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यूपी-टीईटी में दूरस्थ शिक्षा से डीएलएड वालों को भी अवसर

यूपी-टीईटी में दूरस्थ शिक्षा से डीएलएड वालों को भी अवसर

प्रयागराज। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) से ओपन डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल) यानी दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से 18 माह का डीएलएड प्रशिक्षण पाने वालों को भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी)-2026 में मौका मिलेगा। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के आदेश पर इन अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर दिया है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि ऐसे अभ्यर्थी जो 10 अगस्त 2017 या उससे पूर्व नियुक्त थे तथा 18 माह का डीएलएड-ओडीएल डिप्लोमा किया है, उन्हें यूपी-टीईटी 2026 में अनंतिम रूप से सम्मिलित होने दिया जाए। हालांकि अंतिम चयन, अभ्यर्थन लंबित याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।

शिक्षक भर्ती न होने पर राज्यों की रुकेगी वित्तीय मदद

नई दिल्लीः स्कूलों में शिक्षकों के पदों को लंबे समय तक नहीं भरना अब राज्यों को मंहगा पड़ सकता है।

संसदीय समिति की सिफारिश पर गंभीर शिक्षा मंत्रालय अब ऐसे सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को समग्र शिक्षा के तहत दी जाने वाली वित्तीय मदद में कटौती कर सकता है या फिर रोक सकता है। फिलहाल देश में शिक्षकों के करीब 10 लाख पद खाली हैं। इनमें करीब साढ़े सात लाख पद अकेले प्राथमिक स्तर के शिक्षकों के हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की अगुआई वाली शिक्षा मंत्रालय की संसदीय समिति ने अपनी 349वीं और 363वीं रिपोर्ट में शिक्षकों के इन खाली पदों को समयबद्ध तरीके से भरने की बार-बार सिफारिश की है। साथ ही शिक्षा मंत्रालय भी कई बार राज्यों से इन खाली पदों को भरने के लिए कह चुका है। बावजूद इसके राज्यों का रवैया जस का तस बना हुआ है। वह केंद्र से हर साल समग्र शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों को सशक्त बनाने के लिए वित्तीय मदद ले रहे हैं, लेकिन शिक्षकों के पद खाली बने हुए हैं।

समिति का मानना है कि स्कूलों में शिक्षकों के पदों का खाली होना और भरना वैसे तो एक सतत प्रक्रिया है, लेकिन अधिकांश राज्यों में पिछले कई वर्षों से बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली बने हुए हैं। समिति ने राज्यों के इस रवैये को गंभीर बताया और मंत्रालय से सिफारिश की है कि जब तक राज्य शिक्षकों के खाली पदों को नहीं भरते हैं, तब तक उन्हें समग्र शिक्षा का पैसा नहीं दिया जाए। वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय को समग्र शिक्षा के तहत 41,249 करोड़ रुपये आवंटित किया था। यह राज्यों को स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए दिया जाता है। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, संसदीय समिति की सिफारिश पर समग्र शिक्षा के तहत दी जाने वाली वित्तीय मदद की समीक्षा की जा रही है। इस दौरान तय मानकों के अनुरूप काम न करने वाले और शिक्षकों के खाली पदों को न भरने वाली राज्यों की वित्तीय मदद रोकने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

दरोगा-होमगार्ड भर्ती परीक्षा में ठगी करने वाले दो गिरफ्तार

लखनऊ। एसटीएफ ने दरोगा और होमगार्ड भर्ती परीक्षा के दौरान टेलीग्राम के माध्यम से ठगी के मामलों में दो आरोपियों अमन कुमार और निखिल ठाकुर को मुजफ्फरपुर, बिहार से गिरफ्तार किया है। दोनों मुजफ्फरपुर के निवासी हैं।

