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1. भवभूति की रचनाओं में सम्मिलित नहीं है:
सही उत्तर: A. शाकुन्तल
व्याख्या: शाकुंतल (अभिज्ञानशाकुन्तलम) संस्कृत के महान कवि कालिदास की प्रसिद्ध नाट्य-कृति है, जबकि विकल्पों में दी गई अन्य तीनों नाट्य-कृतियाँ संस्कृत साहित्य के प्रसिद्ध नाटककार भवभूति द्वारा रचित हैं।
व्याख्या: शाकुंतल (अभिज्ञानशाकुन्तलम) संस्कृत के महान कवि कालिदास की प्रसिद्ध नाट्य-कृति है, जबकि विकल्पों में दी गई अन्य तीनों नाट्य-कृतियाँ संस्कृत साहित्य के प्रसिद्ध नाटककार भवभूति द्वारा रचित हैं।
2. महावीर प्रसाद द्विवेदी ने 'सरस्वती' पत्रिका का सम्पादन किस अवधि (वर्ष) में किया ?
सही उत्तर: B. 1903-1920
व्याख्या: आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने सन् 1903 में 'सरस्वती' के संपादन का कार्यभार संभाला और सन् 1920 तक इसका संपादन किया। 'सरस्वती' का प्रकाशन जनवरी 1900 ई. में चिंतामणि घोष के प्रयासों से इंडियन प्रेस, इलाहाबाद से आरंभ हुआ था।
व्याख्या: आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने सन् 1903 में 'सरस्वती' के संपादन का कार्यभार संभाला और सन् 1920 तक इसका संपादन किया। 'सरस्वती' का प्रकाशन जनवरी 1900 ई. में चिंतामणि घोष के प्रयासों से इंडियन प्रेस, इलाहाबाद से आरंभ हुआ था।
3. 'सूर्योदय' का सन्धि विच्छेद है:
सही उत्तर: D. सूर्य + उदय
व्याख्या: 'सूर्योदय' शब्द 'सूर्य' और 'उदय' के मेल से बना है। यहाँ 'सूर्य' के अंत में अकार (अ) तथा 'उदय' के आरंभ में उकार (उ) है। अ + उ = ओ होने के कारण यहाँ गुण स्वर संधि है।
व्याख्या: 'सूर्योदय' शब्द 'सूर्य' और 'उदय' के मेल से बना है। यहाँ 'सूर्य' के अंत में अकार (अ) तथा 'उदय' के आरंभ में उकार (उ) है। अ + उ = ओ होने के कारण यहाँ गुण स्वर संधि है।
4. सामान्यतः हिन्दी का प्रथम मौलिक नाटक किसे माना जाता है ?
सही उत्तर: C. नहुष
व्याख्या: 'नहुष' (1859 ई. के आसपास) को सामान्यतः हिन्दी का प्रथम मौलिक नाटक माना जाता है। इसके रचयिता गोपालचन्द्र 'गिरिधरदास' थे, जो भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के पिता थे। 'जानकी मंगल' को प्रथम अभिनीत नाटक तथा 'रणधीर प्रेममोहिनी' को प्रथम दुखांत नाटक माना जाता है।
व्याख्या: 'नहुष' (1859 ई. के आसपास) को सामान्यतः हिन्दी का प्रथम मौलिक नाटक माना जाता है। इसके रचयिता गोपालचन्द्र 'गिरिधरदास' थे, जो भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के पिता थे। 'जानकी मंगल' को प्रथम अभिनीत नाटक तथा 'रणधीर प्रेममोहिनी' को प्रथम दुखांत नाटक माना जाता है।
5. 'अंधेर नगरी' के रचयिता कौन हैं ?
सही उत्तर: C. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
व्याख्या: 'अंधेर नगरी' नाटक के रचयिता भारतेंदु हरिश्चंद्र हैं। यह एक प्रहसन है जो 1881 में हिंदू नेशनल थियेटर के लिए लिखा गया था, इसमें कुल छह दृश्य हैं तथा यह तत्कालीन भ्रष्ट राज व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य करता है।
व्याख्या: 'अंधेर नगरी' नाटक के रचयिता भारतेंदु हरिश्चंद्र हैं। यह एक प्रहसन है जो 1881 में हिंदू नेशनल थियेटर के लिए लिखा गया था, इसमें कुल छह दृश्य हैं तथा यह तत्कालीन भ्रष्ट राज व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य करता है।
6. निम्नलिखित में से कौन-सी रचना तुलसीदास की नहीं है ?
सही उत्तर: B. सूरसारावली
व्याख्या: 'सूरसारावली' महाकवि सूरदास की रचना है। कवितावली, विनयपत्रिका और गीतावली गोस्वामी तुलसीदास द्वारा ब्रजभाषा में रचित प्रामाणिक कृतियाँ हैं।
व्याख्या: 'सूरसारावली' महाकवि सूरदास की रचना है। कवितावली, विनयपत्रिका और गीतावली गोस्वामी तुलसीदास द्वारा ब्रजभाषा में रचित प्रामाणिक कृतियाँ हैं।
7. परम्परागत मान्यता के अनुसार 'रामचरितमानस' की रचना का आरम्भ किस विक्रम संवत् में माना जाता है ?
सही उत्तर: C. 1631 वि.
व्याख्या: 'रामचरितमानस' की रचना का आरम्भ विक्रम संवत् 1631 में चैत्र शुक्ल रामनवमी को हुआ था। बालकाण्ड में तुलसीदास ने लिखा है: "संवत सोलह सै इकतीसा। तौ बरषा करि हरषि हरीसा।।"
व्याख्या: 'रामचरितमानस' की रचना का आरम्भ विक्रम संवत् 1631 में चैत्र शुक्ल रामनवमी को हुआ था। बालकाण्ड में तुलसीदास ने लिखा है: "संवत सोलह सै इकतीसा। तौ बरषा करि हरषि हरीसा।।"
8. देवनागरी लिपि की विशेषता नहीं है:
सही उत्तर: B. यह दायें से बायें लिखी जाती है
व्याख्या: देवनागरी लिपि हमेशा बाएँ से दाएँ लिखी जाती है, न कि दाएँ से बाएँ। खरोष्ठी लिपि दाएँ से बाएँ लिखी जाती थी।
व्याख्या: देवनागरी लिपि हमेशा बाएँ से दाएँ लिखी जाती है, न कि दाएँ से बाएँ। खरोष्ठी लिपि दाएँ से बाएँ लिखी जाती थी।
9. मानक रूप से स्वीकृत 'बिहारी सतसई' में कुल कितने दोहे संकलित माने जाते हैं ?
सही उत्तर: C. 713
व्याख्या: जगन्नाथदास 'रत्नाकर' द्वारा विभिन्न प्राचीन प्रतियों एवं टीकाओं के आधार पर संपादित 'बिहारी रत्नाकर' में 713 दोहे स्वीकार किए गए हैं।
व्याख्या: जगन्नाथदास 'रत्नाकर' द्वारा विभिन्न प्राचीन प्रतियों एवं टीकाओं के आधार पर संपादित 'बिहारी रत्नाकर' में 713 दोहे स्वीकार किए गए हैं।
10. रस के प्रमुख अवयव कितने माने जाते हैं ?
सही उत्तर: D. चार
व्याख्या: भारतीय काव्यशास्त्र में रस के चार प्रमुख अवयव (अंग) माने गए हैं: (1) स्थायी भाव, (2) विभाव, (3) अनुभाव, और (4) संचारी भाव।
व्याख्या: भारतीय काव्यशास्त्र में रस के चार प्रमुख अवयव (अंग) माने गए हैं: (1) स्थायी भाव, (2) विभाव, (3) अनुभाव, और (4) संचारी भाव।
11. 'च, छ, ज, झ, ञ' किस उच्चारण-स्थान के व्यंजन हैं?
