शाम को महंगी, दिन में सस्ती मिलेगी बिजली

पटना। स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले राज्य के 87 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को आगामी एक अप्रैल से दिन में सस्ती तो शाम में महंगी बिजली मिलेगी। देर रात्रि के बाद खपत के अनुसार ही बिजली बिल देना होगा। बिजली कंपनी की याचिका पर बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने टाइम ऑफ डे (टीओडी) टैरिफ को मंजूर कर दिया है।
पिछले वर्ष केवल औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए यह व्यवस्था थी। लेकिन, अब स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाले सभी उपभोक्ताओं को इसी नियम के अनुसार बिजली मिलेगी। स्मार्ट मीटर नहीं होने की स्थिति में जिनका लोड 10 किलोवाट से अधिक होगा, उनको दिन में सस्ती तो शाम में महंगी बिजली मिलेगी।
बिजली कंपनी ने कृषि कनेक्शन को छोड़ सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए टीओडी का प्रस्ताव दिया था। विमर्श के बाद आयोग ने टीओडी मंजूर किया। इसके अनुसार रात के 11 बजे से सुबह नौ बजे तक बिजली खपत करने पर कंपनी की ओर से निर्धारित दर के अनुसार ही बिजली बिल देना होगा। यानी अगर 100 रुपए की बिजली खपत होगी तो उनको उतना ही पैसा देना
होगा। वहीं सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक बिजली खपत करने पर लोगों को मात्र 80 फीसदी ही पैसा देना होगा। यानी अगर इस अवधि में 100 रुपएकी बिजली खपत होगी तो उपभोक्ताओं को मात्र 80 रुपए ही देने होंगे। जबकि शाम पांच बजे से रात 11 बजे तक अगर 100 रुपए की बिजली खपत करेंगे तो 120 रुपए देने होंगे। हालांकि, आयोग ने घरेलू उपभोक्ताओं से 100 रुपए की खपत पर 110 रुपए ही लेने को कहा है। लेकिन घरेलू को छोड़ व्यावसायिक, छोटे व बड़े औद्योगिक श्रेणी के उपभोक्ताओं से 120 फीसदी राशि वसूली जाएगी।
प्राविधिक सहायक ग्रुप सी के 2759 पदों पर होगी भर्ती
उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने कृषि विभाग के लिए जारी की विज्ञप्ति
लखनऊ। उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने कृषि विभाग में प्राविधिक सहायक ग्रुप-सी के 2759 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए मुख्य लिखित परीक्षा को लेकर मंगलवार को विज्ञप्ति जारी कर दी। इसके लिए 22 मई से ऑनलाइन आवेदन और शुल्क जमा करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसकी अंतिम तिथि 11 जून निर्धारित की गई है। वहीं, शुल्क समायोजन एवं आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 18 जून तय है।
बोर्ड द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, कृषि निदेशालय के नियंत्रणाधीन प्राविधिक सहायक ग्रुप सी के 2759 पदों पर भर्ती के लिए केवल वही अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जो प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी-2025) में शामिल हो चुके हों और उन्हें आयोग द्वारा पीईटी 2025 का स्कोर कार्ड जारी किया गया हो। मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों की छंटनी उनके पीईटी 2025 के नार्मलाइज्ड स्कोर के आधार पर मेरिट के अनुसार की जाएगी। पीईटी 2025 के वास्तविक स्कोर अथवा नार्मलाइज्ड स्कोर में शून्य या उससे कम अथवा ऋणात्मक अंक प्राप्त करने वालों को शॉर्टलिस्ट नहीं किया जाएगा।
