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नए डिग्री कॉलेजों में 9196 शिक्षक-कर्मी नियुक्त होंगे

 नए डिग्री कॉलेजों में 9196 शिक्षक-कर्मी नियुक्त होंगे

पटना। राज्य के 209 नए डिग्री कॉलेजों में प्राचार्य, शिक्षक और कर्मियों सहित 9196 पदों पर बहाली होगी। इनमें प्राचार्य के 209, सहायक प्राध्यापकों के 6479 और लिपिक सहित गैर शैक्षणिक कर्मियों के 2508 पद शामिल हैं। शिक्षकों और कर्मियों की स्थायी नियुक्ति के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने वित्त विभाग को प्रस्ताव भेजा है। वित्त विभाग पद सृजन के इस प्रस्ताव पर प्रशासी पदवर्ग समिति का अनुमोदन लेगा।

विधि विभाग से भी परामर्श लिया जाएगा। इसके बाद इस प्रस्ताव को राज्य कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। कैबिनेट से मंजूरी के बाद नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। शिक्षकों और प्राचार्य का चयन बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग से होगा। जबकि, लिपिक और तकनीकी कर्मियों की नियुक्ति राज्य कर्मचारी चयन आयोग और राज्य तकनीकी सेवा आयोग के जरिये होगी।

प्रत्येक प्रखंड स्तरीय इन डिग्री कॉलेजों में विज्ञान, कला और वाणिज्य संकाय के 15 विषयों में दो-दो सहायक प्रोफेसर के पद सृजित किए गए हैं। एक एक प्राचार्य की बहाली की जाएगी।

हर कॉलेज में एक व्यावसायिक विषय के शिक्षक होंगे। इसके साथ ही हर कॉलेज में 12-12 गैर शैक्षणिक कर्मियों की भी नियुक्ति होगी। इनमें लिपिक, प्रयोगशाला सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर सहित चतुर्थ वर्गीय कर्मी शामिल हैं।

इसी सत्र से छह कला विषयों की पढ़ाई शुरू होगी

इन डिग्री कॉलेजों में जिन 15 विषयों में दो-दो सहायक प्रोफेसर के पद सृजित हुए हैं उनमें कला विषयों में इतिहास, भूगोल, राजनीतिशास्त्र, समाजशास्त्र, हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, मनोविज्ञान, और अर्थशास्त्र तथा विज्ञान में गणित, भौतिकी, रसायन, जीव और वनस्पति विज्ञान शामिल हैं। एक वाणिज्य शास्त्र के विषय हैं। शैक्षणिक सत्र 2026-30 से ही इन नए कॉलेजों में पढ़ाई शुरू कराने का लक्ष्य है। फिलहाल कला संकाय के इतिहास, भूगोल, राजनीतिशास्त्र, समाजशास्त्र, हिन्दी और अंग्रेजी विषयों में ही नामांकन होगा। प्रखंडों में नये डिग्री कॉलेज शुरू करने के लिए जगह चिह्नित कर संबंधित जिलों ने शिक्षा विभाग को सौंप दिया है।

आधे से अधिक अभ्यर्थियों ने छोड़ी शिक्षक भर्ती परीक्षा

प्रयागराज। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में एलटी ग्रेड (सहायक अध्यापक, प्रशिक्षित स्नातक) शिक्षक भर्ती के कंप्यूटर विषय की प्रारंभिक परीक्षा रविवार को सुबह 9:30 से 11:30 बजे की पाली में संपन्न हुई। 28 जुलाई 2025 को जारी विज्ञापन के आठ महीने बाद आयोजित परीक्षा में पंजीकृत 70496 अभ्यर्थियों में से लगभग 43.26 प्रतिशत उपस्थित रहे। 1056 पदों के के लिए आयोजित परीक्षा

में आधे से अधिक अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग प्रयागराज, गोरखपुर, कानपुर नगर, मेरठ, लखनऊ और वाराणसी में 160 केंद्र बनाए थे। अभ्यर्थियों की मानें तो प्रश्नपत्र बहुत कठिन था। सामान्य अध्ययन के 30 प्रश्न तो औसत दर्जे के थे लेकिन विषय के प्रश्न बहुत कठिन थे। इस विषय की प्रारंभिक परीक्षा में भी निर्धारित सीटों के सापेक्ष 15 गुना अभ्यर्थियों का सफल होना मुश्किल है।