सही उत्तर: D. तालव्य
व्याख्या: हिंदी वर्णमाला के च-वर्ग (च, छ, ज, झ, ञ) का उच्चारण करते समय जिह्वा का मध्य भाग तालु से स्पर्श करता है। इसलिए इन्हें तालव्य व्यंजन कहा जाता है।
व्याख्या: हिंदी वर्णमाला के च-वर्ग (च, छ, ज, झ, ञ) का उच्चारण करते समय जिह्वा का मध्य भाग तालु से स्पर्श करता है। इसलिए इन्हें तालव्य व्यंजन कहा जाता है।
12. वीर रस एवं रौद्र रस में किस गुण की प्रधानता होती है?
सही उत्तर: D. ओज
व्याख्या: वीर रस और रौद्र रस में चित्त को उद्दीप्त एवं ऊर्जस्वित करने वाले 'ओज गुण' की प्रधानता होती है। भाषा में तेज, वीरता और आवेग इसका मुख्य लक्षण है।
व्याख्या: वीर रस और रौद्र रस में चित्त को उद्दीप्त एवं ऊर्जस्वित करने वाले 'ओज गुण' की प्रधानता होती है। भाषा में तेज, वीरता और आवेग इसका मुख्य लक्षण है।
13. निम्नलिखित में से कौन निर्गुण भक्तिधारा के संत कवि नहीं हैं ?
सही उत्तर: A. सूरदास
व्याख्या: सूरदास निर्गुण भक्तिधारा के कवि न होकर सगुण कृष्ण भक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि हैं। वे वल्लभाचार्य के पुष्टिमार्ग से संबद्ध तथा अष्टछाप के प्रमुख कवियों में माने जाते हैं।
व्याख्या: सूरदास निर्गुण भक्तिधारा के कवि न होकर सगुण कृष्ण भक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि हैं। वे वल्लभाचार्य के पुष्टिमार्ग से संबद्ध तथा अष्टछाप के प्रमुख कवियों में माने जाते हैं।
14. रामचंद्र शुक्ल के निबंध 'श्रद्धा-भक्ति' के अनुसार 'श्रद्धा' का सम्बन्ध किससे है ?
सही उत्तर: C. सद्गुणों के प्रति आदर भाव से
व्याख्या: आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने निबंध 'श्रद्धा और भक्ति' में समझाया है कि श्रद्धा किसी व्यक्ति में विद्यमान विशेष गुण, शक्ति या श्रेष्ठता (सद्गुणों) के प्रति उत्पन्न होने वाली स्थायी आनंदपूर्ण स्वीकृति है।
व्याख्या: आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने निबंध 'श्रद्धा और भक्ति' में समझाया है कि श्रद्धा किसी व्यक्ति में विद्यमान विशेष गुण, शक्ति या श्रेष्ठता (सद्गुणों) के प्रति उत्पन्न होने वाली स्थायी आनंदपूर्ण स्वीकृति है।
15. हिन्दी का प्रथम मौलिक उपन्यास किसे माना जाता है ?
सही उत्तर: C. परीक्षागुरु
व्याख्या: 'परीक्षागुरु' को हिन्दी का प्रथम मौलिक उपन्यास माना जाता है, जिसके रचयिता लाला श्रीनिवासदास हैं और इसका प्रकाशन 25 नवम्बर, 1882 ई. को हुआ था।
व्याख्या: 'परीक्षागुरु' को हिन्दी का प्रथम मौलिक उपन्यास माना जाता है, जिसके रचयिता लाला श्रीनिवासदास हैं और इसका प्रकाशन 25 नवम्बर, 1882 ई. को हुआ था।
16. 'का वर्षा जब कृषि सुखानी' लोकोक्ति का अर्थ निम्नलिखित में से कौन-सा है ?
सही उत्तर: C. समय बीत जाने पर सहायता का कोई लाभ नहीं
व्याख्या: 'का वर्षा जब कृषि सुखानी' का भावार्थ है कि उचित समय पर किया गया कार्य ही उपयोगी होता है; अवसर बीत जाने के बाद की गई सहायता या किया गया प्रयास निष्फल हो जाता है।
व्याख्या: 'का वर्षा जब कृषि सुखानी' का भावार्थ है कि उचित समय पर किया गया कार्य ही उपयोगी होता है; अवसर बीत जाने के बाद की गई सहायता या किया गया प्रयास निष्फल हो जाता है।
17. 'चक्रपाणि' में कौन-सा समास है?
सही उत्तर: A. बहुव्रीहि
व्याख्या: 'चक्रपाणि' शब्द का विग्रह 'चक्र है पाणि (हाथ) में जिसके' अर्थात् भगवान विष्णु है। जिस समस्त पद में दोनों पदों में से कोई भी पद प्रधान न होकर किसी तीसरे अर्थ का बोध हो, वहाँ बहुव्रीहि समास होता है।
व्याख्या: 'चक्रपाणि' शब्द का विग्रह 'चक्र है पाणि (हाथ) में जिसके' अर्थात् भगवान विष्णु है। जिस समस्त पद में दोनों पदों में से कोई भी पद प्रधान न होकर किसी तीसरे अर्थ का बोध हो, वहाँ बहुव्रीहि समास होता है।
18. 'कुरुक्षेत्र' काव्य के रचयिता हैं:
सही उत्तर: D. रामधारी सिंह दिनकर
व्याख्या: 'कुरुक्षेत्र' (प्रकाशन 1946 ई.) आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि रामधारी सिंह 'दिनकर' का प्रसिद्ध प्रबंध-काव्य है। यह महाभारत के शांति पर्व के प्रसंग (युधिष्ठिर और भीष्म संवाद) पर आधारित है।
व्याख्या: 'कुरुक्षेत्र' (प्रकाशन 1946 ई.) आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि रामधारी सिंह 'दिनकर' का प्रसिद्ध प्रबंध-काव्य है। यह महाभारत के शांति पर्व के प्रसंग (युधिष्ठिर और भीष्म संवाद) पर आधारित है।
19. 'जो कुछ भी न जानता हो' के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा एक शब्द उपयुक्त है ?
सही उत्तर: A. अज्ञ
व्याख्या: जिस व्यक्ति को किसी विषय या वस्तु का ज्ञान न हो या जो कुछ न जानता हो, उसे 'अज्ञ' कहते हैं। विशेष ज्ञान रखने वाले को 'विज्ञ', कम जानने वाले को 'अल्पज्ञ' और सब कुछ जानने वाले को 'सर्वज्ञ' कहा जाता है।
व्याख्या: जिस व्यक्ति को किसी विषय या वस्तु का ज्ञान न हो या जो कुछ न जानता हो, उसे 'अज्ञ' कहते हैं। विशेष ज्ञान रखने वाले को 'विज्ञ', कम जानने वाले को 'अल्पज्ञ' और सब कुछ जानने वाले को 'सर्वज्ञ' कहा जाता है।
20. रचना के आधार पर वाक्य के कितने भेद होते हैं ?
सही उत्तर: A. तीन
व्याख्या: रचना के आधार पर वाक्य के तीन भेद होते हैं: (1) सरल वाक्य, (2) संयुक्त वाक्य (जो समुच्चयबोधक शब्दों से जुड़े हों), और (3) मिश्र वाक्य (जिसमें एक प्रधान और आश्रित उपवाक्य हो)।
व्याख्या: रचना के आधार पर वाक्य के तीन भेद होते हैं: (1) सरल वाक्य, (2) संयुक्त वाक्य (जो समुच्चयबोधक शब्दों से जुड़े हों), और (3) मिश्र वाक्य (जिसमें एक प्रधान और आश्रित उपवाक्य हो)।
21. परंपरागत हिन्दी ध्वनि-विज्ञान के अनुसार मूल स्वर कौन-से हैं ?