दो घंटे में 100 प्रश्न करने होंगे हल
परीक्षा के दौरान 100 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिन्हें दो घंटे में हल करना होगा। प्रश्न वस्तुनिष्ठ एवं बहुविकल्पीय होंगे। प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा। गलत उत्तर के लिए ऋणात्मक अंक का प्रावधान भी किया गया है। परीक्षा में फसल विज्ञान, जैव तकनीकी, पादप प्रजनन, क्रॉप फिजियोलॉजी, मृदा एवं जल प्रबंधन, कृषि प्रसार, कृषि अर्थशास्त्र एवं योजनाएं, पशुपालन एवं दुग्ध विज्ञान, कंप्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी अवधारणाओं एवं इस क्षेत्र में समसामायिक प्रौद्योगिकी विकास एवं नवाचार का ज्ञान, उत्तर प्रदेश राज्य से संबंधित सवाल पूछे जाएंगे।
यह अर्हता होनी चाहिए
किसी मान्यता प्राप्त संस्था या किसी विश्वविद्यालय से कृषि में स्नातक उपाधि या उसके समकक्ष जैसे बीएससी (ऑनर्स) कृषि, बीएससी उद्यान/बीएससी (ऑनर्स) उद्यान, बीएससी फॉरेस्ट्री, बीएससी (ऑनर्स) फॉरेस्ट्री, बीटेक (कृषि अभियंत्रण), कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा प्रदत्त बीएससी (गृह विज्ञान) / कम्युनिटी साइंस में चार वर्ष की उपाधि।
यूपीटीईटी के लिए फर्जी वेबसाइट, शिकायत की|
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने यूपीटीईटी-2026 को लेकर सूचना जारी करते हुए अभ्यर्थियों को फर्जी वेबसाइट से सावधान रहने की अपील की है। आयोग के अनुसार 20 मार्च 2026 को जारी विज्ञप्ति के तहत शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 का विस्तृत विज्ञापन और निर्देश पुस्तिका आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है, जहां से अभ्यर्थी सही जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि 'uptet2026.in' नाम से एक फर्जी वेबसाइट / URL https://uptet2026.in/ बनाई गई है, जो आधिकारिक वेबसाइट की तरह ही दिखती है और आवेदन से जुड़े विकल्प भी प्रदर्शित करती है। यह पूरी तरह भ्रामक है और अभ्यर्थियों को गुमराह करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। उपसचिव संजय कुमार सिंह ने बताया कि इस मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है।
साथ ही अभ्यर्थियों को निर्देश दिया गया है कि वे केवल आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही आवेदन करें, ताकि किसी भी प्रकार की आर्थिक या मानसिक हानि से बचा जा सके।
शुल्क घटाने व त्रुटिहीन प्रश्नपत्र की मांग
यूपीटीईटी-2026 के बढ़े हुए शुल्क को कम करने और परीक्षाओं में त्रुटिरहित प्रश्नपत्र तैयार कराने की मांग को लेकर युवा मंच ने शिक्षा सेवा चयन आयोग के उप सचिव संजय सिंह को ज्ञापन सौंपा। अनिल सिंह ने कहा कि टीईटी के लिए 1000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जिससे प्राथमिक और उच्च प्राथमिक दोनों के लिए आवेदन करने पर अभ्यर्थियों को 2000 रुपये तक देना पड़ रहा है। बेरोजगार युवाओं पर यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ है। इस दौरान राहुल पांडेय व ज्ञान प्रकाश सिंह आदि मौजूद रहे।
जेईई एडवांस्ड 2026 के पैटर्न में नहीं होगा बदलाव
पटना। जेईई एडवांस्ड 2026 के पैटर्न में कोई बदलाव नहीं होगा। वर्ष 2025 में जो पैटर्न था, वहीं 2026 में भी रहेगा। इसकी पुष्टि आईआईटी रुड़की ने की है।