एसटीएफ के अनुसार यूपी पुलिस में उपनिरीक्षक के पदों पर भर्ती के लिए 14 व 15 मार्च को हुई लिखित परीक्षा के दौरान एक गिरोह ने टेलीग्राम चैनल के माध्यम से ठगी पेपर लीक होने का दावा कर ठगी का प्रयास किया था। एसटीएफ के उपनिरीक्षक नरेन्द्र सिंह व उनकी टीम ने शुक्रवार को मामले में वांछित आरोपी अमर को बिहार से गिरफ्तार किया। पूछताछ में अमन ने बताया कि उसने अपने साथी सूर्यांश के साथ मिलकर योजनाबद्ध तरीके से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से पहले टेलीग्राम चैनल पर पेपर उपलब्ध कराने का झांसा देकर ठगी करते थे। टेलीग्राम पर यूपीएसआई एक्जाम पेपर के माध्यम भी ऐसा ही प्रयास किया गया था। ठगी की रकम वसूलने के लिए अमन के बैंक खाते का इस्तेमाल होता था। मामले में लखनऊ की हुसैनगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था।

टीईटी में एनआईओएस से डीएलएड वालों को भी मौका

प्रयागराज। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) से ओपन डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल) के माध्यम से 18 माह का डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को भी यूपी-टीईटी-26 में अवसर दिया गया है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के आदेश पर इन अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर दिया है।

हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि ऐसे अभ्यर्थी जो 10 अगस्त 2017 या उससे पूर्व नियुक्त थे तथा 18 माह का डीएलएड-ओडीएल डिप्लोमा किया है, उन्हें यूपी-टीईटी में अनंतिम रूप से सम्मिलित होने दिया जाए। हालांकि अंतिम चयन एवं अभ्यर्थन न्यायालय में लंबित याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। आयोग ने अभ्यर्थियों को सूचित किया कि वे वेबसाइट https://upessc.up.gov. इन पर जाकर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तीन मई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उपसचिव डॉ. संजय सिंह ने स्पष्ट किया है कि ऐसे सभी अभ्यर्थियों का आवेदन पूरी तरह से औपबंधिक होगा तथा उच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

आवेदन की आज अंतिम तिथि, 15 लाख भर चुके फार्म

यूपी-टीईटी के लिए आवेदन की अंतिम तिथि रविवार है। अब तक लगभग 15 लाख अभ्यर्थी इसके लिए आवेदन कर चुके हैं। एनआईओएस से डीएलएड अभ्यर्थियों को अवसर मिलने के बाद आवेदकों की संख्या में वृद्धि तय है।

नीट यूजी आज, 565 शहरों में 22.79 लाख देंगे परीक्षा

विदेश में बनाए गए 14 केंद्र, पेन-पेपर आधारित यह परीक्षा होगी

नई दिल्ली। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने शनिवार को देश की सबसे बड़ी दाखिला प्रवेश परीक्षा यानी स्नातक मेडिकल में दाखिले की नीट यूजी 2026 की तैयारियों को मॉकड्रिल से परखा। तीनस्तरीय सुरक्षा घेरे के बीच पेन-पेपर आधारित यह परीक्षा होगी। इसमें 22.79 लाख छात्र शामिल होंगे।

केंद्र एवं राज्य सरकारों के अलावा गृह मंत्रालय, पुलिस, बीएसएफ, अर्द्धसैनिक बल मिलकर काम कर रहे। परीक्षा के लिए देश के 551 शहरों में 5432 केंद्र और विदेश में 14 केंद्र बनाए गए हैं। 99.2% छात्रों को पसंदीदा केंद्र आवंटित हुए हैं। खास बात है कि शुचिता बनाए रखने के लिए 68 केंद्रों को छोड़ बाकी 98.8% केंद्र सरकारी शिक्षण संस्थानों में हैं।

एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने बताया कि नीट यूजी की सुचिता बनाए रखने के लिए तैयारियां पूरी हैं। विद्यार्थियों से अनुरोध है कि वे सुबह 11 से दोपहर डेढ़ बजे तक परीक्षा केंद्र पहुंच जाए। उसके बाद केंद्र में जाने की अनुमति नहीं मिलेगी।