सही उत्तर: A. अ, इ, उ, ऋ
व्याख्या: परंपरागत भारतीय ध्वनि-विज्ञान एवं संस्कृत व्याकरण की परंपरा में मूल (ह्रस्व) स्वर 'अ, इ, उ, ऋ' माने जाते हैं। इन स्वरों का उच्चारण अपेक्षाकृत कम समय में होता है और ये अन्य स्वरों के संयोग से निर्मित नहीं होते।
व्याख्या: परंपरागत भारतीय ध्वनि-विज्ञान एवं संस्कृत व्याकरण की परंपरा में मूल (ह्रस्व) स्वर 'अ, इ, उ, ऋ' माने जाते हैं। इन स्वरों का उच्चारण अपेक्षाकृत कम समय में होता है और ये अन्य स्वरों के संयोग से निर्मित नहीं होते।
22. 'क्या भूलूँ क्या याद करूँ' किसकी आत्मकथा है ?
सही उत्तर: C. हरिवंशराय बच्चन
व्याख्या: 'क्या भूलूँ क्या याद करूँ' प्रसिद्ध कवि हरिवंशराय बच्चन की आत्मकथा का प्रथम खंड है। इसका प्रकाशन 1969 ई. में हुआ था। बच्चन जी की आत्मकथा कुल चार खंडों में प्रकाशित है।
व्याख्या: 'क्या भूलूँ क्या याद करूँ' प्रसिद्ध कवि हरिवंशराय बच्चन की आत्मकथा का प्रथम खंड है। इसका प्रकाशन 1969 ई. में हुआ था। बच्चन जी की आत्मकथा कुल चार खंडों में प्रकाशित है।
23. 'उसने कहा था' कहानी के रचयिता हैं:
सही उत्तर: C. चन्द्रधर शर्मा गुलेरी
व्याख्या: 'उसने कहा था' कहानी के रचयिता चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी' हैं। यह कहानी पहली बार 1915 ई. में 'सरस्वती' पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। प्रथम विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित यह कहानी प्रेम, कर्तव्य और आत्म-बलिदान का उत्कृष्ट उदाहरण है।
व्याख्या: 'उसने कहा था' कहानी के रचयिता चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी' हैं। यह कहानी पहली बार 1915 ई. में 'सरस्वती' पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। प्रथम विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित यह कहानी प्रेम, कर्तव्य और आत्म-बलिदान का उत्कृष्ट उदाहरण है।
24. इनमें से विदेशज शब्द कौन-सा है ?
सही उत्तर: D. चश्मा
व्याख्या: 'चश्मा' फारसी भाषा से हिंदी में आया हुआ विदेशी (विदेशज) शब्द है। लाठी देशज शब्द है, जबकि आँचल (तत्सम: अंचल) और खेत (तत्सम: क्षेत्र) तद्भव शब्द हैं।
व्याख्या: 'चश्मा' फारसी भाषा से हिंदी में आया हुआ विदेशी (विदेशज) शब्द है। लाठी देशज शब्द है, जबकि आँचल (तत्सम: अंचल) और खेत (तत्सम: क्षेत्र) तद्भव शब्द हैं।
25. 'विद्या + आलय' का सही सन्धि रूप है:
सही उत्तर: B. विद्यालय
व्याख्या: 'विद्या + आलय' का सही संधि रूप विद्यालय है। यहाँ आ + आ = आ होने के कारण दीर्घ स्वर संधि है।
व्याख्या: 'विद्या + आलय' का सही संधि रूप विद्यालय है। यहाँ आ + आ = आ होने के कारण दीर्घ स्वर संधि है।
26. 'मैला आँचल' उपन्यास के रचयिता कौन हैं ?
सही उत्तर: C. फणीश्वरनाथ रेणु
व्याख्या: 'मैला आँचल' के रचयिता फणीश्वरनाथ 'रेणु' हैं। इसका प्रकाशन 1954 ई. में हुआ था। इसे हिंदी का प्रथम/प्रमुख आंचलिक उपन्यास माना जाता है, जिसमें पूर्णिया क्षेत्र के मेरीगंज गाँव का चित्रण है।
व्याख्या: 'मैला आँचल' के रचयिता फणीश्वरनाथ 'रेणु' हैं। इसका प्रकाशन 1954 ई. में हुआ था। इसे हिंदी का प्रथम/प्रमुख आंचलिक उपन्यास माना जाता है, जिसमें पूर्णिया क्षेत्र के मेरीगंज गाँव का चित्रण है।
27. 'कामायनी' हिन्दी साहित्य में किस काव्य-रूप के अंतर्गत मानी जाती है ?
सही उत्तर: A. आख्यानक महाकाव्य
व्याख्या: जयशंकर प्रसाद कृत 'कामायनी' (1935 ई.) को आख्यानक महाकाव्य माना जाता है। इसका कथानक मुख्यतः शतपथ ब्राह्मण ग्रंथ पर आधारित है। इसमें शांत रस प्रधान है और कुल 15 सर्ग हैं।
व्याख्या: जयशंकर प्रसाद कृत 'कामायनी' (1935 ई.) को आख्यानक महाकाव्य माना जाता है। इसका कथानक मुख्यतः शतपथ ब्राह्मण ग्रंथ पर आधारित है। इसमें शांत रस प्रधान है और कुल 15 सर्ग हैं।
28. 'शेखरः एक जीवनी' उपन्यास के लेखक हैं:
सही उत्तर: B. अज्ञेय
व्याख्या: 'शेखर एक जीवनी' के रचनाकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' हैं। यह उनका प्रसिद्ध मनोविश्लेषणात्मक उपन्यास है, जो दो भागों में (प्रथम भाग 1941, दूसरा भाग 1944) प्रकाशित हुआ था।
व्याख्या: 'शेखर एक जीवनी' के रचनाकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' हैं। यह उनका प्रसिद्ध मनोविश्लेषणात्मक उपन्यास है, जो दो भागों में (प्रथम भाग 1941, दूसरा भाग 1944) प्रकाशित हुआ था।
29. 'तत् + टीका' का सन्धि रूप है:
सही उत्तर: A. तट्टीका
व्याख्या: 'तत् + टीका' का संधि रूप 'तट्टीका' है। यह व्यंजन संधि का उदाहरण है, जहाँ 'त्' के बाद 'ट्' आने पर 'त्' भी 'ट्' में बदल जाता है।
व्याख्या: 'तत् + टीका' का संधि रूप 'तट्टीका' है। यह व्यंजन संधि का उदाहरण है, जहाँ 'त्' के बाद 'ट्' आने पर 'त्' भी 'ट्' में बदल जाता है।
30. 'दशकुमारचरित' किसकी रचना है ?
सही उत्तर: C. दण्डी
व्याख्या: 'दशकुमारचरित' संस्कृत गद्य साहित्य की प्रसिद्ध रचना है, जिसके रचयिता महाकवि दण्डी हैं। इसमें दस राजकुमारों के जीवन और साहसिक अनुभवों का वर्णन है।
व्याख्या: 'दशकुमारचरित' संस्कृत गद्य साहित्य की प्रसिद्ध रचना है, जिसके रचयिता महाकवि दण्डी हैं। इसमें दस राजकुमारों के जीवन और साहसिक अनुभवों का वर्णन है।
31. संविधान सभा ने हिन्दी को राजभाषा के रूप में कब स्वीकार किया ?
