसाद पाल का कहना है कि वर्तमान में भर्तियों पर रोक लगी हुई है, जबकि हर वर्ष बड़ी संख्या में प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में विद्यालयों में शिक्षकों की कमी स्वाभाविक रूप से बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 की भर्ती प्रक्रिया जारी है।
फरवरी 2026 तक तैनाती की स्थिति जनपद
स्कूल
दस्तावेज़
सहायक अध्यापक
प्रयागराज
106
28
253
वाराणसी
68
28
126
गोरखपुर
83
37
196
लखनऊ
42
31
115
आगरा
61
25
185
मेरठ
दसवीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा के लिए आज से आवेदन
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड कक्षा 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा 2026 के लिए स्कूलों के माध्यम से उम्मीदवारों की सूची (एलओसी) जमा करने की प्रक्रिया बुधवार से शुरू करने जा रही है।
यह व्यवस्था नई शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू दो बोर्ड परीक्षा प्रणाली के अनुसार पहली बार शुरू की गई है, जिससे छात्रों को अपने अंकों में सुधार का मौका मिलेगा।
छात्र विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषा जैसे अधिकतम तीन विषयों में सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, वे छात्र जिन्होंने मुख्य परीक्षा में तीन या अधिक विषयों में हिस्सा नहीं लिया, इस परीक्षा के लिए पात्र नहीं होंगे। एलओसी जमा करने का पहला चरण 18 से 31 मार्च तक चलेगा। परिणाम घोषित होने के अगले दिन से पांच दिन का दूसरा चरण होगा। तीसरे चरण में लेट फीस के साथ दो दिन की अतिरिक्त विंडो दी जाएगी।
एसएससी ने संशोधित भर्ती कैलेंडर जारी किया
पटना। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए बड़ी खबर है। कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) ने वर्ष 2026-27 के लिए भर्ती परीक्षाओं का संशोधित कैलेंडर जारी किया है। इन परीक्षाओं में बिहार के सात से आठ लाख अभ्यर्थी आवेदन करते हैं।
आयोग की आधिकारिक वेबसाइट ssc.gov.in पर कैलेंडर और महत्वपूर्ण तिथियों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। कैलेंडर के अनुसार सबसे पहले 16 मार्च को एएसओ ग्रेड लिमिटेड विभागीय प्रतियोगी परीक्षा (पेपर-1) हुई। इसके बाद 31 मार्च को संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (सीजीएल) टियर-1, चयन पद परीक्षा और जूनियर इंजीनियर (सिविल, मैकेनिकल व इलेक्ट्रिकल) परीक्षा के लिए अधिसूचना जारी की जाएगी। आयोग ने बताया कि 30 अप्रैल 2026 को संयुक्त हिंदी अनुवादक परीक्षा, स्टेनोग्राफर ग्रेड 'सी' और 'डी' परीक्षा व संयुक्त उच्चतर माध्यमिक स्तरीय परीक्षा (सीएचसीएल टेन प्लसटू) की अधिसूचना जारी की जाएगी। दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) में सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का नोटिफिकेशन 31 मई को सीजीएल और जेई की परीक्षा के लिए 31 मार्च को जारी होगी अधिसूचना एसएससी की परीक्षाओं में सूबे से सात से आठ लाख अभ्यर्थी होते हैं शामिल जारी होगा।