प्रश्न पत्र लीक नहीं हो, उसके लिए पीजी मेडिकल छात्रों, पुराने छात्रों पर नजर रखी जा रही है।

प्रश्न पत्र लीक या अफवाहों से छात्रों को भ्रमित करने वाले 30 टेलीग्राम चैनल बंद किए गए हैं।

चुनावी राज्यों में खास तैयारी चुनावी राज्यों में रविवार को परीक्षा और सोमवार को चुनावी रिजल्ट आएगा। ऐसे में पश्चिम बंगाल पर एनटीए और केंद्रीय गृह मंत्रालय की खास नजर है। वहीं, हरियाणा, असम, तमिलनाडु, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के साथ एनटीए की कई दौर की बैठक हुई है।

पहली बार घर से पीने का पानी लाने की अनुमति

राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ हुई बैठक में केंद्र में उम्मीदवारों के लिए सुरक्षित और आरामदायक वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की गई है। इसमें पीने के पानी की उपलब्धता, बिजली आपूर्ति (जनरेटर आदि की व्यवस्था), आपातकालीन स्वास्थ्य सहायता सेवाएं आदि शामिल हैं। पहली बार छात्रों को पीने का पानी घर से लाने की अनुमति दी गई है। परीक्षा केंद्र में डबल-लॉक स्ट्रॉन्ग रूम में 24 घंटे 1.85 लाख कैमरों के साथ चारस्तरीय सीसीटीवी निगरानी हो रही।

शिक्षक भर्ती की मुख्य परीक्षा में ज्ञान के साथ गति का भी टेस्ट

एलटी ग्रेड मेंस में लिखना है तीन सेकेंड में एक शब्द

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में एलटी ग्रेड (सहायक अध्यापक, प्रशिक्षित स्नातक) भर्ती 2025 के लिए हो रही मुख्य परीक्षा का स्तर सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा (पीसीएस) के बराबर कर दिया गया है। शिक्षक भर्ती के लिए पहली बार कराई जा रही मुख्य Be परीक्षा में अभ्यर्थियों को तीन घंटे में 3250 शब्द का उत्तर लिखना है। यानि अभ्यर्थियों को प्रति तीन सेकेंड में एक शब्द लिखना है। साफ है कि इस परीक्षा में अभ्यर्थियों को अपने ज्ञान के साथ गति का भी टेस्ट देना है। अभ्यर्थियों को परीक्षा में दस लघु उत्तरीय प्रश्नों का उत्तर 125-125 शब्दों में और दस दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर 200-200 शब्दों में देने हैं। इसी प्रकार से पीसीएस में भी तीन घंटे की परीक्षा में 3250 शब्दों में जवाब लिखना होता है। हालांकि पीसीएस में छह पेपर होता है इसलिए शिक्षक भर्ती से तुलना नहीं हो सकती।

एक बोर्ड-एक ही कोर्स, भर्ती प्रक्रिया अलग प्रदेश के राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय भले ही यूपी बोर्ड से संचालित हों और एक समान पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता हो लेकिन दोनों विद्यालयों में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया अलग है। 2635 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में एलटी ग्रेड और प्रवक्ता की भर्ती उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से होती है। जबकि 4517 एडेड माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) और प्रवक्ता (पीजीटी) की भर्ती उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से होती है। राजकीय में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के आधार पर शिक्षक भर्ती हो रही है जबकि एडेड कॉलेज में टीजीटी भर्ती केवल लिखित परीक्षा से और पीजीटी भर्ती लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर होती है।

