असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में 47.25 फीसदी रही उपस्थिति
एआई की निगरानी में हुई परीक्षा, आधे से अधिक अभ्यर्थी रहे गैरहाजिर
प्रयागराज। अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर भर्ती के लिए आयोजित पुनर्परीक्षा में आधे से अधिक अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। 18 व 19 अप्रैल को प्रदेश के छह जिलों में संपन्न हुई परीक्षा में 82,876 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इसमें से केवल 39,192 (47.25 फीसदी) ने ही उपस्थिति दर्ज कराई है।
इससे पहले यह परीक्षा 16 व 17 अप्रैल 2025 को आयोजित की गई थी। जिसे धांधली के कारण निरस्त कर दिया गया था। जिसमें 46,125 (56.65 फीसदी) अभ्यर्थी शामिल हुए थे।
18 अप्रैल 2026 को आयोजित लिखित परीक्षा में कुल 19,718 परीक्षार्थी उपस्थित रहे। जिनमें 41.35 फीसदी महिला व 58.64 फीसदी पुरुष थे। वहीं 19 अप्रैल, 2026 को संपन्न हुई परीक्षा में कुल
19,474 परीक्षार्थी उपस्थित रहे। इसमें महिला 30.93 फीसदी व 69.07 फीसदी पुरुष परीक्षार्थी थे।
रविवार को आगरा, मेरठ, लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर एवं वाराणसी के 50 केंद्रों में हॉर्टीकल्चर, रक्षा अध्ययन, चित्रकला, गृह विज्ञान, संस्कृत,
इतिहास, गणित, भूगोल, सांख्यिकी, मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, प्राचीन इतिहास, वाणिज्य, संगीत (सितार वाद्ययंत्र) व भौतिक विज्ञान विषय की परीक्षा आयोजित की गई।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग में स्थापित एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार, सचिव, परीक्षा नियंत्रक एवं उपसचिव ने सभी परीक्षा केंद्रों की सघन निगरानी की।
परीक्षा केंद्रों पर लगे एआई कैमरों के माध्यम से परीक्षा दे रहे परीक्षार्थियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई।
पांच केंद्रों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत हुई स्कैनिंग प्रक्रिया
आयोग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रयागराज के निर्धारित पांच परीक्षा केंद्रों पर पाली परीक्षा संपन्न होने के तुरंत बाद परीक्षार्थियों के उत्तर पत्रक (ओएमआर) को उनके परीक्षा कक्षों में ही तुरंत स्कैन कर डाटा सुरक्षित कर लिया गया। इस दौरान मेरी वानामेकर गर्ल्स इंटर कॉलेज, कर्नलगंज इंटर कॉलेज और प्रयाग महिला विद्यापीठ इंटर कॉलेज में अध्यक्ष स्वयं उपस्थित रहे और पायलट प्रोजेक्ट प्रक्रिया की समीक्षा की।
एमटीएस भर्ती में गैरहाजिर रहे 19.47 लाख
प्रयागराज। केंद्र सरकार के मंत्रालयों व विभागों में मल्टी टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) और सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एवं सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (सीबीआईसी एवं सीबीएन) में हवलदार भर्ती 2025 की पहले चरण की कंप्यूटर आधारित परीक्षा आधे से अधिक अभ्यर्थियों ने छोड़ दी। कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की ओर से हाल ही में एक आरटीआई में सूचना दी गई है कि 7948 पदों के लिए आयोजित परीक्षा में देशभर में पंजीकृत 36,17,245 अभ्यर्थियों में से लगभग 16.70 लाख ही उपस्थित रहे। साफ है कि तकरीबन 19.47 लाख परीक्षार्थी गैरहाजिर रहे।
वहीं मध्य क्षेत्र के अधीन उत्तर प्रदेश और बिहार में औसत उपस्थिति राष्ट्रीय आंकड़ों के तुलना में बेहतर रही। यूपी और बिहार में पंजीकृत 510032 अभ्यर्थियों में से 2,64,366 (51.83 प्रतिशत) अभ्यर्थी उपस्थित हुए थे। परीक्षा छोड़ने वालों की सख्या 2,45,666 थी। यूपी में पंजीकृत 315748 अभ्यर्थियों में से 152925 (48.43 फीसदी) उपस्थित रहे जबकि बिहार में पंजीकृत 194284 अभ्यर्थियों में से 111441 (57.36 प्रतिशत) उपस्थित रहे।
परास्नातक में अब 70% की होगी लिखित परीक्षा प्रथम
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने परास्नातक (पीजी) और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से छात्रों को अब लिखित परीक्षा पर ज्यादा ध्यान देना होगा, क्योंकि इसके अंक बढ़ा दिए गए हैं।