इस बार जेईई एडवांस्ड आयोजित करने वाली संस्थान आईआईटी रुड़की ने कहा कि इस वर्ष जेईई एडवांस्ड का पैटर्न पहले जैसा ही रहेगा। पिछले कुछ समय से परीक्षा पैटर्न में बदलाव की अटकलें लगायी जा रही थीं। ज्वाइंट एडमिशन बोर्ड (जेएबी) की बैठकों में भी इस विषय पर चर्चा हुई थी और एडैप्टिव पैटर्न लागू करने का सुझाव सामने आया था। हालांकि, आईआईटी रुड़की ने साफ किया है कि इस वर्ष कोई बदलाव लागू नहीं किया जायेगा और आईआईटी रुड़की ने स्पष्ट की स्थिति परीक्षा पूर्ववत प्रारूप में ही आयोजित होगी
परीक्षा पूर्ववत प्रारूप में ही आयोजित होगी। जेईई एडवांस्ड 17 मई को आयोजित होगी। इसमें वही छात्र शामिल होंगे जो जेईई मेन में सफल होंगे। जेईई एडवांस्ड के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 23 अप्रैल से दो मई तक चलेगी। जेईई मेन दो अप्रैल से : अभी जेईई मेन के दूसरे सत्र की परीक्षा पेपर-1 (बीई/बीटेक) दो, चार, पांच, छह और 8 अप्रैल को आयोजित की जायेगी। पेपर-2 (बीआर्क/बी प्लानिंग) सात अप्रैल को आयोजित की जायेगी।
सीएपीएफ : भर्ती, पदोन्नति व सेवा के बनेंगे समान नियम
नई दिल्ली। प्रस्तावित सीएपीएफ बिल का मकसद पांचों प्रमुख केंद्रीय सुरक्षा बलों, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और केंद्रीय औद्योगिक बल सुरक्षा (सीआईएसएफ) के लिए एकीकृत प्रशासनिक ढांचा तैयार करना है। फिलहाल ये सभी बल अलग-अलग कानूनों के तहत संचालित होते हैं। विधेयक के तहत भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति और सेवा शर्तों को समान बनाने का प्रस्ताव है। इसमें आईपीएस अधिकारियों की वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति को औपचारिक रूप देने की बात भी है। यह बिल सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद लाया गया है, जिसमें सीएपीएफ में आईपीएस अफसरों की प्रतिनियुक्ति को कम करने और कैडर समीक्षा करने के निर्देश दिए गए थे।
27 लाख से अधिक लोगों के आयकर रिफंड अटके
रिफंड रुकने के मुख्य कारण
नई दिल्ली। आयकर रिटर्न दाखिल करने के बाद रिफंड का इंतजार होना लाजिमी है। वित्त वर्ष 2025-26 में भी आयकर रिफंड में देरी एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 24 मार्च 2026 तक कुल 8.89 करोड़ रिटर्न दाखिल किए गए हैं। इनमें से 8.77 करोड़ रिटर्न सत्यापित हो चुके हैं, जबकि 8.50 करोड़ रिटर्न प्रोसेस किए जा चुके हैं।
इसका मतलब है कि करीब 27 लाख रिटर्न अभी भी प्रोसेसिंग के इंतजार में हैं, जिससे लाखों लोगों को रिफंड मिलने में देरी हो रही है।
कर मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि अब रिफंड में देरी सिर्फ प्रशासनिक कारणों से नहीं, बल्कि तकनीकी और डेटा से जुड़ी समस्याओं के कारण भी हो रही है। कई मामलों में करदाताओं द्वारा दी गई जानकारी और फॉर्म 26एएस या एआईएस यानी एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट के विवरण में अंतर पाया गया है, जिससे रिटर्न प्रोसेसिंग रुक गई है। इसके अलावा, गलत बैंक डिटेल्स या अकाउंट का प्री-वैलिडेशन न होना भी एक बड़ी वजह है।
ई-सत्यापन में देरी भी रिफंड अटकने का कारण बनती है। कई लोग रिटर्न भरने के बाद समय पर इसे सत्यापित नहीं करते, जिससे प्रोसेसिंग शुरू ही नहीं हो पाती।
वहीं, कुछ मामलों को जांच के लिए