आरओ/एआरओ परीक्षा में 419 हुए सफल

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने समीक्षा अधिकारी (आरओ)/ सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) आदि परीक्षा-2023 का अंतिम परिणाम रविवार की रात घोषित कर दिया। कुल चयनित 419 अभ्यर्थियों में से 81 (19 प्रतिशत) महिलाएं हैं। आरओ (सचिवालय) के 322 पदों में से अनिल पांडेय ने टॉप किया है। आदित्य प्रताप सिंह को दूसरा जबकि महिला अभ्यर्थी लक्ष्मी वर्मा को तीसरा स्थान मिला है। आरओ (यूपीपीएससी) 13 पदों में भानु मिश्रा और आरओ (राजस्व परिषद) के तीन पदों में दिग्विजय सिंह प्रथम स्थान पर हैं।

के एआरओ (सचिवालय) के 40 पदों में से शम्सुल हुदा, आशीष कुमार द्विवेदी 338 समीक्षा अधिकारी और 81 सहायक समीक्षा अधिकारी का चयन और अनुपम कुमार उपाध्याय क्रमशः प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पर हैं। आरओ (राजस्व परिषद) के 23 पदों में कुंवर शिवम सिंह और एआरओ (यूपीपीएससी) के 16 पदों में गणेश त्रिपाठी प्रथम स्थान पर हैं। यूपीपीएससी में (एआरओ लेखा) के दो पदों में से सजल कुमार सिंह को प्रथम स्थान मिला है। 11 फरवरी 2024 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के कारण नौ अक्तूबर 2023 को शुरू हुईइस भर्ती का अंतिम परिणाम तकरीबन ढाई साल बाद घोषित हो सका है। चयन परिणाम आयोग की वेबसाइट https://uppsc.up.nic.in पर उपलब्ध है।

पेपरलीक के कारण दोबारा हुई थी प्रारंभिक परीक्षा

(आरओ/एआरओ

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से रविवार को घोषित समीक्षा अधिकारी (आरओ)/ सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) आदि 2023 भर्ती के अंतिम परिणाम के साथ ही अभ्यर्थियों का इंतजार भी खत्म हो गया। आयोग के इतिहास में सबसे विवादित परीक्षाओं में से यह एक रही। खास बात यह है कि इसमें सर्वाधिक 1076004 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। पेपरलीक के कारण आयोग को इसे दोबारा कराना पड़ा था।

11 फरवरी 2024 को पहली बार आरओ/एआरओ की प्रारंभिक परीक्षा कराई गई थी। परीक्षा के दिन ही इसका प्रश्नपत्र लीक होने का हल्ला मच गया 11 फरवरी 2024 को पहली बार हुई थी प्रारंभिक परीक्षा मुख्यमंत्री के निर्देश पर गड़बड़ी की शिकायतों की हुई थी अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र की उत्तरकुंजी शेयर की थी। गाजीपुर में कुछ अभ्यर्थियों ने एक केंद्र के बाहर जमा होकर पेपर लीक होने पर विरोध भी किया था। उसके अगले दिन 12 फरवरी को आयोग ने इस मामले की एसटीएफ से जांच कराने की सिफारिश की थी।

पेपरलीक के आरोपों की जांच के लिए आयोग ने एक तीन सदस्यीय आन्तरिक समिति का भी गठन किया था। उसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर आरओ/एआरओ में गड़बड़ी की शिकायतों की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक देवेश चतुर्वेदी की ओर से भी आदेश जारी किए गए थे। जांच के बाद सीएम ने दो मार्च 2024 को परीक्षा रद्द करने के आदेश दिए थे। इससे पहले समाजवादी पार्टी की सरकार के कार्यकाल के अंतिम दिनों में 27 नवंबर 2016 को आयोजित आरओ/एआरओ 2016 की प्रारंभिक परीक्षा भी पेपरलीक के कारण निरस्त करनी पड़ी थी। पेपरलीक के कारण भर्ती पूरी होने में पांच साल का समय लग गया था। पांच अप्रैल 2021 को अंतिम परिणाम घोषित होने के साथ उस विवाद का अंत हुआ था।