सही उत्तर: D. 14 सितम्बर, 1949
व्याख्या: संविधान सभा ने 14 सितम्बर, 1949 को हिन्दी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसी कारण प्रतिवर्ष 14 सितम्बर को 'हिन्दी दिवस' मनाया जाता है। संविधान के अनुच्छेद 343 में संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी निर्धारित की गई है।
व्याख्या: संविधान सभा ने 14 सितम्बर, 1949 को हिन्दी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसी कारण प्रतिवर्ष 14 सितम्बर को 'हिन्दी दिवस' मनाया जाता है। संविधान के अनुच्छेद 343 में संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी निर्धारित की गई है।
32. 'राजपुत्र' में कौन-सा तत्पुरुष समास है ?
सही उत्तर: B. षष्ठी तत्पुरुष
व्याख्या: राजपुत्र का विग्रह 'राजा का पुत्र' होता है। यहाँ संबंध कारक के चिह्न 'का' का लोप होने के कारण षष्ठी तत्पुरुष (संबंध तत्पुरुष) समास है।
व्याख्या: राजपुत्र का विग्रह 'राजा का पुत्र' होता है। यहाँ संबंध कारक के चिह्न 'का' का लोप होने के कारण षष्ठी तत्पुरुष (संबंध तत्पुरुष) समास है।
33. 'सच्चरित्र' में सन्धि है:
सही उत्तर: B. व्यंजन सन्धि
व्याख्या: 'सच्चरित्र' का संधि विच्छेद 'सत् + चरित्र' होता है। व्यंजन संधि के नियमानुसार यदि 'त्/द्' के आगे 'च/छ' हो, तो 'त्/द्' के स्थान पर आधा 'च' हो जाता है।
व्याख्या: 'सच्चरित्र' का संधि विच्छेद 'सत् + चरित्र' होता है। व्यंजन संधि के नियमानुसार यदि 'त्/द्' के आगे 'च/छ' हो, तो 'त्/द्' के स्थान पर आधा 'च' हो जाता है।
34. दोहा छन्द के विषम चरणों में मात्राएँ होती हैं:
सही उत्तर: A. 13
व्याख्या: दोहा एक अर्धसम मात्रिक छंद है। इसके पहले और तीसरे चरण (विषम चरणों) में 13-13 मात्राएँ तथा दूसरे और चौथे चरण (सम चरणों) में 11-11 मात्राएँ होती हैं।
व्याख्या: दोहा एक अर्धसम मात्रिक छंद है। इसके पहले और तीसरे चरण (विषम चरणों) में 13-13 मात्राएँ तथा दूसरे और चौथे चरण (सम चरणों) में 11-11 मात्राएँ होती हैं।
35. 'चारु चन्द्र की चंचल किरणें खेल रही थीं जल थल में' में कौन-सा अलंकार है ?
सही उत्तर: A. अनुप्रास
व्याख्या: इस पंक्ति में 'च' वर्ण की आवृत्ति बार-बार (चारु, चंद्र, चंचल) हुई है। जहाँ एक ही वर्ण या ध्वनि की पुनरावृत्ति होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है। यह पंक्ति मैथिलीशरण गुप्त की कविता 'पंचवटी' से ली गई है।
व्याख्या: इस पंक्ति में 'च' वर्ण की आवृत्ति बार-बार (चारु, चंद्र, चंचल) हुई है। जहाँ एक ही वर्ण या ध्वनि की पुनरावृत्ति होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है। यह पंक्ति मैथिलीशरण गुप्त की कविता 'पंचवटी' से ली गई है।
36. हिन्दी साहित्य के प्रारम्भिक काल को 'आदिकाल' नाम से किस विद्वान ने अभिहित किया ?
सही उत्तर: A. हजारी प्रसाद द्विवेदी
व्याख्या: हिंदी साहित्य के प्रारंभिक काल को 'आदिकाल' नाम आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने दिया था। जबकि आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इसे 'वीरगाथा काल' और डॉ. रामकुमार वर्मा ने 'संधि एवं चारण काल' कहा था।
व्याख्या: हिंदी साहित्य के प्रारंभिक काल को 'आदिकाल' नाम आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने दिया था। जबकि आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इसे 'वीरगाथा काल' और डॉ. रामकुमार वर्मा ने 'संधि एवं चारण काल' कहा था।
37. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को 'आधुनिक हिन्दी साहित्य का जनक' किस साहित्येतिहासकार ने कहा ?
सही उत्तर: A. रामचन्द्र शुक्ल
व्याख्या: आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने भारतेंदु हरिश्चंद्र को 'आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक' कहा है। उन्होंने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ 'हिंदी साहित्य का इतिहास' में लिखा है कि भारतेंदु जी जिस प्रकार वर्तमान गद्य-भाषा के स्वरूप के प्रतिष्ठापक थे, उसी प्रकार वर्तमान साहित्य-परंपरा के प्रवर्तक भी थे।
व्याख्या: आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने भारतेंदु हरिश्चंद्र को 'आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक' कहा है। उन्होंने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ 'हिंदी साहित्य का इतिहास' में लिखा है कि भारतेंदु जी जिस प्रकार वर्तमान गद्य-भाषा के स्वरूप के प्रतिष्ठापक थे, उसी प्रकार वर्तमान साहित्य-परंपरा के प्रवर्तक भी थे।
38. मलिक मुहम्मद जायसी कृत 'पद्मावत' का प्रचलित रचनावर्ष कौन-सा माना जाता है ?
सही उत्तर: D. 1540 ई.
व्याख्या: मलिक मुहम्मद जायसी द्वारा रचित महाकाव्य 'पद्मावत' का प्रचलित रचना वर्ष 1540 ईस्वी माना जाता है। ग्रंथ की कुछ पंक्तियों के अनुसार इसकी रचना का आरंभ 927 हिजरी (लगभग 1520 ईस्वी) में हुआ था और 947 हिजरी (1540 ईस्वी) में यह पूर्ण हुआ, जिसे इसका सर्वमान्य रचना वर्ष माना गया है।
व्याख्या: मलिक मुहम्मद जायसी द्वारा रचित महाकाव्य 'पद्मावत' का प्रचलित रचना वर्ष 1540 ईस्वी माना जाता है। ग्रंथ की कुछ पंक्तियों के अनुसार इसकी रचना का आरंभ 927 हिजरी (लगभग 1520 ईस्वी) में हुआ था और 947 हिजरी (1540 ईस्वी) में यह पूर्ण हुआ, जिसे इसका सर्वमान्य रचना वर्ष माना गया है।
39. अष्टछाप के कवियों का संगठन किसने किया ?
सही उत्तर: D. विठ्ठलनाथ
व्याख्या: अष्टछाप के कवियों का संगठन (स्थापना) गोस्वामी विट्ठलनाथ ने सन् 1565 ईस्वी में किया था। इसमें चार शिष्य वल्लभाचार्य के (सूरदास, कुंभनदास, परमानंद दास और कृष्णदास) तथा चार शिष्य विट्ठलनाथ के (नंददास, गोविंदस्वामी, छीतस्वामी और चतुर्भुजदास) शामिल थे।
व्याख्या: अष्टछाप के कवियों का संगठन (स्थापना) गोस्वामी विट्ठलनाथ ने सन् 1565 ईस्वी में किया था। इसमें चार शिष्य वल्लभाचार्य के (सूरदास, कुंभनदास, परमानंद दास और कृष्णदास) तथा चार शिष्य विट्ठलनाथ के (नंददास, गोविंदस्वामी, छीतस्वामी और चतुर्भुजदास) शामिल थे।
40. प्रेमचन्द का अंतिम पूर्ण उपन्यास कौन-सा है ?