विश्वविद्यालय के नए फैसले के अनुसार अब कुल अंकों में 70 प्रतिशत हिस्सा सत्रांत (एंड-सेमेस्टर) लिखित परीक्षा का होगा, जबकि 30 प्रतिशत अंक सतत आंतरिक मूल्यांकन से मिलेंगे। पहले यह अनुपात 40:60 था, यानी 40 प्रतिशत अंक आंतरिक मूल्यांकन और 60 प्रतिशत लिखित परीक्षा के होते थे। अब आंतरिक मूल्यांकन के अंक घटाकर 30 प्रतिशत कर दिए गए हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि लिखित परीक्षा का वजन बढ़ाने से छात्रों की विषय पर पकड़ और तैयारी का बेहतर आकलन हो सकेगा। साथ ही यह कदम नई शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप भी है। विश्वविद्यालय ने इसे लागू करने के लिए विगत दिनों हुई एकेडमिक काउंसिल ने मंजूरी दे दी है और अगले सत्र से यह व्यवस्था प्रभावी हो जाएगी। जहां एक ओर छात्रों को अब पूरे सेमेस्टर में निरंतर प्रदर्शन के साथ साथ अंतिम परीक्षा पर अधिक ध्यान देना होगा, वहीं शिक्षकों को भी आंतरिक मूल्यांकन को और व्यवस्थित ढंग से करना होगा।
महत्वपूर्ण बात यह है कि सत्रांत परीक्षा के प्रश्नपत्र के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी परीक्षा का पैटर्न पहले जैसा ही रहेगा, केवल अंकों का वितरण बदला गया है। इससे छात्रों को नए पैटर्न के लिए अलग से तैयारी करने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन उन्हें लिखित परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करना होगा।
परीक्षा नियंत्रक बोले, लीक नहीं हुआ एईडीओ का प्रश्नपत्र
पटनाः सहायक शिक्षा विकास अधिकारी (एईडीओ) परीक्षा का दूसरा चरण संपन्न हो गया। बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) द्वारा 935 पदों के लिए आयोजित परीक्षा का तीसरा चरण 20 और 21 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा। परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने रविवार को कहा कि द्वितीय चरण की परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ। जो शिकायते आईं, वो कदाचार का प्रयास मात्र हैं।
परीक्षा नियंत्रक ने बताया कि द्वितीय चरण की परीक्षा को लेकर इंटरनेट मीडिया पर तरह-तरह की अफवाह उड़ाई जा रही है। कई स्थानों से शिकायतें आई हैं कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र प्रसारित कर दिया
पदों के लिए आयोजित 935 परीक्षा का तीसरा चरण 20 और 21 अप्रैल को होगा न प्रश्नपत्र लीक होने के साक्ष्य हैं न प्राथमिकी की गई है। चाहे ब्लूटूथ हो या चिट की बात हो, ये शिकायतें केवल कदाचार के प्रयास मात्र हैं। 10 लाख 97 हजार ने परीक्षा के लिए आवेदन किया है। ऐसे में कुछ अभ्यर्थी कदाचार की कोशिश कर सकते हैं। इसके बाद अगर किसी को शिकायत हो, तो पब्लिक ग्रीवांस पोर्टल खुला है। उन्होंने बताया कि 14 अप्रैल से शुरू परीक्षा का समापन 21 को होगा। आयोजन शांतिपूर्ण और कदाचार मुक्त हो, इसके लिए स्थानीय प्रशासन सजग है।
सावधान... कहीं आपके पास तो नहीं आ रहा परीक्षा में पास कराने का फोन
प्रयागराज। अगर आपके मोबाइल पर अंजान नंबर से फोन आ रहा है तो जरा सावधान हो जाइए।
क्योंकि, इन दिनों साइबर ठग अभिभावकों और छात्रों को फोन कर यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में पास कराने का झांसा देकर ठगी का प्रयास कर रहे हैं। इसे देखते हुए साइबर पुलिस सतर्क हो गई है और लोगों को आगाह किया है कि यदि उनके पास ऐसा कोई फोन आए तो उसपर बिल्कुल विश्वास न करें।
ठग फोन कॉल, एसएमएस और व्हाट्सएप के जरिये संपर्क करते हैं और खुद को यूपी बोर्ड या शिक्षा विभाग का अधिकारी बताते हैं। दावा करते हैं कि कुछ शुल्क देकर फेल छात्र को पास कराया जा सकता है या अंकों में बदलाव संभव है। इसके बाद छात्र का नाम, पिता का नाम, रोल नंबर और
स्कूल की जानकारी बताकर भरोसा जीत लेते हैं, जिससे लोग आसानी से इनके जाल में फंस जाते हैं।
साइबर सेल प्रभारी घनश्याम यादव ने बताया कि बोर्ड का या कोई भी सरकारी अधिकारी कभी भी फोन पर पैसे लेकर रिजल्ट में बदलाव नहीं कर सकता। यह पूरी तरह फर्जी और आपराधिक गतिविधि है, जिसका उद्देश्य केवल लोगों से पैसा ठगना है। अगर किसी के पास इस तरह का फोन आता है तो वह सतर्क हो जाए और तुरंत मामले की सूचना पुलिस को दे।
जेएनयू में प्रोफेसर के बच्चों को दाखिला में कोटा देने पर विरोध
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में दाखिले के लिए पांच फीसदी का वार्ड कोटा शिक्षण कर्मचारियों के बच्चों के लिए निर्धारित किए जाने के फैसले को लेकर विरोध शुरू हो गया है। इस मामले पर जेएनयू शिक्षक संघ की ओर से मंगलवार को जीबीएम की आपात बैठक बुलाई गई है।