मल्टी टास्किंग (नॉन-टेक्निकल) स्टाफ परीक्षा के लिए अधिसूचना 30 जून को जारी की जाएगी, जबकि कांस्टेबल (जीडी) सीएपीएफ, एसएसएफ और राइफलमैन भर्ती परीक्षा 2027 के लिए 30 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी होगी। संशोधित कैलेंडर में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अधिकतर परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित होंगी। इनमें तकनीकी और विभागीय पदों की भर्ती भी शामिल है। जूनियर इंजीनियर और संयुक्त हिंदी अनुवादक जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी बहाली होगी। जेई के लिए अवेदन 30 अप्रैल तक जेई परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल है। इसका पेपर-1 कंप्यूटर आधारित परीक्षा मई से जून के बीच होगी। संयुक्त हिंदी अनुवादक परीक्षा की अधिसूचना 30 अप्रैल को जारी होगी और आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई है। इसका पेपर 1 अगस्त से सितंबर के बीच होगी।
बिना सत्यापन वाले एलपीजी ग्राहक ही 'आधार सत्यापन' कराएं
नई दिल्ली। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि एलपीजी गैस उपभोक्ताओं के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी (पहचान सत्यापन) जरूरी है, लेकिन यह नियम केवल उन्हीं ग्राहकों पर लागू होगा, जिन्होंने अब तक ई-केवाईसी नहीं कराया है। सोशल मीडिया पर फैले भ्रम के बाद मंत्रालय ने यह स्पष्टीकरण जारी किया है।
मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि कुछ खबरों में बताया जा रहा है कि सभी एलपीजी ग्राहकों को आधार ई-केवाईसी करनी होगी। इसके बिना गैस सिलेंडर नहीं मिलेगा, जिसे लेकर लोगों में हड़बड़ी फैल गई है। मंत्रालय ने साफ किया है कि यह कोई नया नियम नहीं है। यह पहले से लागू प्रक्रिया का ही हिस्सा है। यह नियम सिर्फ उन्हीं उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है, जिन्होंने अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है। जिन लोगों ने पहले ही सत्यापन कर लिया है, उन्हें दोबारा करने की जरूरत नहीं है।
इसलिए जरूरी : जो ग्राहक सब्सिडी का लाभ लेना चाहते हैं, उनके लिए ई-केवाईसी जरूरी है। इसीलिए सरकार ने उपभोक्ताओं से इसे जल्द पूरा करने की अपील की है। यह प्रक्रिया बहुत आसान है और इसे घर बैठे मुफ्त में किया जा सकता है। हालांकि, यह भी साफ किया है कि ई-केवाईसी न होने की स्थिति में भी एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए अलग नियम : प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए यह नियम सीमित है। मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के उपभोक्ताओं को यह प्रक्रिया साल में सिर्फ एक बार करनी होती है और वह भी सात सिलेंडर लेने के बाद यानी 8वें और 9वें रिफिल पर सब्सिडी पाने के लिए जरूरी होती है। सरकार का कहना है कि यह कदम असली उपभोक्ताओं की पहचान सुनिश्चित करने और गैस सब्सिडी का सही लोगों तक पहुंचना तय करने के लिए उठाया गया है।
ऑनलाइन ई-केवाईसी ऐसे करें
- अपनी एलपीजी गैस सिलेंडर प्रदाता कंपनी का ऐप डाउनलोड करें।
- आधार फेसआरडी ऐप इंस्टॉल करें।
- अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर का उपयोग करके पंजीकरण करें या लॉग इन करें।
- होम स्क्रीन पर 'आधार ईकेवाईसी' का विकल्प चुनें
- ऐप आपको लाइव फोटो लेने के लिए कहेगा। चेहरे की स्कैनिंग सफल हो जाने के बाद, ईकेवाईसी अनुरोध सबमिट हो जाता है।
- ईकेवाईसी को आमतौर पर 24-48 घंटों के भीतर मंजूरी मिल जाती है।
वेबसाइट से तरीका
- My LPG की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं
- अपनी गैस कंपनी चुनें। लॉगिन करें
- "ई-केवाईसी" या "आधार सत्यापन" विकल्प चुनें
- ओटीपी या बायोमेट्रिक के जरिए सत्यापन करें
- क्या-क्या जरूरी होगा
- गैस कनेक्शन से जुड़ा आधार नंबर
- पंजीकृत मोबाइल नंबर