पूर्णतया औपबन्धिक है परीक्षा का परिणाम

आयोग के सचिव अशोक कुमार के अनुसार, परीक्षा में सम्मिलित 419 रिक्तियों (समीक्षा अधिकारी के 338 और सहायक समीक्षा अधिकारी 81) के सापेक्ष कुल 419 अभ्यर्थियों औपबन्धिक रूप से सफल घोषित किया गया है। परिणाम आयोग की वेबसाइट

https://uppsc.up.nic.in पर उपलब्ध है। विज्ञापन में 411 पद थे जो बाद में बढ़कर 419 हो गए। प्रश्नगत परीक्षा का परिणाम पूर्णतया औपबन्धिक है। परीक्षा परिणाम से संबंधित अभ्यर्थियों के प्राप्तांक तथा श्रेणीवार/पदवार कटऑफ अंकों की सूचनाएं शीघ्र ही आयोग की वेबसाइट पर प्रदर्शित की जाएंगी।

अगले विधानसभा चुनाव के बाद ही चुनी जाएगी गांवों की सरकार

26 मई को खत्म हो रहा पंचायतों का कार्यकाल, नई की तैयारी अभी अधूरी... राजनीतिक पार्टियां भी स्थानीय चुनावों में उलझने से बच रहीं

लखनऊ। प्रदेश में निर्धारित समय पर नई पंचायतों का गठन संभव नहीं है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद ही हो सकेंगे। उच्चपदस्थ सूत्र भी इसकी पुष्टि कर रहे हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का फोकस वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव पर है। कोई भी पार्टी स्थानीय चुनावों में नहीं उलझना चाह रही है। साथ ही पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन और आरक्षण की प्रक्रिया भी अधूरी है।

प्रदेश में ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों के निर्वाचन का कार्यकाल क्रमशः 26 मई, 19 जुलाई और 11 जुलाई को समाप्त हो रहा है। जबकि, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए फाइनल मतदाता सूची 15 अप्रैल को प्रकाशित होगी। चुनाव से पहले समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन और आरक्षण की प्रक्रिया भी अधूरी है। इस सबसे एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने से पहले नई पंचायतों के गठन की प्रक्रिया अब पूरी नहीं सकती।

उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने का विकल्प ही अब बचा है। अगर कार्यकाल बढ़ाने में किसी तरह की कोई कानूनी अड़चन आई तो प्रशासक भी बैठाए जा सकते हैं। अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा की ओर से भी पंचायत चुनाव कराने की कोई मांग नहीं उठ रही है। हालांकि, चुनाव को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है।

मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने का मामला हाईकोर्ट भी पहुंच चुका है। है। इस संबंध में याचिका दायर की गई है। याची का कहना है कि अगर मतदाता सूची ही अप्रैल के मध्य तक फाइनल होगी तो आरक्षण की जटिल प्रक्रिया और चुनाव संपन्न कराने के लिए बहुत कम समय बचेगा।

ऐसी स्थिति में चुनाव टलने की आशंका बढ़ गई है जिससे पूर्व की भांति प्रशासकों की नियुक्ति की नौबत आ सकती है। इस संबंध में अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग से एफिडेविट भी मांगा। सूत्रों के मुताबिक राज्य निर्वाचन आयोग ने एफिडेविट दे दिया है। इसमें अपनी तैयारियों की स्थिति स्पष्ट कर दी है।

आरक्षण प्रक्रिया में भी लगता है समय

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण की प्रक्रिया राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की जनसंख्या संबंधी रिपोर्ट के बाद ही आगे बढ़ेगी। अभी इस आयोग का भी गठन नहीं हुआ है। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग विभिन्न जिलों में जाकर ओबीसी वर्ग की आबादी के बारे में जानकारी लेकर अपनी रिपोर्ट सौंपता है।

किसी भी ब्लॉक में ओबीसी की जनसंख्या का प्रतिशत 27% से अधिक होने के बावजूद उस ब्लॉक में ग्राम प्रधान के पद 27% से अधिक आरक्षित नहीं हो सकते। हां, अगर यह प्रतिशत उस ब्लॉक में 27% से कम है तो उसी अनुपात में पद आरक्षित होंगे। अलबत्ता, प्रदेश स्तर पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (ग्राम, क्षेत्र व जिला पंचायत) में ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रतिशत 27% रखना अनिवार्य है।

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