शिक्षक संघ के सचिव अविनाश कुमार ने बताया कि यह फैसला जेएनयू में दाखिले की इच्छा रखने वाले आम छात्र का हक छीनने जैसा है। जेएनयू की कुछ दिन पहले हुई कार्यकारिणी परिषद की बैठक में प्रोफेसर के बच्चों को दाखिले में पांच फीसदी के वार्ड कोटा के प्रावधान को मंजूरी दी गई। इस बैठक में परिषद के तीन सदस्यों द्वारा प्रस्ताव को लेकर असहमति दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद प्रस्ताव को पारित किया गया। इसको लेकर शिक्षक संघ विरोध दर्ज कराएगा।
यह फैसला आम छात्र को जेएनयू में दाखिले की दौड़ से बाहर कर देगा। प्रोफेसर के बच्चों को ऐसा खास फायदा देना पूरी तरह से अनुचित है। अभी तक ग्रुप बी से लेकर डी के गैर शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए वार्ड कोटे का प्रावधान है।
जेएनयू प्रशासन नए शैक्षणिक सत्र में दाखिले के संबंध में पाठ्यक्रम से लेकर आरक्षित सीट को लेकर सूचना जारी कर चुका है। उसमें अभी वार्ड कोटा में प्रोफेसर के बच्चों के लिए सीट आरक्षित करने का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। वहीं शिक्षण कर्मचारियों के लिए वार्ड कोटा निर्धारित करने को लेकर जेएनयू प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
जिले के 6 शिक्षकों का लखनऊ में सम्मान
रामपुर कारखाना। राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित दक्षता परीक्षा सत्र 2025-26 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जनपद के 6 शिक्षकों को राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह इंदिरा नगर स्थित रानी लक्ष्मीबाई मेमोरियल स्कूल, लखनऊ में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में प्रदेश भर के शिक्षक उपस्थित रहे। जिले के आधा दर्जन शिक्षकों के सम्मानित होने पर बेसिक शिक्षा अधिकारी समेत शिक्षकों ने प्रसन्नता जताई है।
रविवार को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में प्राचार्य, कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन (सीटीई) अजय कुमार सिंह ने सभी चयनित शिक्षकों को सम्मानित किया। मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व निदेशक बेसिक शिक्षा डा. सर्वेद्रविक्रम बहादुर, विशिष्ट अतिथि निदेशक मनोविज्ञान शाला प्रताप नारायण सिंह उपस्थित रहे। देवरिया के सम्मानित शिक्षकों में पीएम श्री कंपोजिट विद्यालय सहवा के विज्ञान शिक्षक एवं राष्ट्रपति पदक प्राप्त खुर्शीद अहमद, जिनके लखनऊ में सम्मानित होते जिले के शिक्षक।
विद्यालय से इस वर्ष 16 विद्यार्थियों का चयन हुआ। सहवा विद्यालय ने प्रदेश में टॉप 20 विद्यालयों में स्थान प्राप्त किया है। इसके अतिरिक्त उच्च प्राथमिक विद्यालय परास खाड, तरकुलवा के मोहम्मद फशीउल्लाह खान (6 चयनित), उच्च प्राथमिक विद्यालय बंजरिया के संजय कुशवाहा (7 चयनित), कंपोजिट विद्यालय कुरमौटा धुरी के ओमप्रकाश तिवारी (5 चयनित), उच्च प्राथमिक विद्यालय भाटपार रानी के अनिल कुमार (7 चयनित) एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय सोहनाग के रवि प्रकाश (8 चयनित) को भी सम्मानित किया गया।
परीक्षा में चयनित सभी विद्यार्थियों को चार वर्षों तक प्रति वर्ष 12,000 की छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी गोपाल मिश्रा, विजय कुमार ओझा, एसआरजी उपेंद्र ) उपाध्याय, आदित्य नारायण गुप्ता, जयशिव प्रताप चंद, प्रधानाध्यापक मो. गजनफर सिद्दीकी आदि ने बधाई दी है।
राजस्व रिकॉर्ड हुए डिजिटल ऑनलाइन मिलेंगे अभिलेख
लखनऊ। जिले में जमीन-जायदाद के कागजात और राजस्व रिकॉर्ड प्राप्त करने की दशकों पुरानी व्यवस्था अब इतिहास बनने जा रही है। सभी पांच तहसीलों के रिकॉर्ड को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अब नागरिकों को खतौनी या बंदोबस्त अभिलेखों के लिए कलेक्ट्रेट या तहसील के दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
जिलाधिकारी विशाख जी ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। प्रशासन ने जिले की पांचों तहसीलों, सदर, मलिहाबाद, पांच तहसीलों में 898 गांव हैं वर्तमान समय में 22.51 लाख दस्तावेजों का हुआ डिजिटाइजेशन मोहनलालगंज, बीकेटी और सरोजनीनगर के अंतर्गत आने वाले सभी सात परगनाओं (लखनऊ, मलिहाबाद, मोहनलालगंज, निगोहां, महोना, बिजनौर और काकोरी) के कुल 898 गांवों का डेटा डिजिटल कर दिया है। अभिलेखों को वेबसाइट https://lucknowbhulekh.in पर देखा जा सकता है।