सही उत्तर: B. गोदान
व्याख्या: 'गोदान' प्रेमचन्द का अंतिम पूर्ण उपन्यास है। इसका प्रकाशन 1936 ई. में हुआ था और इसे प्रेमचन्द का महत्त्वपूर्ण यथार्थवादी उपन्यास माना जाता है। इसके केंद्र में किसान होरी और धनिया का जीवन है।
व्याख्या: 'गोदान' प्रेमचन्द का अंतिम पूर्ण उपन्यास है। इसका प्रकाशन 1936 ई. में हुआ था और इसे प्रेमचन्द का महत्त्वपूर्ण यथार्थवादी उपन्यास माना जाता है। इसके केंद्र में किसान होरी और धनिया का जीवन है।
41. सोरठा छन्द के पहले एवं तीसरे चरण में कितनी मात्राएँ होती हैं ?
सही उत्तर: A. 11-11
व्याख्या: सोरठा अर्धसम मात्रिक छंद है। इसमें चार चरण होते हैं। इसके प्रथम एवं तृतीय (विषम) चरण में 11-11 मात्राएँ तथा द्वितीय एवं चतुर्थ (सम) चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं। यह दोहे का विपरीत रूप माना जाता है।
व्याख्या: सोरठा अर्धसम मात्रिक छंद है। इसमें चार चरण होते हैं। इसके प्रथम एवं तृतीय (विषम) चरण में 11-11 मात्राएँ तथा द्वितीय एवं चतुर्थ (सम) चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं। यह दोहे का विपरीत रूप माना जाता है।
42. 'राम ने रावण को बाण से मारा' - 'बाण से' में कारक है :
सही उत्तर: C. करण
व्याख्या: जिस साधन या माध्यम के द्वारा कर्ता किसी कार्य को संपन्न करता है, वहाँ करण कारक होता है। यहाँ 'बाण' वह साधन है जिसके द्वारा राम ने रावण को मारा। अतः 'बाण से' में करण कारक है। इसके प्रमुख चिह्न 'से', 'के द्वारा' हैं।
व्याख्या: जिस साधन या माध्यम के द्वारा कर्ता किसी कार्य को संपन्न करता है, वहाँ करण कारक होता है। यहाँ 'बाण' वह साधन है जिसके द्वारा राम ने रावण को मारा। अतः 'बाण से' में करण कारक है। इसके प्रमुख चिह्न 'से', 'के द्वारा' हैं।
43. 'पठनीय' शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय कौन-सा है ?
सही उत्तर: B. अनीय
व्याख्या: पठनीय शब्द में 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। इसकी रचना 'पठ् (धातु) + अनीय (प्रत्यय)' से हुई है। अनीय प्रत्यय से बने शब्दों में सामान्यतः योग्यता या किए जाने योग्य होने का भाव व्यक्त होता है।
व्याख्या: पठनीय शब्द में 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। इसकी रचना 'पठ् (धातु) + अनीय (प्रत्यय)' से हुई है। अनीय प्रत्यय से बने शब्दों में सामान्यतः योग्यता या किए जाने योग्य होने का भाव व्यक्त होता है।
44. रचना-विधा सुमेलन में असंगत है:
सही उत्तर: A. मधुशाला - कहानी
व्याख्या: 'मधुशाला' हरिवंश राय बच्चन की प्रसिद्ध काव्य-कृति है (प्रकाशन 1935 ई.), यह कहानी नहीं है। इसलिए यह युग्म असंगत है। अन्य सभी युग्म विधा की दृष्टि से बिल्कुल सही सुमेलित हैं।
व्याख्या: 'मधुशाला' हरिवंश राय बच्चन की प्रसिद्ध काव्य-कृति है (प्रकाशन 1935 ई.), यह कहानी नहीं है। इसलिए यह युग्म असंगत है। अन्य सभी युग्म विधा की दृष्टि से बिल्कुल सही सुमेलित हैं।
45. महादेवी वर्मा की रचना नहीं है:
सही उत्तर: B. ग्राम्या
व्याख्या: 'ग्राम्या' महादेवी वर्मा की रचना नहीं, बल्कि सुमित्रानंदन पंत का प्रसिद्ध काव्य-संग्रह है, जिसका प्रकाशन 1940 ई. में हुआ था। इसके विपरीत नीहार (1930), रश्मि (1932) और नीरजा (1934/35) महादेवी वर्मा के प्रमुख काव्य-संग्रह हैं।
व्याख्या: 'ग्राम्या' महादेवी वर्मा की रचना नहीं, बल्कि सुमित्रानंदन पंत का प्रसिद्ध काव्य-संग्रह है, जिसका प्रकाशन 1940 ई. में हुआ था। इसके विपरीत नीहार (1930), रश्मि (1932) और नीरजा (1934/35) महादेवी वर्मा के प्रमुख काव्य-संग्रह हैं।
46. कबीर की रचनाओं के संग्रह 'बीजक' को कितने भागों में विभाजित किया गया है ?
सही उत्तर: C. तीन
व्याख्या: कबीर की वाणी का प्रमुख संग्रह 'बीजक' है जिसके तीन प्रमुख भाग माने जाते हैं: (1) साखी (मुख्यतः दोहा छंद), (2) सबद (गेय पद), और (3) रमैनी (चौपाई और दोहा छंद)। इसका संकलन उनके शिष्य धर्मदास ने किया था।
व्याख्या: कबीर की वाणी का प्रमुख संग्रह 'बीजक' है जिसके तीन प्रमुख भाग माने जाते हैं: (1) साखी (मुख्यतः दोहा छंद), (2) सबद (गेय पद), और (3) रमैनी (चौपाई और दोहा छंद)। इसका संकलन उनके शिष्य धर्मदास ने किया था।
47. 'पृथ्वीराज रासो' के रचयिता कौन हैं ?
सही उत्तर: C. चन्दबरदाई
व्याख्या: 'पृथ्वीराज रासो' के रचयिता चन्दबरदाई हैं, जो अजमेर-दिल्ली के राजा पृथ्वीराज चौहान के राजकवि और मित्र थे। यह आदिकाल की प्रसिद्ध वीरगाथात्मक रचना है जिसे हिंदी का प्रथम महाकाव्य भी कहा जाता है।
व्याख्या: 'पृथ्वीराज रासो' के रचयिता चन्दबरदाई हैं, जो अजमेर-दिल्ली के राजा पृथ्वीराज चौहान के राजकवि और मित्र थे। यह आदिकाल की प्रसिद्ध वीरगाथात्मक रचना है जिसे हिंदी का प्रथम महाकाव्य भी कहा जाता है।
48. 'राम की शक्ति पूजा' किसकी रचना है ?
सही उत्तर: D. सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला
व्याख्या: 'राम की शक्ति पूजा' सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की प्रसिद्ध लंबी कविता है जिसका रचनाकाल 1936 ई. है। यह मूलतः उनके काव्य-संग्रह 'अनामिका' में प्रकाशित हुई थी, जिसमें राम के संघर्ष और शक्ति-साधना का मानवीय चित्रण है।
व्याख्या: 'राम की शक्ति पूजा' सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की प्रसिद्ध लंबी कविता है जिसका रचनाकाल 1936 ई. है। यह मूलतः उनके काव्य-संग्रह 'अनामिका' में प्रकाशित हुई थी, जिसमें राम के संघर्ष और शक्ति-साधना का मानवीय चित्रण है।
49. देवनागरी लिपि का मूल स्रोत किस लिपि को माना जाता है ?
सही उत्तर: D. ब्राह्मी
व्याख्या: देवनागरी लिपि का मूल स्रोत ब्राह्मी लिपि को माना जाता है। भाषावैज्ञानिक विकासक्रम के अनुसार इसका विकास इस प्रकार हुआ: ब्राह्मी → गुप्त लिपि → कुटिल लिपि → नागरी लिपि → देवनागरी लिपि।
व्याख्या: देवनागरी लिपि का मूल स्रोत ब्राह्मी लिपि को माना जाता है। भाषावैज्ञानिक विकासक्रम के अनुसार इसका विकास इस प्रकार हुआ: ब्राह्मी → गुप्त लिपि → कुटिल लिपि → नागरी लिपि → देवनागरी लिपि।
50. 'मुख मानो चन्द्रमा है' में कौन-सा अलंकार है ?
