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बीएड के 107 पदों के लिए फिर से करना पड़ेगा आवेदन

बीएड के 107 पदों के लिए फिर से करना पड़ेगा आवेदन

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में सहायक आचार्य के 1017 पदों पर भर्ती के लिए संशोधित प्रक्रिया लागू करते हुए आवेदन फिर से आमंत्रित किए हैं। इनमें बीएड विषय के 107 पद भी शामिल हैं। इस भर्ती के लिए मूल विज्ञापन वर्ष 2022 में जारी हुआ था, लेकिन अर्हता संबंधी विवादों के चलते प्रक्रिया बार-बार प्रभावित होती रही।

आयोग के सचिव के अनुसार, पूर्व में 9 जुलाई 2022 और 23 मई 2025 के संशोधित विज्ञापनों के तहत आवेदन करने वाले पात्र अभ्यर्थियों को पुनः आवेदन करना होगा। इसके लिए अभ्यर्थियों को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस और ईमेल के माध्यम से आवेदन संख्या भेजी गई है, जिसका उपयोग कर वे नया आवेदन कर सकेंगे। ऐसे अभ्यर्थियों को दोबारा आवेदन शुल्क नहीं देना होगा। हालांकि, वे अभ्यर्थी जो 31 अगस्त 2022 तक निर्धारित शैक्षिक योग्यता पूरी नहीं कर पाए थे, वे कार्यालय के कार्य दिवस में सचिव, शिक्षा सेवा चयन आयोग को संबोधित प्रार्थना पत्र, आवेदन की प्रति और बैंक विवरण संलग्न कर शुल्क वापसी के लिए आवेदन कर सकते हैं।

आयोग के सचिव ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन और शुल्क भुगतान की प्रक्रिया 28 अप्रैल से शुरू होगी। आवेदन और शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 27 मई निर्धारित की गई है।

वहीं, आवेदन में संशोधन और शुल्क संबंधित समाधान की अंतिम तिथि 30 मई तथा 28 जुलाई 2026 तय की गई है। उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय ने 9 दिसंबर 2022 को पारित आदेश में बीएड विषय के सहायक आचार्य पद की अर्हता को एनसीटीई रेगुलेशन 2014 के अनुरूप न मानते हुए विज्ञापन को निरस्त कर पुनः जारी करने का निर्देश दिया था।

इसके बाद आयोग ने 23 मई 2025 को संशोधित विज्ञापन संख्या 51 जारी किया।

भर्ती के लिए 2022 में जारी हुआ था विज्ञापन

परीक्षा और साक्षात्कार से होगी प्राचार्य एवं प्रधानाचार्य की भर्ती

प्रयागराज। प्रदेश के महाविद्यालयों एवं सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्राचार्य/प्रधानाचार्य भर्ती प्रक्रिया लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर ही होगी। मई 2025 में शासन से अनुमोदन मिलने के बाद उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग पहले ही इसे स्पष्ट कर चुका है। हालांकि अब तक भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।

इसके लिए 360 अंकों की लिखित परीक्षा होगी। इसमें 120 प्रश्न होंगे, जबकि साक्षात्कार 40 अंकों का होगा। असिस्टेंट प्रोफेसर, इंटर कॉलेजों के प्रधानाचार्य और माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक पदों पर भी चयन की यही प्रक्रिया लागू होगी। सूत्रों के अनुसार, शासन से अनुमोदन मिलने के बावजूद अब तक इस संबंध में गजट जारी नहीं हो सका है। इससे भर्ती प्रक्रिया पर संशय बना हुआ है। इससे पहले वर्ष 2013 में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने प्रधानाचार्यों की भर्ती केवल साक्षात्कार के आधार पर की थी।

शिक्षा निदेशालय के अनुसार, इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य के 1502 और हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक के 1003 पद रिक्त हैं। आयोग के उप सचिव संजय कुमार सिंह के अनुसार, आयोग ने मार्च 2025 में ही परीक्षा और साक्षात्कार आधारित भर्ती का प्रस्ताव शासन को भेजा था, जिसे मई 2025 में मंजूरी मिल गई। आयोग टीजीटी, पीजीटी के साथ-साथ प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक पदों की भर्ती भी एक साथ कराने की तैयारी में है।