यूपी में 44 एएसपी को मिली नई तैनाती
इधर से उधर
लखनऊ। शासन ने पुलिस विभाग में 44 एएसपी के कार्यक्षेत्र बदले हैं। इनमें वे अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्हें बीते दिनों पुलिस उपाधीक्षक से अपर पुलिस अधीक्षक के पद पर पदोन्नति प्रदान की गई थी। कई ऐसे अधिकारी ऐसे भी हैं, जिन्हें पदोन्नति के बाद वर्तमान तैनाती स्थल पर ही नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कुछ तबादलों को निरस्त करते हुए अधिकारियों को नई जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। मनोज कुमार गुप्ता को एएसपी हमीरपुर से पीटीसी सीतापुर, अखंड प्रताप सिंह को सुलतानपुर से उप सेनानायक 33वीं वाहनी पीएसी झांसी, ब्रज नारायण सिंह को अपर पुलिस उपायुक्त लखनऊ कमिश्नरेट से एएसपी सुलतानपुर, चिरंजीव मुखर्जी को एएसपी सीआईडी से अपर पुलिस उपायुक्त कमिश्नरेट प्रयागराज के पद पर स्थानांनतरणाधीन से किया गया तबादला निरस्त, हरि राम यादव को एएसपी देवरिया से अपर पुलिस उपायुक्त प्रयागराज कमिश्नरेट, श्रेष्ठा को एएसपी बागपत से एएसपी एटीएस लखनऊ, मुकेश प्रताप सिंह को एएसपी सीआईडी मुख्यालय लखनऊ से उपसेनानायक 43वीं वाहिनी पीएसी एटा, हितेन्द्र कृष्ण को एएसपी 1090 से एएसपी सीआईडी मुख्यालय लखनऊ, मुकेश चन्द्र उत्तम को एएसपी श्रावस्ती से एएसपी विधि प्रकोष्ठ, चन्द्रकेश सिंह को एएसपी पीटीसी सीतापुर से एएसपी श्रावस्ती, अभय कुमार मिश्र एएसपी विजिलेंस लखनऊ से अपर पुलिस उपायुक्त गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट, एसएन वैभव पांडेय को एएसपी सहारनपुर से एएसपी विजिलेंस लखनऊ, उमेश कुमार यादव एएसपी सेक्टर आफिसर सीआईडी बरेली से एएसपी सेक्टर आफिसर सीआईडी प्रयागराज, नवीना शुक्ला एएसपी मेरठ से एएसपी एएनटीएफ (आपरेशन) लखनऊ, राम आशीष यादव एएसपी मुजफ्फरनरगर से अपर पुलिस उपायुक्त लखनऊ कमिश्नरेट, धर्मेंद्र कुमार यादव (प्रथम) उपसेनानायक 10वीं वाहिनी पीएसी बाराबंकी से उपसेनानायक 25वीं वाहिनी पीएसी रायबरेली, त के पद पर तैनाती दी गई है।
गर्मी बढ़ने पर बीएसए स्कूलों के समय में बदलाव कर सकेंगे
लखनऊ । बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) गर्मी अधिक बढ़ने पर जिलों में प्राथमिक स्कूलों के समय में बदलाव कर सकेंगे। शासन ने इसके लिए उन्हें अधिकृत कर दिया है। जालौन, हमीरपुर, औरैया, चंदौली व जौनपुर के बीएसए ने इसका अनुपालन करते हुए अपने जिले में स्कूलों के समय में परिवर्तन कर दिया है।
बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने जिलों को भेजे निर्देश में प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लू के प्रकोप से बचाव एवं राहत के उपाय करने के संबंध में राहत आयुक्त एवं उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों के आधार पर गर्मी से बचाव के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। इसमें ही स्कूलों के समय में परिवर्तन करने के भी निर्देश हैं। अभी स्कूलों का समय सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक है। ऐसे में छुट्टी के बाद भरी दोपहरियां स्कूलों से घर जाने में बच्चों की तबीयत बिगड़ने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।
पिछले एक सप्ताह से पड़ रही चिलचिलाती धूप एवं 40-42 डिग्री को पार करते तापमान की वजह से स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य पर हो रहे दुष्प्रभाव को देखते हुए अभिभावकों से लेकर शिक्षक संगठनों की ओर से स्कूलों के समय में बदलाव किए जाने की मांगे लगातार की जा रही थी। वहीं, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष सुधांशु मोहन और मंत्री वीरेन्द्र सिंह ने डीएम को भेजे पत्र में कहा कि गर्मी से बच्चों बेहाल हो रहे हैं। पारा 40 डिग्री के पार जा चुका है। स्कूलों को सुबह सात से दोपहर 12 बजे तक संचालित किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती के चलते स्कूलों में पंखे आदि नहीं चल पाते हैं।
सुबह 7:30 से 12:30 बजे तक चलेंगे स्कूल