- स्मार्टफोन और इंटरनेटजरूरत पर ही सिलेंडर बुक करने की अपील
देश में गैस आपूर्ति को लेकर बनी चिंता के बीच इंडियन ऑयल ने अपने ग्राहकों से अपील की है कि वे एलपीजी सिलेंडर सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही बुक करें और घबराकर पहले से बुकिंग न करें। कंपनी ने कहा है कि कुछ लोग डर के कारण जरूरत से पहले ही गैस बुक कर रहे हैं, जिससे मांग अचानक बढ़ रही है और डिलीवरी में देरी हो सकती है। कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि देश में घरेलू गैस की सप्लाई बनी हुई है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हाल के दिनों में गैस बुकिंग तेजी से बढ़ी है
यूपी के निकायों में करीब 200 पदों पर होगी भर्ती
लखनऊ। राज्य सरकार निकायों में करीब 200 पदों पर भर्तियां करने जा रही है। सहायक अभियंता सिविल, विद्युत यांत्रिक और पर्यावरण के साथ ही अधिशासी अधिकारी श्रेणी-दो व कर निर्धारण अधिकारी के पदों पर भर्तियां की जाएंगी। उच्च स्तर पर सहमति बनने के बाद इन पदों को भरने के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को प्रस्ताव भेज दिया गया है। इसके मुताबिक सहायक अभियंता (सिविल) के 58, सहायक अभियंता विद्युत यांत्रिक के 14, सहायक अभियंता ट्रैफिक 34, सहायक अभियंता पर्यावरण के 27 पद बताए जा रहे हैं।
क्या यूसीसी लागू करना समझदारी भरा फैसला है
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में चल रहे पीसीएस-2024 के साक्षात्कार में मंगलवार को अभ्यर्थियों से प्रशासन, इतिहास, विज्ञान और व्यक्तिगत अनुभव से जुड़े कई सवाल पूछे गए। एक अभ्यर्थी से उत्तराखंड में लागू यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लेकर सवाल पूछा गया।
पूछा गया कि क्या यूसीसी लागू करना समझदारी भरा फैसला है,
पीसीएस-2024 के साक्षात्कार में संविधान, जजों की नियुक्ति प्रक्रिया के बारे में पूछे गए सवाल
इसके क्या फायदे हैं। समाज के किस वर्ग को इससे सबसे अधिक लाभ हो सकता है और क्या इसे उत्तर प्रदेश में भी लागू किया जाना चाहिए। साथ ही यह भी पूछा गया कि क्या देश यूसीसी के लिए तैयार है।
वहीं, एक अभ्यर्थी से एलएलबी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का पूरा नाम और एलएलबी डिग्री का हिंदी नाम पूछा गया। साथ ही पैनल ने पूछा कि जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया क्या है, क्या यह संविधान में उल्लिखित है और जजों को हटाने का प्रावधान क्या ये सवाल भी पूछे गए
जलवायु परिवर्तन और वैश्विक स्तर पर बाजार की स्थिति 15 अगस्त और 26 जनवरी को झंडा फहराने की प्रक्रिया में अंतर स्टार्टअप इंडिया, पीएम किसान योजना, भांग में पाए जाने वाले तत्व पूंजीगत व्यय, भौतिकी और व्यक्तिगत शौक है। क्या न्यायपालिका जजों की नियुक्ति से संबंधित कानून बना सकती है।
वहीं, एक अन्य अभ्यर्थी से पूछा गया कि क्या उत्तराखंड में पंजीकरण विभाग पूरी तरह ऑनलाइन हो चुका
है। साक्षात्कार कक्ष में लगी महात्मा गांधी की तस्वीर दिखाकर पूछा गया कि गांधी जी के तीन ऐसे गुण बताएं, जो उन्हें लगता है कि उनमें भी हैं। क्या आज के समय में गांधीजी के विचार प्रासंगिक हैं।
परीक्षक व डीएचई के ऊपर अंकेक्षकों की बोर्ड से नियुक्ति, आज से जांची जाएगी कॉपी
कॉपियों की त्रिस्तरीय जांच को अनुभवी शिक्षकों की तैनाती |