चुना जाता है, जिससे रिफंड आने में और ज्यादा समय लग जाता है। आमतौर पर सही जानकारी होने पर रिफंड सात से 45 दिनों के भीतर मिल जाता है, लेकिन इन समस्याओं के चलते इसमें कई महीनों की देरी हो सकती है। ऐसे में करदाताओं को चाहिए कि रिटर्न भरने से पहले सभी दस्तावेजों का मिलान करें, सही बैंक विवरण दें और समय पर ई-सत्यापन पूरा करें, ताकि रिफंड जल्दी मिल सके।
कब तक है रिफंड की अंतिम तारीख
आयकर वापसी
आईटी रिफंड संसाधित
नियमों के मुताबिक, आयकर विभाग के पास वित्त वर्ष 2024-25 के रिटर्न प्रोसेस करने और रिफंड भेजने के लिए 31 दिसंबर 2026 तक का कानूनी समय है। इसका मतलब यह है कि भले ही आपने अपना आयकर रिटर्न समय पर भरा हो या विलंबित रिटर्न भरा हो, विभाग के पास इसे प्रोसेस करने के लिए इस साल के अंत तक का मौका है। 31 दिसंबर 2026 के बाद विभाग के पास धारा 143(1) के तहत सूचना जारी करने का कानूनी अधिकार नहीं रहेगा।
ताजा आंकड़े के मुताबिक तस्वीर (19 जनवरी 2026 तक)
13.67 करोड़ कुल पंजीकृत करदाता
8.82 करोड़ दाखिल किए गए रिटर्न
8.69 करोड़ सत्यापित हुए रिटर्न
8.17 करोड़ रिटर्न हुए प्रोसेस
न्यूनतम राशि-एसएमएस के नाम पर बैंक वसूल रहे मोटा जुर्माना
नई दिल्ली। बैंकों द्वारा शुल्क के नाम पर ग्राहकों से सालाना मोटी रकम वसूली जा रही है। आंकड़े बताते हैं कि बीते पांच वर्षों के दौरान देश भर में साढ़े 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि एसएमएस और न्यूनतम बैलेंस न होने पर बैंकों ने ग्राहकों की खातों में जमा धनराशि से काटी है। जबकि एटीएम चार्ज के तौर पर भी 26 करोड़ की धनराशि वसूली गई है। आंकड़ों से पता चलता हैं कि वित्तीय वर्ष 2020-21 से वर्ष 2024-25 के बीच बैंकों ने न्यूनतम शुल्क के तौर पर साढ़े 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि वसूली है। यह धनराशि उन खातों से वसूली की है जिनमें बैंक द्वारा तय सीमा से कम धनराशि उपलब्ध थी।
पांच सालो से बैंको द्वारा लिया गया शुल्क (करोड में )
| वित वर्ष | न्यूनतम बैलेंस | एटीएम | एसएमएस |
|---|---|---|---|
| 2020-21 | 1637.41 | -416.68 | 1044.32 |
| 2021-22 | 1805.75 | -507.49 | 1282.03 |
| 2022-23 | 2294.68 | -451.46 | 1193.19 |
| 2023-24 | 2909.10 | -594.12 | 977.28 |
| 2024-25 | 2889.05 | -647.32 | 1218.60 |
न्यूनतम बैलेंस न होने के मामले पर शुल्क काटे जाने पर निजी बैंकों द्वारा सबसे ज्यादा शुल्क वसूला गया है। इसके बाद एटीएम चार्ज के तौर पर करीब 2600 करोड़ और एसएमएस चार्ज के तौर पर 5700 करोड़ से अधिक की धनराशि ग्राहकों के खाते से काटी गई है। इसमें एटीएम चार्ज उन खातों से काटा गया, जिन्होंने एक महीने में निर्धारित सीमा से अधिक बार एटीएम से धनराशि निकाली। इससे पता चलता है कि ग्राहकों से जुड़ी सेवाओं पर लगाए जा रहे शुल्कों के तौर पर अपना राजस्व संग्रह बढ़ा रहे हैं।
हर साल 1.2 लाख करोड़ की कर्ज माफी
एक तरफ छोटे ग्राहकों से न्यूनतम बैलेंस न रखने पर बैंक खाते से शुल्क काटा जा रहा है। दूसरी तरफ, आंकड़े बताते हैं कि भारत में बैंकों द्वारा करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज हर वर्ष माफ या डूबा हुआ माना जा रहा है। बीते पांच वर्षों के दौरान करीब 6.15 लाख करोड़ रुपये का राइट ऑफ किया गया। यानी ऐसा कर्ज जिसकी वसूली करनी मुश्किल होती है या फिर कर्ज अदा करने वाली कोई व्यक्ति सक्षम नहीं था तो उसे गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) की श्रेणी में डाला।