चंदौली, प्रतापगढ़, संतकबीर नगर व जौनपुर जिले में कक्षा एक से आठ तक के परिषदीय स्कूलों का समय 7.30 से दोपहर 12.30 बजे तक कर दिया गया है। बुंदेलखंड के जालौन व हमीरपुर में सुबह 7.30 से दोपहर 12 बजे तक का निर्धारित किया है। औरैया में सुबह सात से 12 बजे तक किया गया है।
एक्स-रे टेक्नीशियन की भर्ती में डीजी हेल्थ से मांगा हलफनामा
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 2016 की एक्स-रे टेक्नीशियन भर्ती से जुड़े पुराने विवाद पर चार सप्ताह में एफिडेविट दाखिल करने के आदेश दिए हैं। डीजी हेल्थ को चार सप्ताह में शपथ पत्र देना होगा।
एफिडेविट में 2016 की रिट याचिका के समय लंबित अभ्यर्थियों की स्थिति और उनके चयन व नियुक्ति के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपीलकर्ताओं के
अनुसार केवल 49 चयनित अभ्यर्थियों को ही मुख्य पक्षकार माना गया था। बाकी अभ्यर्थियों को अभी अपील में शामिल नहीं किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि जो पहले से पक्षकार थे, उनके मामले पर विचार किया जा सकता है। गौरतलब है कि यह मामला अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा 2015 में 403 पदों पर निकाली गई भर्ती से जुड़ा है। 2016 में जारी चयन सूची पर कई अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई थी। हाल ही में इस भर्ती से जुड़ा एक फर्जीवाड़ा सामने आया था।
किंजल सिंह बनीं सचिव माध्यमिक शिक्षा और आशुतोष निरंजन परिवहन आयुक्त
केशव कुमार बने डॉक्टर राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय के कुलसचिव
लखनऊ। प्रदेश सरकार ने देर रात 40 आईएएस अधिकारियों का तबादला कर दिया। प्रबंध निदेशक दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम आगरा नीतीश कुमार को प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन, बुलंदशहर की डीएम श्रुति को प्रबंध निर्देशक दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम आगरा बनाया गया है।
प्रतीक्षारत आईएएस आशुतोष निरंजन को परिवहन आयुक्त, परिवहन आयुक्त किंजल सिंह को सचिव माध्यमिक शिक्षा बनाया गया है। अपर मुख्य सचिव एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास तथा एनआरआई विभाग आलोक कुमार द्वितीय को अपर मुख्य सचिव एमएसएमई और निर्यात प्रोत्साहन विभाग के प्रभार से मुक्त कर दिया गया है।
फतेहपुर के डीएम रविंदर सिंह को विशेष सचिव ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत, निदेशक यूपीनेडा, प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश रिन्यूएबल एंड ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड बनाया गया है। झांसी के जिलाधिकारी मृदुल चौधरी को विशेष सचिव पर्यटन और निदेशक पर्यटन, श्रावस्ती के डीएम अश्वनी कुमार पांडे को निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण, रायबरेली की डीएम हर्षिता माथुर को निदेशक बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा निदेशक राज्य पोषण मिशन, विशेष सचिव उच्च शिक्षा विभाग और कुल सचिव डॉ. राममनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय लखनऊ अनीता वर्मा सिंह को विशेष सचिव खाद एवं रसद विभाग और नियंत्रक विधिक बाट माप बनाया गया है।
सचिन कुमार सिंह सीडीओ अमेठी को अपर निदेशक उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद, बसंत अग्रवाल एडीएम वित्त एवं राजस्व हाथरस को निदेशक कर्मचारी राज्य बीमा निगम श्रम चिकित्सा सेवाएं, सौम्या पांडे अपर श्रमायुक्त व निदेशक कर्मचारी राज्य बीमा योजना श्रम चिकित्सा सेवाएं को निदेशक कर्मचारी राज्य बीमा योजना श्रम चिकित्सा सेवाएं उत्तर प्रदेश के प्रभार से मुक्त कर दिया गया है।
जुनैद अहमद सीडीओ झांसी को अपर श्रमायुक्त कानपुर नगर, हिमांशु गौतम मुख्य विकास अधिकारी हापुड़ को उपाध्यक्ष झांसी विकास प्राधिकरण, मुकेश चंद्र मुख्य विकास अधिकारी बहराइच को उपाध्यक्ष हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण, केशव कुमार मुख्य विकास अधिकारी बदायूं को कुलसचिव डॉक्टर राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय, श्रुति शर्मा संयुक्त मजिस्ट्रेट देवरिया को मुख्य विकास अधिकारी हापुड़, गामिनी सिंगला संयुक्त मजिस्ट्रेट सुल्तानपुर को मुख्य विकास अधिकारी बदायूं, सुनील कुमार धनवंता संयुक्त मजिस्ट्रेट आजमगढ़ को मुख्य विकास अधिकारी बहराइच, पूजा साहू संयुक्त मजिस्ट्रेट चित्रकूट को मुख्य विकास अधिकारी अमेठी, रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड संयुक्त मजिस्ट्रेट गाजीपुर को मुख्य विकास अधिकारी झांसी बनाया गया है।