प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं की पूरी गंभीरता से त्रिस्तरीय जांच की जाएगी। यूपी बोर्ड ने इस साल पहली बार राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और वरिष्ठ शिक्षकों की अंकेक्षण में ड्यूटी लगाई है ताकि किसी प्रकार की लापरवाही न रह जाए। बोर्ड की कॉपियों का पहले परीक्षक मूल्यांकन करते हैं और उसके बाद उप मुख्य नियंत्रक या डिप्टी हेड एग्जामिनर (डीएचई) रैंडम 45 या 50 कॉपियों में से कम से कम पांच कॉपियों की जांच करते हैं कि कहीं कोई कमी तो नहीं रह गई।
तीसरे चरण में डीएचई के अधीन जांची जांची गई कुल कॉपियों में से 15 प्रतिशत की जांच अंकेक्षक करते हैं। अंकेक्षण का नियम तो है लेकिन मूल्यांकन केंद्रों पर उसका गंभीरता से पालन नहीं होता। पिछले साल तक मूल्यांकन केंद्र स्तर पर ही अंकेक्षकों की नियुक्ति कर ली जाती थी लेकिन हकीकत में खानापूरी ही होती थी। कई केंद्रों पर अनुभवहीन शिक्षकों को भी अंकेक्षण की जिम्मेदारी सौंप दी जाती थी जो परीक्षक या डीएचई की कमियां इंगित तक नहीं कर पाते थे। इसकी शिकायत मिलने पर यूपी बोर्ड ने इस साल पहली बार अपने स्तर से अंकेक्षकों की नियुक्ति की है।
दस परीक्षक पर एक डीएचई और दो डीएचई पर एक अंकेक्षक की व्यवस्था की गई है। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने निर्देशित किया है कि अंकेक्षक प्रतिदिन अपनी रिपोर्ट उप-नियंत्रक और जिला विद्यालयनिरीक्षक को सौंपेंगे। अंकेक्षक
यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी उत्तर अमूल्यांकित न रह गया। सचिव ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, जिला विद्यालय निरीक्षक और मूल्यांकन केंद्र के उपनियंत्रक (प्रधानाचार्य) को पत्र लिखा है कि कार्यभार को देखते हुए एक मूल्यांकन केन्द्र पर एक से अधिक अंकेक्षकों की तैनाती की जाएगी।
प्रधानाचार्यों की ड्यूटी लगाने पर जताया रोष
प्रयागराज। यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य में प्रधानाचार्यों की ड्यूटी को लेकर प्रदेशभर में असंतोष व्याप्त है। राजकीय शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश ने इस संबंध में अपर मुख्य सचिव (माध्यमिक शिक्षा), उत्तर प्रदेश शासन को ज्ञापन भेजकर आपत्ति दर्ज कराई है। संघ के प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर पांडेय और प्रांतीय महामंत्री अरुण यादव ने बताया कि परिषद के क्षेत्रीय कार्यालयों प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, बरेली एवं मेरठ की ओर से प्रधानाचार्यों को उनके पद की गरिमा के विपरीत अंकेक्षण कार्य में लगाया गया है। इससे प्रदेश के हाईस्कूलों के प्रधानाचार्यों में व्यापक रोष है।
सॉफ्टवेयर के माध्यम से 6980 अंकेक्षक नियुक्त
उत्तरपुस्तिकाओं के गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन के लिए पहली बार सॉफ्टवेयर के माध्यम से 6980 अंकेक्षक नियुक्त किए हैं। इनमें प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक व वरिष्ठ शिक्षक शामिल हैं, जो 15 प्रतिशत कॉपियों का रेंडम परीक्षण करेंगे। परिषद सचिव भगवती सिंह के अनुसार यह निर्णय मूल्यांकन को त्रुटिरहित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। इससे न केवल परीक्षा प्रणाली की साख बढ़ेगी, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी |
आंकड़ों पर एक नजर
18 मार्च से 250 केंद्रों पर शुरू होगा मूल्यांकन।
हाईस्कूल में 4300 अंकेक्षक, 8550 डीएचई व 83800 परीक्षक।
इंटर में 2590 अंकेक्षक, 5300 डीएचई व 48990 परीक्षक।
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