बीएड असि. प्रोफेसर भर्ती को संशोधित विज्ञापन जारी

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने बीएड विषय के सहायक आचार्य के 107 पदों पर भर्ती के लिए एक बार फिर मंगलवार को संशोधित विज्ञापन संख्या 51 जारी किया है। यह भर्ती प्रक्रिया पहले भी दो बार विज्ञापित हो चुकी थी, लेकिन अर्हता से जुड़े विवादों और न्यायालय के आदेशों के कारण इसे निरस्त करना पड़ा था। अब नई पात्रता तय होने के बाद अभ्यर्थियों से फिर आवेदन मांगे गए हैं। विदित हो कि प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालय में इस भर्ती के लिए पहली 2022 में आवेदन मांगे गए थे।

आयोग के उपसचिव डॉ. संजय कुमार सिंह के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया मंगलवार से शुरू हो गई है। अंतिम तिथि 27 मई तय की गई है। आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 30 मई है, जबकि लिखित परीक्षा 28 जुलाई को आयोजित की जाएगी। अभ्यर्थियों को आवेदन से पहले आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर विस्तृत विज्ञापन ध्यान से पढ़ने की सलाह दी गई है।

इस भर्ती में वही अभ्यर्थी आवेदन कर सकेंगे, जिन्होंने 31 अगस्त 2022 तक एनसीटीई रेगुलेशन-2014 के अनुसार निर्धारित शैक्षिक अर्हता पूरी कर ली थी। पहले आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों को भी दोबारा आवेदन करना होगा, हालांकि उन्हें आवेदन शुल्क दोबारा नहीं देना पड़ेगा। आयोग ने उनके पुराने आवेदन नंबर एसएमएस और ईमेल के माध्यम से भेज दिए हैं।

आधार जन्मतिथि का प्रमाण नहीं

नई दिल्ली। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड को जन्मतिथि या उम्र के सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

इसका मुख्य काम सिर्फ किसी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करना है। यह स्पष्टीकरण लोगों की उलझनों को दूर करने के लिए जारी किया है, जिसमें माना जा रहा था कि आधार कार्ड पर छपी जन्मतिथि को जन्म के आधिकारिक प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

जनगणना प्रशिक्षण में लगी ड्यूटी, अब पढ़ाएगा कौन हालात

प्रयागराज। स्कूल चलो अभियान के बाद बेसिक स्कूलों के शिक्षकों पर जनगणना का दायित्व आ गया है। सभी शिक्षकों को तीन-तीन दिन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें एक साथ सभी शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी जा रही है जिससे स्कूल शिक्षकविहीन हो रहे हैं जबकि पूर्व में बीएसए अनिल कुमार ने पत्र जारी कर

स्पष्ट किया है कि कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन न होने पाए। प्राथमिक विद्यालय पाठकपुर, कोरांव के इंचार्ज प्रधानाध्यापक कमल सिंह ने बीईओ संदेश भेजकर बताया है कि स्कूल में तीन अध्यापक हैं। तीनों को जनगणना 2027 के प्रशिक्षण में शामिल होने का निर्देश मिला है। कंपोजिट विद्यालय खीरी के शिक्षकों का प्रशिक्षण 28 से 30 तक होना है। इसमें सभी सहायक अध्यापक और इंचार्जप्रधानाध्यापक की ड्यूटी लगाई गई है। मात्र दो शिक्षामित्र विद्यालय में हैं।

बादलों ने दिलाई तपिश से फौरी राहत, पारा लुढ़का

प्रयागराज। बादलों की आवाजाही से मंगलवार को कई दिन से झुलसाने वाली गर्मी और तपिश से लोगों को फौरी राहत मिली। दोपहर बाद धूप कड़क हुई। तेज हवाओं और गैर प्रदेश संग आसपास के जिलों में हुई हल्की बारिश से बढ़ी उमस ने लोगों की परेशानी तो बढ़ाई लेकिन धूप की आंच से भी बचाया। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि बुधवार को धूप-छांव के बीच बूंदाबांदी हो सकती है।

तेज गर्मी से परेशान लोगों को सुबह बादलों की आवाजाही देख खुशी हुई। तेज हवाओं से मौसम खुशनुमा बना था। करीब 11 बजे सूरज देव बादलों की ओट से निकले लेकिन हवाओं की तेजी से धूप अन्य दिनों की अपेक्षा कम चुभी। बच्चों को स्कूल से लौटते समय धूप से दिक्कत हुई।