आईपी विश्वविद्यालय में दाखिला के लिए सीईटी 25 अप्रैल से
नई दिल्ली। गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ (आईपी) विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दाखिले के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) 25 अप्रैल से शुरू होंगे। यह परीक्षा 23 मई तक आयोजित की जाएगी। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. एस.एल. भंडारकर के अनुसार, सीईटी हर शनिवार और रविवार को दो पालियों में आयोजित होगा। सुबह की पाली 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और शाम की पाली 2:30 बजे से 5 बजे तक होगी। परीक्षा में प्रश्नों के उत्तर ओएमआर शीट पर देने होंगे। इस वर्ष 78 कोर्सेज के लिए कुल 50,531 उम्मीदवार
परीक्षा में शामिल होंगे। 9 और 10 मई को होने वाली परीक्षाएं दिल्ली-एनसीआर के अलावा चंडीगढ़, जयपुर, लखनऊ और कोलकाता में भी आयोजित होंगी। अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वे ब सा इ ट http://www.ipu.ac.in व http://www.ipu.admissions.nic.in से एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।
परीक्षा केंद्र या तिथि में बदलाव के अनुरोध स्वीकार नहीं किए जाएंगे। सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर और ईमेल सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। ब्यूरो
गार्गी कॉलेज में जबरन घुसने वाले एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर हो सख्त कार्रवाई : सौरभ
नई दिल्ली। पुलिस की मौजूदगी में गार्गी महिला कॉलेज में गेट तोड़कर जबरन घुसने वाले एबीवीपी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई - नहीं होने पर आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभभारद्वाज ने उपराज्यपाल को पत्र । लिखा है। उन्होंने इस मामले में एलजी से मिलने के लिए समय - मांगा है। उन्होंने पुलिस को एबीवीपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ पं एफआईआर दर्ज करने और दोषियों को गिरफ्तार करने के निर्देश देने की भी मांग की है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि महिला कॉलेज में हुई ये घटना छात्राओं की सुरक्षा और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़ा कर रही है।
रविवार को दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू को लिखे पत्र में सौरभ भारद्वाज ने कहा कि वह 17 अप्रैल 2026 को गार्गी कॉलेज में हुई एक गंभीर घटना की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। डूसू अध्यक्ष आर्यन मान के नेतृत्व में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े युवाओं के एक ग्रुप ने बिना किसी कानूनी अधिकार या अनुमति के जबरन कॉलेज परिसर में प्रवेश किया। उन पर कार्रवाई हो।
एसएससी कांस्टेबल जीडी भर्ती-2026 की सिटी स्लिप जारी, प्रवेश पत्र जल्द
प्रयाग राज कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ), स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (एसएसएफ), असम राइफल्स में राइफलमैन (जीडी) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में सिपाही पदों के लिए आयोजित होने वाली कांस्टेबल (जीडी) परीक्षा-2026 के लिए परीक्षा शहर की जानकारी जारी कर दी गई है।
एसएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर लागिन कर परीक्षा केंद्र शहर की जानकारी देखी जा सकेगी। प्रवेश पत्र परीक्षा तिथि से लगभग दो से तीन दिन पहले डाउनलोड के लिए उपलब्ध करा दिए जाएंगे। एसएससी की कांस्टेबल (जीडी) भर्ती परीक्षा 27 अप्रैल से 30 मई 2026 तक चलेगी। कुल 25,487 रिक्तियों के लिए, 48 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया है। परीक्षा चार चरणों (विंडो) में आयोजित की जाएगी। पहला सप्ताह 27 अप्रैल से दो मई), दूसरा सप्ताह चार से नौ मई), तीसरा 18 से 23 मई और चौथा 25 से 30 मई तक चलेगा। आयोग ने उम्मीदवारों को यह भी निर्देश दिया है कि वे परीक्षा से संबंधित सभी दिशानिर्देशों का पालन करें और समय से पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचना सुनिश्चित करें।