सही उत्तर: D. उत्प्रेक्षा
व्याख्या: जहाँ उपमेय (मुख) में उपमान (चन्द्रमा) की संभावना या कल्पना की जाए, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। इसके प्रमुख वाचक शब्द मानो, मनु, जनु, जानो आदि हैं।
व्याख्या: जहाँ उपमेय (मुख) में उपमान (चन्द्रमा) की संभावना या कल्पना की जाए, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। इसके प्रमुख वाचक शब्द मानो, मनु, जनु, जानो आदि हैं।
51. 'पूस की रात' कहानी के रचयिता हैं:
सही उत्तर: D. प्रेमचन्द
व्याख्या: 'पूस की रात' मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध यथार्थवादी कहानी है। यह कहानी गरीब किसान हल्कू, उसकी पत्नी मुन्नी और कुत्ते जबरा के माध्यम से ऋण, गरीबी और तत्कालीन व्यवस्था की विडंबना को मार्मिक ढंग से सामने लाती है।
व्याख्या: 'पूस की रात' मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध यथार्थवादी कहानी है। यह कहानी गरीब किसान हल्कू, उसकी पत्नी मुन्नी और कुत्ते जबरा के माध्यम से ऋण, गरीबी और तत्कालीन व्यवस्था की विडंबना को मार्मिक ढंग से सामने लाती है।
52. निम्नलिखित में से कौन छायावाद के चार स्तम्भों में सम्मिलित नहीं है ?
सही उत्तर: C. रामधारी सिंह दिनकर
व्याख्या: हिंदी साहित्य में छायावाद के चार प्रमुख स्तंभ जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' और महादेवी वर्मा हैं। रामधारी सिंह दिनकर छायावादोत्तर/राष्ट्रीय सांस्कृतिक काव्यधारा के ओजस्वी कवि हैं।
व्याख्या: हिंदी साहित्य में छायावाद के चार प्रमुख स्तंभ जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' और महादेवी वर्मा हैं। रामधारी सिंह दिनकर छायावादोत्तर/राष्ट्रीय सांस्कृतिक काव्यधारा के ओजस्वी कवि हैं।
53. निम्नलिखित में से कौन-सा साहित्यकार भारतेन्दु मण्डल से सम्बद्ध नहीं है ?
सही उत्तर: B. मैथिलीशरण गुप्त
व्याख्या: मैथिलीशरण गुप्त भारतेन्दु मण्डल के नहीं बल्कि द्विवेदी युग के प्रतिनिधि राष्ट्रकवि हैं। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी इनके साहित्यिक गुरु थे। बाकी तीनों साहित्यकार भारतेन्दु मण्डल के प्रमुख स्तंभ हैं।
व्याख्या: मैथिलीशरण गुप्त भारतेन्दु मण्डल के नहीं बल्कि द्विवेदी युग के प्रतिनिधि राष्ट्रकवि हैं। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी इनके साहित्यिक गुरु थे। बाकी तीनों साहित्यकार भारतेन्दु मण्डल के प्रमुख स्तंभ हैं।
54. संस्कृत में 'द्वन्द्व समास' का उदाहरण है :
सही उत्तर: A. रामलक्ष्मणौ
व्याख्या: 'रामलक्ष्मणौ' (रामश्च लक्ष्मणश्च अर्थात् राम और लक्ष्मण) संस्कृत में द्वन्द्व समास का उदाहरण है जहाँ दोनों पद समान रूप से प्रधान हैं। महाराजः और नीलकमलम् कर्मधारय समास के तथा त्रिलोकी द्विगु समास का उदाहरण है।
व्याख्या: 'रामलक्ष्मणौ' (रामश्च लक्ष्मणश्च अर्थात् राम और लक्ष्मण) संस्कृत में द्वन्द्व समास का उदाहरण है जहाँ दोनों पद समान रूप से प्रधान हैं। महाराजः और नीलकमलम् कर्मधारय समास के तथा त्रिलोकी द्विगु समास का उदाहरण है।
55. निम्नलिखित में से कौन-सी भारतेन्दु युग की प्रमुख प्रवृत्ति नहीं है ?
सही उत्तर: A. प्रकृति का सूक्ष्म चित्रण
व्याख्या: देशप्रेम, सामाजिक सुधार और गद्य में खड़ीबोली का प्रचलन भारतेन्दु युग की प्रमुख प्रवृत्तियाँ हैं। इसके विपरीत 'प्रकृति का सूक्ष्म एवं भावात्मक चित्रण' मुख्य रूप से छायावादी काव्य की प्रमुख प्रवृत्ति माना जाता है।
व्याख्या: देशप्रेम, सामाजिक सुधार और गद्य में खड़ीबोली का प्रचलन भारतेन्दु युग की प्रमुख प्रवृत्तियाँ हैं। इसके विपरीत 'प्रकृति का सूक्ष्म एवं भावात्मक चित्रण' मुख्य रूप से छायावादी काव्य की प्रमुख प्रवृत्ति माना जाता है।
56. वीर रस का स्थायी भाव है:
सही उत्तर: B. उत्साह
व्याख्या: वीर रस का शास्त्रीय स्थायी भाव 'उत्साह' है। जब मन में वीरता, पराक्रम और किसी कठिन कार्य को करने की उमंग उत्पन्न होती है, तब वीर रस की निष्पत्ति होती है। क्रोध रौद्र रस का स्थायी भाव है।
व्याख्या: वीर रस का शास्त्रीय स्थायी भाव 'उत्साह' है। जब मन में वीरता, पराक्रम और किसी कठिन कार्य को करने की उमंग उत्पन्न होती है, तब वीर रस की निष्पत्ति होती है। क्रोध रौद्र रस का स्थायी भाव है।
57. निम्नलिखित में से कौन-सा उदाहरण करुण रस का है ?
सही उत्तर: C. प्रियजन की मृत्यु पर विलाप
व्याख्या: करुण रस का स्थायी भाव 'शोक' होता है। किसी प्रिय व्यक्ति के विनाश, वियोग या मृत्यु के कारण मन में जो शोक भाव जागृत होता है, वहाँ करुण रस की निष्पत्ति होती है। अतः प्रियजन की मृत्यु पर विलाप इसका सही उदाहरण है।
व्याख्या: करुण रस का स्थायी भाव 'शोक' होता है। किसी प्रिय व्यक्ति के विनाश, वियोग या मृत्यु के कारण मन में जो शोक भाव जागृत होता है, वहाँ करुण रस की निष्पत्ति होती है। अतः प्रियजन की मृत्यु पर विलाप इसका सही उदाहरण है।
58. 'शिशुपालवध' महाकाव्य के रचयिता हैं :
सही उत्तर: B. माघ
व्याख्या: संस्कृत के प्रसिद्ध महाकवि माघ द्वारा रचित महाकाव्य 'शिशुपालवध' है। यह महाभारत के सभापर्व की कथा पर आधारित है और इसमें कुल 20 सर्ग हैं। भारवि की रचना 'किरातार्जुनीयम्' तथा श्रीहर्ष की रचना 'नैषधचरित' है।
व्याख्या: संस्कृत के प्रसिद्ध महाकवि माघ द्वारा रचित महाकाव्य 'शिशुपालवध' है। यह महाभारत के सभापर्व की कथा पर आधारित है और इसमें कुल 20 सर्ग हैं। भारवि की रचना 'किरातार्जुनीयम्' तथा श्रीहर्ष की रचना 'नैषधचरित' है।
59. जिसमें उपमेय का निषेध करके उपमान का आरोप किया जाए, वह कौन-सा अलंकार है ?