ग्राहक ऐसे बचा सकते हैं यह शुल्क
मौजूदा समय में रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित मानकों के हिसाब से बेसिक सेविंग बैंक डिपॉजिट अकाउंट और प्रधानमंत्री जन धन योजना खाते पर कोई शुल्क न्यूनतम शुल्क नहीं लगता है। जनधन खाता हर किसी व्यक्ति का नहीं खुलता है लेकिन बीएसबीडीए, जिसे बुनियादी बचत बैंक जमा खाता भी कहा जाता है, उसे कोई भी व्यक्ति खुलवा सकता है। हालांकि इसी लेनदेन और सालाना जमा की सीमा निर्धारित है। जैसे आप महीने में केवल चार बार ही पैसे निकाल सकते हैं। उसके बाद चार्ज लगेगा।
क्या कहती है सरकार
बीते दिनों वित्त मंत्रालय ने बताया कि देश के सार्वजनिक और निजी बैंक न्यूनतम बैलेंस न रखने, एटीएम से ज्यादा निकासी और एसएमएस अलर्ट जैसी सेवाओं पर शुल्क लेते हैं। हालांकि यह सभी चार्ज भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के तहत तय किए जाते हैं और इन्हें पारदर्शी व उचित होना जरूरी है। सरकार के अनुसार बैंक अपने बोर्ड द्वारा तय नीतियों के आधार पर चार्ज लेते हैं
डीएलएड प्रशिक्षु, शिक्षक दे सकेंगे टीईटी
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी)-2026 के विज्ञापन में बदलाव करते हुए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने डीएलएड प्रशिक्षुओं और सेवारत शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। अब डीएलएड के प्रथम और द्वितीय सेमेस्टर के प्रशिक्षु और सभी सेवारत सहायक अध्यापक भी टीईटी के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह निर्णय मंगलवार को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की बैठक में लिया गया।
आयोग ने 20 मार्च को टीईटी-
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की बैठक में फैसला लिया 2026 का विज्ञापन जारी किया था, जिसमें कुछ ऐसे प्रावधान थे, जिनके कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी आवेदन से वंचित हो रहे थे। टीईटी के विज्ञापन पर उठे रहे सवालों को आपके अपने अखबार 'हिन्दुस्तान' ने प्रमुखता से उठाया। 22 मार्च के अंक में 'यूपी-टीईटी के आवेदन से तीन लाख डीएलएड प्रशिक्षु बाहर' और 24 मार्च के अंक में 'टीईटी से हजारों सरकारी शिक्षक भी बाहर' शीर्षक से प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए आयोग ने मंगलवार को हुई बैठक में इस पर विचार किया। सभी पहलूओं पर विचार के बाद आयोग ने विज्ञापन में संशोधन करने का फैसला लिया।
उप सचिव डॉ. संजय कुमार सिंह की ओर से जारी शुद्धिपत्र के अनुसार अब शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में प्रवेश ले चुके या अध्ययनरत अभ्यर्थी भी टीईटी के लिए पात्र होंगे। पहले केवल अंतिम वर्ष में शामिल और उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को ही पात्र माना गया था, जिसे अब बदल दिया गया है। इस संशोधन से डीएलएड के तीन लाख प्रशिक्षुओं को सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुरूप सेवारत सभी सहायक अध्यापकों को भी परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई है।