दो हजार से अधिक बढ़े दिव्यांग पेंशनर
प्रयागराज। जिले में दिव्यांगजन पेंशन योजना के लाभार्थियों की संख्या में इस वित्तीय वर्ष में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में कुल 34,248 दिव्यांगों को पेंशन का लाभमिल रहा है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह संख्या 32,480 थी। महज एक वर्ष में दो हजार से अधिक नए दिव्यांग लाभार्थी योजना से जुड़े हैं। जिला दिव्यांगजन अधिकारी ने कहा कि सरकार की ओर से वर्तमान में पात्र दिव्यांगों को 1000 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है। कहा सरकार की ओर से इस राशि को बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह करने का प्रस्ताव पारित हो गया है, जिसके जल्द लागू होने की संभावना है। जिससे दिव्यांग लाभार्थियों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि पेंशन योजना का लाभअधिक से अधिक पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने के लिए लगातार सत्यापन और नए आवेदन स्वीकृत किए जा रहे हैं।
माडल स्कूलों में कक्षा नौ में नामांकन को आवेदन 30 तक
नए सत्र के लिए
सिवान : जिले के सभी 19 प्रखंडों में चयनित माडल स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश माध्यमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी कर दिया गया है। जारी निर्देश में जिला शिक्षा पदाधिकारी को नामांकन प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी कराने को कहा गया है। निर्देश के अनुसार माडल विद्यालयों में नामांकन कक्षा नौवीं से शुरू होगा। इसके साथ हीं कक्षा 10वीं, 11वीं व 12वीं में पूर्ववत नामांकन की व्यवस्था जारी रहेगी। कक्षा नौवीं में प्रत्येक विद्यालय में 40 विद्यार्थियों का नामांकन किया जाएगा। इसे अधिकतम सीमा यानी इंटेक क्षमता माना गया है। नामांकन के लिए राष्ट्रीय मेधा सह छात्रवृत्ति परीक्षा में शामिल और न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले छात्रों से आवेदन लिया जाएगा। आवेदन की अंतिम तिथि आगामी 30 अप्रैल निर्धारित किया गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि प्राप्त आवेदनों के आधार पर
मेरिट सूची तैयार की जाएगी और इसके अनुसार 40 छात्रों का चयन किया जाएगा। यदि किसी प्रखंड में सीट खाली रह जाती है तो अन्य इच्छुक छात्रों से आवेदन लेकर रिक्त सीटों को भरा जाएगा। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि निजी विद्यालयों के छात्रों का सामान्य रूप से नामांकन माडल स्कूलों में नहीं किया जाएगा। नामांकन के लिए स्थानांतरण प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, निवास और जाति प्रमाण पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होगा। नामांकन के लिए निर्धारित शुल्क लिया जाएगा, इसमें किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। माडल विद्यालय में नामांकन की पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक की होगी। जो आवेदन प्राप्त करने से लेकर दस्तावेजों के सत्यापन और पारदर्शी तरीके से नामांकन सुनिश्चित करेंगे। नामांकन से जुड़ी सभी सूचनाएं संबंधित विद्यालय के सूचना पट्ट और शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध करानी होगी।
बीपीएससी ने किया एईडीओ परीक्षा में कदाचार से इनकार
पटना। बिहार लोक सेवा आयोग ने सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (एईडीओ) परीक्षा की कदाचार की अफवाहों को पूरी तरह निराधार बताया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी, शांतिपूर्ण और कदाचारमुक्त तरीके से संचालित की जा रही है तथा पेपर लीक जैसी खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। हालांकि, आयोग ने स्वीकार किया कि कुछ स्थानों पर ब्लूटूथ से कदाचार की कोशिश की गई थी, जिसे प्रशासन की सतर्कता से समय रहते विफल कर दिया गया। संबंधित मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की गई है।
आयोग ने कहा, कुछ स्थानों पर ब्लूटूथ से कदाचार की कोशिश हुई थी