यू-डायस पर 52% बच्चों की सूचनाएं अपलोड नहीं

प्रयागराज। जिलेभर के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा एक से आठवीं तक के 52 प्रतिशत बच्चों की सूचनाएं यू-डायस पोर्टल पर अपलोड नहीं की गई है। कुल 1204549 बच्चों में से 627841 (52.12 प्रतिशत) की सूचनाएं नहीं दी जा सकी है। हालांकि परिषदीय स्कूलों में 20 प्रतिशत से भी कम मामले बचे हैं। परिषदीय स्कूलों के 3,47,479 बच्चों में से केवल 65,801 (18.94 फीसदी) की सूचनाएं नहीं ऑनलाइन नहीं दी जा सकी है।

बीएसए अनिल कुमार ने सभी बीईओ को निर्देशित किया है कि पांच मई तक शत-प्रतिशत बच्चों की सूचनाएं अपलोड कराना सुनिश्चित करें अन्यथा उनकी जिम्मेदारी तय करते हुए विभागीय कार्रवाई के लिए संस्तुति कर दी जाएगी। सभी सरकारी, सहायता प्राप्त एवं मान्यता प्राप्त स्कूलों से प्रवेश एवं उपस्थिति पंजिका के आधार पर ही सूचनाएं अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि किसी भी प्रकार त्रुटि नरह जाए। बीएसए ने सूची का सत्यापन अवश्य कराने को कहा है।

एलयू में बायोमीट्रिक से 250 कर्मी गायब

लखनऊ। एलयू में बायोमीट्रिक शुरू होने से 250 कर्मचारी गायब हो गए हैं। जिससे आउटसोर्स कर्मचारियों के हिसाब-किताब में बड़ा खेल उजागर हुआ है। जिसकी जांच की मांग भी उठाई गई है। यह आरोप उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के साथ हुई बैठक में राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष डॉ. संजय शुक्ला ने उठाया। जिसके बाद उन्हें विवि प्रशासन की ओर से कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है।

कर्मचारी नेता डॉ. संजय शुक्ला ने मंत्री के संग बैठक में आरोप लगाए कि पूर्व कुलपति के समय एलयू में साढ़े सात सौ आउसोर्सिंग कर्मचारी थे। नए कुलपति ने बायोमीट्रिक शुरू की तो 500 कर्मचारी हो गए, 250 गायब हो गए। कर्मचारी नेता ने आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग के नाम पर महीना 40 लाख और सालाना पांच करोड़ का बंदरबांट होता था।

अधिकारियों के घर में काम करते हैं कर्मचारी

कर्मचारी नेता ने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के संबंध में कुलसचिव पर दोहरा रवैया का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि एक तरफ आदेश है कि सेवानिवृत कर्मचारियों से आउटसोर्सिंग में काम नहीं लिया जाएगा। दूसरी तरफ कार्यालय में ही आउटसोर्सिंग कर्मचारी सेवानिवृत्त हैं। अधिकारियों के घर में आउटसोर्सिंग कर्मियों के काम करने के संबंध में भी आदेश का पालन नहीं हो रहा है।

174 अभ्यर्थियों को पीईटी में बैठने की मिली अनुमति

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं के लिए अनिवार्य प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी) की वैधता को लेकर दाखिल याचिका में 174 अभ्यर्थियों को बड़ी अंतरिम राहत दी है। न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव एवं न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने सत्येंद्र यादव व 173 अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार व चयन आयोग को निर्देश दिया कि याचियों को तीन मई को होने वाली परीक्षा में शामिल होने दिया जाए। साथ ही यह भी कहा है कि इन अभ्यर्थियों का परिणाम न्यायालय की अनुमति के बिना घोषित नहीं किया जाएगा।

मामले के तथ्यों के अनुसार याचियों ने वर्ष 2021 व 2022 में पीईटी पास किया था। 20 नवंबर 2020 के तत्कालीन शासनादेश के अनुसार तब पीईटी की वैधता एक वर्ष थी। वर्ष 2021 से 2023 तक कोई भर्ती नहीं हुई। सात मार्च 2024 को भर्ती विज्ञापन जारी हुआ तो तब तक एक वर्ष की वैधता समाप्त हो चुकी थी। मामले में अगली सुनवाई 15 मई को होगी।

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