सही उत्तर: B. अपह्नुति
व्याख्या: 'अपह्नुति' का अर्थ होता है छिपाना। जहाँ उपमेय का निषेध करके (उसे छिपाकर) उस पर उपमान का आरोप किया जाए, वहाँ अपह्नुति अलंकार होता है, जैसे: "यह मुख नहीं, चन्द्रमा है।"
व्याख्या: 'अपह्नुति' का अर्थ होता है छिपाना। जहाँ उपमेय का निषेध करके (उसे छिपाकर) उस पर उपमान का आरोप किया जाए, वहाँ अपह्नुति अलंकार होता है, जैसे: "यह मुख नहीं, चन्द्रमा है।"
60. निम्नलिखित में से शुद्ध वाक्य कौन-सा है ?
सही उत्तर: D. वह केवल विद्यार्थी है।
व्याख्या: विकल्प D पूर्णतः शुद्ध है। विकल्प A में एकवचन 'वह' के साथ 'हैं' (बहुवचन) लगा है जो अशुद्ध है। विकल्प C में 'केवल' और 'मात्र' दोनों समानार्थी शब्दों का एक साथ अनावश्यक प्रयोग (पुनरुक्ति दोष) हुआ है।
व्याख्या: विकल्प D पूर्णतः शुद्ध है। विकल्प A में एकवचन 'वह' के साथ 'हैं' (बहुवचन) लगा है जो अशुद्ध है। विकल्प C में 'केवल' और 'मात्र' दोनों समानार्थी शब्दों का एक साथ अनावश्यक प्रयोग (पुनरुक्ति दोष) हुआ है।
61. निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द 'तद्भव' है ?
सही उत्तर: C. आँख
व्याख्या: 'आँख' एक तद्भव शब्द है, जिसका तत्सम रूप 'अक्षि' होता है। विकल्प में दिए गए अन्य तीनों शब्द (लोचन, नयन और चक्षु) संस्कृत के तत्सम शब्द हैं जो बिना किसी परिवर्तन के हिंदी में प्रयुक्त होते हैं।
व्याख्या: 'आँख' एक तद्भव शब्द है, जिसका तत्सम रूप 'अक्षि' होता है। विकल्प में दिए गए अन्य तीनों शब्द (लोचन, नयन और चक्षु) संस्कृत के तत्सम शब्द हैं जो बिना किसी परिवर्तन के हिंदी में प्रयुक्त होते हैं।
62. 'मन्दाक्रान्ता' छन्द किस श्रेणी का छन्द है ?
सही उत्तर: B. वर्णिक
व्याख्या: मन्दाक्रान्ता एक वर्णिक छन्द है जिसके प्रत्येक चरण में 17 वर्ण होते हैं और इसका एक निश्चित लघु-गुरु क्रम होता है। महाकवि कालिदास का प्रसिद्ध ग्रंथ 'मेघदूत' इसी छन्द में रचा गया है।
व्याख्या: मन्दाक्रान्ता एक वर्णिक छन्द है जिसके प्रत्येक चरण में 17 वर्ण होते हैं और इसका एक निश्चित लघु-गुरु क्रम होता है। महाकवि कालिदास का प्रसिद्ध ग्रंथ 'मेघदूत' इसी छन्द में रचा गया है।
63. रचना-रचनाकार में असंगत युग्म है:
सही उत्तर: D. तार सप्तक - हरिवंशराय बच्चन
व्याख्या: 'तार सप्तक' का संपादन हरिवंशराय बच्चन ने नहीं, बल्कि सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' ने सन् 1943 ई. में किया था। बच्चन जी तार सप्तक के कवियों में शामिल नहीं थे, इसलिए यह युग्म असंगत है।
व्याख्या: 'तार सप्तक' का संपादन हरिवंशराय बच्चन ने नहीं, बल्कि सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' ने सन् 1943 ई. में किया था। बच्चन जी तार सप्तक के कवियों में शामिल नहीं थे, इसलिए यह युग्म असंगत है।
64. वाक्य "रामः वनं गच्छति" में "वनं" कौन-सा कारक है ?
सही उत्तर: C. कर्म कारक
व्याख्या: इस वाक्य में 'वनं' पद में कर्म कारक (द्वितीया विभक्ति) है। संस्कृत व्याकरण के नियमानुसार गमन (जाने) की क्रिया का फल या लक्ष्य जिस स्थान पर पड़ता है, वह कर्म कारक माना जाता है।
व्याख्या: इस वाक्य में 'वनं' पद में कर्म कारक (द्वितीया विभक्ति) है। संस्कृत व्याकरण के नियमानुसार गमन (जाने) की क्रिया का फल या लक्ष्य जिस स्थान पर पड़ता है, वह कर्म कारक माना जाता है।
65. 'अवधि' एवं 'अवधी' शब्दों का सही अर्थ-युग्म निम्नलिखित में से कौन-सा है ?
सही उत्तर: B. समय - बोली
व्याख्या: छोटी 'इ' की मात्रा वाले 'अवधि' का अर्थ समय की सीमा या काल होता है (जैसे: परीक्षा की अवधि)। जबकि बड़ी 'ई' की मात्रा वाली 'अवधी' अवध क्षेत्र में बोली जाने वाली हिंदी की एक प्रमुख बोली/भाषा है।
व्याख्या: छोटी 'इ' की मात्रा वाले 'अवधि' का अर्थ समय की सीमा या काल होता है (जैसे: परीक्षा की अवधि)। जबकि बड़ी 'ई' की मात्रा वाली 'अवधी' अवध क्षेत्र में बोली जाने वाली हिंदी की एक प्रमुख बोली/भाषा है।
66. देवनागरी लिपि की त्रुटियों के सुधार हेतु प्रयास किसने नहीं किया ?
सही उत्तर: A. बंकिमचन्द्र चटर्जी
व्याख्या: बंकिमचंद्र चटर्जी ने देवनागरी लिपि के सुधार हेतु कोई प्रयास नहीं किया। महावीर प्रसाद द्विवेदी ने वर्तनी व व्याकरणिक एकरूपता, श्यामसुंदर दास ने पंचमाक्षर के स्थान पर अनुवार के प्रयोग और डॉ. गोरख प्रसाद ने मात्राओं को व्यंजन के दाहिनी तरफ लगाने का ऐतिहासिक सुझाव दिया था।
व्याख्या: बंकिमचंद्र चटर्जी ने देवनागरी लिपि के सुधार हेतु कोई प्रयास नहीं किया। महावीर प्रसाद द्विवेदी ने वर्तनी व व्याकरणिक एकरूपता, श्यामसुंदर दास ने पंचमाक्षर के स्थान पर अनुवार के प्रयोग और डॉ. गोरख प्रसाद ने मात्राओं को व्यंजन के दाहिनी तरफ लगाने का ऐतिहासिक सुझाव दिया था।
67. 'अग्नि' का तद्भव रूप हैः
सही उत्तर: D. आग
व्याख्या: 'अग्नि' संस्कृत का एक तत्सम शब्द है। प्राकृत और अपभ्रंश से रूप बदलते हुए हिंदी में इसका विकसित रूप 'आग' हुआ है, जो कि तद्भव शब्द है। अनल, ज्वाला और पावक इसके तत्सम पर्यायवाची शब्द हैं।
व्याख्या: 'अग्नि' संस्कृत का एक तत्सम शब्द है। प्राकृत और अपभ्रंश से रूप बदलते हुए हिंदी में इसका विकसित रूप 'आग' हुआ है, जो कि तद्भव शब्द है। अनल, ज्वाला और पावक इसके तत्सम पर्यायवाची शब्द हैं।
68. जिस शब्द का प्रयोग सुनने में अप्रिय लगे, वह कौन-सा दोष है ?