आयोग के मुताबिक हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कुछ समूहों द्वारा यह अफवाह फैलाई जा रही थी कि दूसरे चरण की परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक व कदाचार हुआ है। आयोग ने स्पष्ट किया कि राज्य के किसी भी परीक्षा केंद्र से पेपर लीक की कोई आधिकारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है और न ही कोई प्राथमिकी दर्ज की गई है। आयोग के अनुसार, अब तीसरे चरण की परीक्षा 20 और 21 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी।
आयकर से राहत पाने वालों के लिए भी आईटीआर भरना फायदेमंद
ध्यान दें
नई दिल्ली। एक अप्रैल 2026 से नया वित्त वर्ष शुरू हो चुका है और करदाता आयकर रिटर्न दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं।
ऐसे बहुत से लोग हैं, जिनकी सालाना कमाई टैक्स स्लैब से कम है या कटौती के बाद उनकी कर देनदारी शून्य हो जाती है। ऐसे में उन्हें लगता है कि उन्हें आईटीआर भरने की जरूरत नहीं है। लेकिन कर विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे मामलों में 'शून्य आईटीआर' दाखिल हो सकती है, जिसके कई फायदे हैं।
सभी के लिए जरूरी: आयकर नियमों के मुताबिक, उन सभी लोगों को आईटीआर जमा करना जरूरी है, जिनकी सकल आय मूल कर छूट की सीमा से अधिक है। कई लोगों को गहमी रहती है कि नदि उनकी सालाना आय कर छूट सीमा से कम है तो आईटीआर भरना जरूरी नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस सीमा से कम आय होने पर टैक्स इसलिए नहीं देना पड़ता क्योंकि धारा 87ए के तहत पुरानी कर व्यवस्था में 12,500 रुपये और नई कर व्यवस्था में 60 हजार रुपये तक की छूट (रिवेट) मिलती है। लेकिन पुरानी कर व्यवस्था में कर छूट की वास्तविक सीमा अब सिर्फ 2.5 लाख रुपये है। है। वहीं, नई कर व्यवस्था में यह सीमा चार लाख रुपये है। यदि इससे एक रुपये भी अधिक आय है तो करदाता के लिए आईटीआर दाखिल करना जरूरी है, भले ही उनका टैक्स शून्य हो। इसे जौरो आईटीआर' भी कहते हैं।
3 खाते में बड़ी रकम जमा की हो यदि व्यक्ति ने अपने बचत खाते में 50 लाख या उससे ज्यादा की नकद राशि जमा की है, तो आईटीआर भरना जरूरी है। कई चार संपत्ति बेचने या निवेश की रकम प्राप्त होने पर इतनी बड़ी रकम खाते में प्राप्त होती है। बैंक इसकी जानकारी आयकर विभाग को देता है।
इन मामलों में जरूर भरें आईटीआर
1 मारी-भरकम बिजली बिल का भुगतान करने पर नियमों के अनुसार, अगर करदाता ने एक वित्त वर्ष के दौरान कुल मिलाकर एक लाख रुपये या उससे अधिक का बिजली बिल चुकाया है, तो आपके लिए आईटीआर दाखिल करना अनिवार्य है। भले ही उसकी कुल सालाना टैक्स स्लैब से कम हो।
इसके लिए भी जरूरी 4
अगर किसी व्यक्ति का टीडीएस या टीसीएस 25,000 रुपये या उससे अधिक कटा है (बुजुगों के लिए 250,000) तो रिफंड लेने के लिए आईटीआर दाखिल करना होता है। इसके अलावा अगर कुल व्यावसायिक बिक्री 60 लाख रुपये से अधिक है, तब भी रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है।
आईटीआर फॉर्म
2 विदेश यात्रा पर बड़ा खर्च होने पर अगर करदाता ने विदेश यात्रा पर दो लाख या उससे ज्यादा खर्च
किए है तो आईटीआर भरना होगा। इस मामले में नियम बहुत स्पष्ट है। इसके अनुसार। अनुसार, विदेश यात्रा पर दो लाख से अधिक का खर्च उच्च श्रेणी के लेनदेन में शामिल होता है। इसके बारे में विभाग को सूचित करना जरूरी होता है।
नई कर व्यवस्था का स्लैब
0 से 4 लाख शून्य
4 लाख से 8 लाख 5%
8 लाख से ₹12 लाख 10%
12 लाख से 16 लाख 15%
16 लाख से ₹20 लाख 20%
₹20 लाख से 24 लाख 25%
₹24 लाख से अधिक 30%
पुरानी कर व्यवस्था का स्लैब
0 से ₹2.5 लाख शून्य
2.5 लाख से 5 लाख 5%
5 लाख से ₹१० लाख 20%
₹10 लाख से अधिक 30%
यह सुविधा
1. तीन लेना आसान होम लोन या व्यक्तिगत कर्ज देने से पहले बैंक या वित्तीय संस्थान पिछलने तीन वर्षों का आयकर रिटर्न मांगते हैं। इससे कर्ज मिलने की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
2. विदेश जाने में मददगार विदेश यात्रा के लिए वीजा आवेदन करते समय संबंधित देश के दूतावास वित्तीय स्थिति जांच करते हैं। इसके लिए भी आईटीआर मांगते है। इससे
वीजा मिलना आसान हो जाता है। 3. शेयर में निवेश पर बचा सकते हैं टैक्स: शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में अगर घाटा हुआ है, तो उस हानि को अगले कुछ सालों के लिए समायोजित (कैरी फॉरवर्ड करने की सुविधा तभी मिलती है, जब आप समय पर आईटीआर भरते हैं।
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