तेज हवाओं ने धूप से बचने के लिए लगाई गई ग्रीन नेट, तिरपाल आदि की छावनी उजाड़ दी। शाम को भी तपिश से राहत रही। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रयागराज में अधिकतम तापमान 24 घंटे में 44.2 डिग्री से 3.2 डिग्री कम होकर 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज

किया गया। रात के न्यूनतम तापमान ने छलांग लगाई और 28 डिग्री सेल्सियस के शीर्ष पर पहुंच गया। यह इस सीजन का सर्वाधिक न्यूनतम तापमान है। इससे पहले सोमवार को न्यूनतम तापमान 26.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

मौसम वैज्ञानिक इविवि के डॉ. शैलेंद्र राय के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ की वजह से अगले कुछ दिन लू से राहत रहेगी। बादलों की आवाजाही से धूप कमजोर रहेगी। कहीं-कहीं बूंदाबांदी के भी आसार हैं। इस दौरान चक्रवाती हवाएं प्रभावी रहेंगी और उमस परेशानी का कारण बनी रहेगी।

प्रौद्योगिकी केंद्र से प्रशिक्षित को डिप्लोमा-डिग्री मिलेगी

पटना। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि प्रदेश में नव स्थापित प्रौद्योगिकी केंद्रों से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को डिप्लोमा एवं डिग्री दी जाएगी। इससे न सिर्फ युवाओं को बेहतर रोजगार का अवसर मिलेगा, बल्कि रोजगार सृजन का मार्ग भी प्रशस्त होगा। इसका लाभ लाखों बच्चों को मिलेगा और वे कौशलयुक्त होंगे। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा नवनिर्मित प्रौद्योगिकी केंद्र, बिहटा तथा चार एक्सटेंशन सेंटर- मुजफ्फरपुर, रोहतास, दरभंगा एवं मुंगेर का रिमोट के माध्यम से उद्घाटन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रौद्योगिकी केंद्रों में तीन थीम पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें उत्पाद की गुणवत्ता, उसकी पैकेजिंग एवं राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्पादों की कैसे बेहतर ढंग से मार्केटिंग हो सके, इसका प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संयुक्त बिहार में टाटा, बोकारो जैसे कई बड़े उद्योग स्थापित थे, लेकिन वर्ष 2000 में बिहार से झारखंड अलग होने के बाद यहां नाम मात्र के उद्योग रह गए। बिहार में वर्ष 2005 में एनडीए की सरकार बनी, तब से हमलोगों ने बिहार को आगे बढ़ाना शुरू किया। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में पिछले दो दशक में बिहार के हर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विकास कार्य किए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को विकसित बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे हैं। हमलोग बिहार को समृद्ध बनाने के लिए हर स्तर पर कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार एक ऐसा प्रदेश है, जहां इंजीनियरिंग की पढ़ाई के एक साल का शुल्क मात्र 10 रुपये तथा डिप्लोमा का शुल्क मात्र पांच रुपये है।

सभी जिले में मेडिकल कॉलेज बन रहेः सम्राट ने कहा कि नीतीश कुमार ने हर अनुमंडल में आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थान तथा सभी जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना कराई है। अब सभी जिले में मेडिकल कॉलेज भी स्थापित किए जा रहे हैं। गयाजी में जल्द ही प्रौद्योगिकी सेंटर के लिए जमीन चिन्हित कर उपलब्ध करायी जाएगी। बिहार में 10 और टेक्नोलॉजी सेंटर स्थापित करने

की स्वीकृति प्रदान करने के लिए हम पीएम से मिलकर आग्रह करेंगे, ताकि बिहार के अधिक नौजवान कौशलयुक्त हों। हमन मंत्रिपरिषद की पहली बैठक में ही बिहटा के आईआईटी में एआई रिसर्च सेंटर स्थापित करने के लिए 200 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान कर दी है।

15 साल से अधिक आयु वालों को साक्षर बनाने की मुहिम

सूबे के निरक्षरों में पढ़ाई का उत्साह, बनेगा रिकॉर्ड

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के निरक्षरों में पढ़ने-लिखने को लेकर उत्साह बढ़ता जा रहा है। 15 साल या उससे अधिक आयु के गैर-साक्षर प्रौढ़ व्यक्तियों को कार्यात्मक साक्षरता प्रदान करने की दिशा में प्रदेश में उत्साहजनक काम देखने को मिला रहा है।

नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत पिछले चार शैक्षणिक सत्र में साढ़े सात लाख से अधिक असाक्षरों को लिखना-पढ़ना सिखाया जा चुका है। इसके अलावा 2025-26 सत्र में परीक्षा देने वाले तकरीबन 4.5 लाख असाक्षरों को परिणाम का इंतजार है। उम्मीद है राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) से परिणाम जारी होने के बाद साक्षर होने वालों की संख्या दस लाख से अधिक हो जाएगी। साक्षरता, वैकिल्पिक शिक्षा, उर्दू एवं प्राच्य भाषाएं के निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि 2025-26 सत्र में प्रदेश में कुल 542106 असाक्षर चिह्नित किए गए थे जिनमें से पहले चरण में 143946 ने परीक्षा दी थी। इनमें से 122146 पास हो गए और उन्हें साक्षर होने का प्रमाणपत्र दिया जा चुका है। दूसरे चरण में 15 से अधिक आयु के तकरीबन 4.5 लाख असाक्षरों ने परीक्षा दी है जिसका परिणाम अभी घोषित नहीं हुआ है।

पिछले वर्षों के परिणाम को आधार मानें तो 3:5 से चार लाख व्यक्तियों की दूसरे चरण की परीक्षा में पास होने की उम्मीद है। निदेशक ने बताया कि 2026-27 सत्र के लिए दस लाख असाक्षरों को साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है

शिक्षा मंत्रालय की प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (पीएबी) की बैठक में नए सत्र के लक्ष्य को प्रस्तुत किया गया है। मंजूरी मिलने के बाद अगले सत्र का काम शुरू होगा।

परीक्षा केंद्रों पर ऑनलाइन भेजेंगे प्रश्नपत्र, डिजिटल मूल्यांकन होगा

लखनऊ। यूपी के राज्य विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों की परीक्षा में अब प्रश्न पत्र लीक होने की गुंजाइश नहीं रहेगी। परीक्षा कापियों की डिजिटल मूल्यांकन होने से रिजल्ट समय पर जारी होगा। यही नहीं परीक्षा का खर्च भी आधे से कम हो सकेगा। कुलाधिपति कार्यालय की ओर से सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश जारी किए गए हैं।

परीक्षा केंद्रों पर ही प्रिंट होगा पेपर

राज्य विश्वविद्यालयों, राजकीय, एडेड व निजी डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाले करीब 60 लाख छात्रों को इसका लाभमिलेगा। प्रश्नपत्रों को एन्क्रिप्टेड फोल्डर्स में बनाया जाएगा। जिसे ईआरपी लॉगिन के माध्यम से भेजा जाएगा। परीक्षा शुरू होने से आधा घंटे पहले कंट्रोल रूम से मिले पासवर्ड के माध्यम से प्रश्नपत्र को हिंदी व अंग्रेजी भाषा में बदल कर उसका प्रिंट आउट निकाला जाएगा। प्रत्येक प्रश्नपत्र पर परीक्षा केंद्र संख्या, इंटरनेट आईपी और वाटर मार्क के साथ प्रिंट करके छात्रों को बांटा जाएगा। प्रश्नपत्र की फोटो कॉपी सीसीटीवी कैमरे से युक्त कंट्रोल रूम में निकाली जाएगी। जिससे प्रश्नपत्र के लीक होने की गुंजाइश नहीं रहेगी। प्रश्नपत्रों को ऑनलाइन माध्यम से भेजने खर्चा 70 प्रतिशत से घटकर 30 प्रतिशत रह जाएगा। परीक्षा केंद्रों से उत्तर पुस्तिकाओं को भारतीय डाक विभाग के माध्यम से विश्वविद्यालय को भेजा जाएंगा। उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग की जाएगी और कोडिंग होगी। फिर विश्वविद्यालय के सर्वर के माध्यम से उत्तर पुस्तिकाओं को मूल्यांकन केंद्रों पर उपलब्ध कराया जाएगा। रेंडम प्रक्रिया के माध्यम से परीक्षकों को डिजिटल मूल्यांकन के लिए कॉपियां आवंटित की जाएंगी। कॉपियों का मूल्यांकन होने के बाद रिजल्ट तैयार करने में समय नहीं लगेगा और उत्तर पुस्तिका के बदले जाने या खोने की स्थिति नहीं बनेंगी। रिकॉर्ड रखने में भी आसानी होगी।


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