पूर्व में विज्ञापन में उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी में विशिष्ट बीटीसी को शामिल नहीं करने के बीपीएड, डीपीएड और सीपीएड प्रशिक्षण के आधार पर चयनित अभ्यर्थी बाहर हो गए थे। इन्हें भी शामिल कर लिया गया है। प्राथमिक स्तर की टीईटी के अर्हता की टिप्पणी में बीएड का उल्लेख था, इसे भी विलोपित कर दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह संशोधन न्यायालय के आदेश और एनसीटीई के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया गया है। नए प्रावधान लागू होने के बाद अब अधिक से अधिक अभ्यर्थी टीईटी-2026 में भाग ले सकेंगे।
साधारण अपराध में भर्ती से वंचित नहीं कर सकतेः कोर्ट
लखनऊ। हाईकोर्ट लखनऊ बेंच ने अहम फैसले में कहा है कि लंबित साधारण आपराधिक मामले के आधार पर किसी अभ्यर्थी को सरकारी नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता, विशेष तौर तब जब उसने मामले की जानकारी स्वयं दी हो।
यह निर्णय न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने राकेश कुमार वर्मा की याचिका को मंजूर करते हुए पारित किया। याची का चयन अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा कनिष्ठ सहायक पद पर हुआ था और वह चिकित्सकीय रूप से भी उपयुक्त पाया गया। इसके बावजूद लंबित आपराधिक केस के आधार पर उसे नियुक्ति से इनकार कर दिया गया था। अदालत ने पाया कि याची इस मामले में मुख्य आरोपी नहीं, बल्कि सह-आरोपी है और उसके खिलाफ कोई विशिष्ट आरोप भी नहीं है। न्यायालय ने अवतार सिंह मामले में दिए निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि यदि अभ्यर्थी ने आपराधिक मामले की जानकारी स्वयं दी है और मामला गंभीर प्रकृति का नहीं है, तो उसे केवल इसी आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।
प्री का परिणाम दो माह बाद भी नहीं, 14 जून को मेंस
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से राजकीय विद्यालयों में एलटी ग्रेड (सहायक अध्यापक) के सामाजिक विज्ञान विषय की प्रारंभिक परीक्षा के दो महीने बाद भी परिणाम घोषित नहीं होने से अभ्यर्थी परेशान हैं। छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को आयोग के सचिव को संबोधित ज्ञापन सौंपकर 17 जनवरी को आयोजित एलटी सामाजिक विज्ञान की प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित करने की मांग की।
अभ्यर्थियों का कहना है कि 14 जून को मुख्य परीक्षा प्रस्तावित है और अब तक असमंजस की स्थिति बनी हुई है। गणित और हिंदी विषय की मुख्य परीक्षा के आवेदन भी अभी शुरू नहीं हुए प्रतियोगी छात्र दिनेश यादव का कहना है कि यदि 30 मार्च तक सामाजिक विज्ञान प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम हैं।
एलटी कंप्यूटर की प्री परीक्षा के प्रवेश पत्र जारी
यूपीपीएससी ने राजकीय विद्यालयों में एलटी ग्रेड (सहायक अध्यापक) कंप्यूटर विषय की पांच अप्रैल को 9:30 से 11:30 बजे की पाली में प्रस्तावित प्री परीक्षा के प्रवेशपत्र बुधवार को जारी कर दिए। परीक्षा नियंत्रक हर्षदेव पांडेय के अनुसार गोरखपुर, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, प्रयागराज एवं वाराणसी में होने जा रही परीक्षा के प्रवेश पत्र वेबसाइट पर है। कंप्यूटर के 1056 पदों के लिए 70496 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है।
जारी नहीं होता आयोग पर अनशन करेंगे। ज्ञापन देने वालों में पंकज पांडेय, सुनील कुमार, नितेश कुमार पाल, सर्वेश पांडेय, संजय यादव, प्रभाकर सिंह परिहार आदि शामिल थे।
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