सही उत्तर: C. श्रुति-कटु
व्याख्या: काव्यशास्त्र के अनुसार जब किसी कविता या वाक्य में कानों को अप्रिय या सुनने में कठोर लगने वाले शब्दों/वर्णों का प्रयोग किया जाता है, तो वहाँ 'श्रुति-कटु दोष' माना जाता है। व्याकरण विरुद्ध प्रयोग को च्युत-संस्कृत और अशिष्ट लोक-प्रचलित शब्दों को ग्राम्य दोष कहते हैं।
व्याख्या: काव्यशास्त्र के अनुसार जब किसी कविता या वाक्य में कानों को अप्रिय या सुनने में कठोर लगने वाले शब्दों/वर्णों का प्रयोग किया जाता है, तो वहाँ 'श्रुति-कटु दोष' माना जाता है। व्याकरण विरुद्ध प्रयोग को च्युत-संस्कृत और अशिष्ट लोक-प्रचलित शब्दों को ग्राम्य दोष कहते हैं।
69. 'कलम का सिपाही' किसकी जीवनी है ?
सही उत्तर: D. प्रेमचन्द
व्याख्या: 'कलम का सिपाही' उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध जीवनी है, जिसके लेखक उनके सुपुत्र अमृत राय हैं। इसमें प्रेमचंद के जीवन संघर्षों और साहित्यिक यात्रा का विस्तृत वर्णन है।
व्याख्या: 'कलम का सिपाही' उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध जीवनी है, जिसके लेखक उनके सुपुत्र अमृत राय हैं। इसमें प्रेमचंद के जीवन संघर्षों और साहित्यिक यात्रा का विस्तृत वर्णन है।
70. रीतिकाल की प्रमुख प्रवृत्ति निम्नलिखित में से कौन-सी है ?
सही उत्तर: B. श्रृंगार एवं रीतिनिरूपण
व्याख्या: रीतिकाल की मुख्य प्रवृत्ति 'श्रृंगार एवं रीतिनिरूपण' (लक्षण ग्रंथों की रचना और नायिका-भेद) रही है। रहस्यवाद और सूक्ष्म प्रकृति चित्रण मुख्य रूप से छायावाद की तथा वीरगाथा आदिकाल की प्रमुख प्रवृत्ति है।
व्याख्या: रीतिकाल की मुख्य प्रवृत्ति 'श्रृंगार एवं रीतिनिरूपण' (लक्षण ग्रंथों की रचना और नायिका-भेद) रही है। रहस्यवाद और सूक्ष्म प्रकृति चित्रण मुख्य रूप से छायावाद की तथा वीरगाथा आदिकाल की प्रमुख प्रवृत्ति है।
71. 'गुरु' (भारी) का विलोम निम्नलिखित में से कौन-सा है ?
सही उत्तर: A. लघु
व्याख्या: प्रश्न में 'गुरु' के साथ ब्रैकेट में 'भारी' शब्द दिया गया है, जिसका अर्थ वजनदार या बड़ा होता है। अतः इसका सटीक विलोम 'लघु' (हल्का या छोटा) होगा। यदि गुरु का अर्थ शिक्षक के रूप में लिया जाए, तो उसका विलोम 'शिष्य' होता है।
व्याख्या: प्रश्न में 'गुरु' के साथ ब्रैकेट में 'भारी' शब्द दिया गया है, जिसका अर्थ वजनदार या बड़ा होता है। अतः इसका सटीक विलोम 'लघु' (हल्का या छोटा) होगा। यदि गुरु का अर्थ शिक्षक के रूप में लिया जाए, तो उसका विलोम 'शिष्य' होता है।
72. कालिदास की रचना नहीं है:
सही उत्तर: B. किरातार्जुनीय
व्याख्या: 'किरातार्जुनीयम्' महाकवि कालिदास की रचना नहीं है, बल्कि यह संस्कृत के प्रसिद्ध महाकवि भारवि द्वारा रचित 18 सर्गों का एक प्रतिष्ठित महाकाव्य है। जबकि मेघदूत (खंडकाव्य), रघुवंश और कुमारसंभव (महाकाव्य) महाकवि कालिदास की अमर कृतियाँ हैं।
व्याख्या: 'किरातार्जुनीयम्' महाकवि कालिदास की रचना नहीं है, बल्कि यह संस्कृत के प्रसिद्ध महाकवि भारवि द्वारा रचित 18 सर्गों का एक प्रतिष्ठित महाकाव्य है। जबकि मेघदूत (खंडकाव्य), रघुवंश और कुमारसंभव (महाकाव्य) महाकवि कालिदास की अमर कृतियाँ हैं।
73. 'राम विद्यालय जाता है' का संस्कृत अनुवाद है:
सही उत्तर: C. रामः विद्यालयं गच्छति
व्याख्या: इस वाक्य में 'राम' कर्ता है, इसलिए प्रथमा विभक्ति एकवचन (रामः) का प्रयोग होगा। गमन (जाने) की क्रिया का लक्ष्य 'विद्यालय' है, अतः 'द्वितीया विभक्ति' के नियमानुसार 'विद्यालयं' होगा। क्रिया कर्ता के अनुसार प्रथम पुरुष एकवचन 'गच्छति' होगी।
व्याख्या: इस वाक्य में 'राम' कर्ता है, इसलिए प्रथमा विभक्ति एकवचन (रामः) का प्रयोग होगा। गमन (जाने) की क्रिया का लक्ष्य 'विद्यालय' है, अतः 'द्वितीया विभक्ति' के नियमानुसार 'विद्यालयं' होगा। क्रिया कर्ता के अनुसार प्रथम पुरुष एकवचन 'गच्छति' होगी।
74. 'दर्शन' (किसी के दर्शन करना) शब्द का प्रयोग सामान्यतः किस वचन में होता है ?
सही उत्तर: D. सदा बहुवचन में
व्याख्या: हिंदी व्याकरण में 'दर्शन' शब्द का प्रयोग सदैव बहुवचन (सदा बहुवचन) में होता है (जैसे: मुझे आज गुरुजी के दर्शन हुए)। हिंदी में सदैव बहुवचन में प्रयुक्त होने वाले अन्य प्रमुख शब्द हैं: प्राण, आँसू, होश, बाल, हस्ताक्षर और लोग।
व्याख्या: हिंदी व्याकरण में 'दर्शन' शब्द का प्रयोग सदैव बहुवचन (सदा बहुवचन) में होता है (जैसे: मुझे आज गुरुजी के दर्शन हुए)। हिंदी में सदैव बहुवचन में प्रयुक्त होने वाले अन्य प्रमुख शब्द हैं: प्राण, आँसू, होश, बाल, हस्ताक्षर और लोग।
75. निम्नलिखित में से कौन-सा महाकाव्य का लक्षण नहीं है ?
सही उत्तर: D. यह मुक्तक शैली में होता है
व्याख्या: महाकाव्य एक विस्तृत और क्रमबद्ध प्रबंध काव्य होता है, जिसमें किसी महान नायक के जीवन का संपूर्ण चित्रण होता है। इसलिए यह मुक्तक शैली में नहीं हो सकता। बाकी तीनों विकल्प महाकाव्य के शास्त्रीय लक्षण हैं।
व्याख्या: महाकाव्य एक विस्तृत और क्रमबद्ध प्रबंध काव्य होता है, जिसमें किसी महान नायक के जीवन का संपूर्ण चित्रण होता है। इसलिए यह मुक्तक शैली में नहीं हो सकता। बाकी तीनों विकल्प महाकाव्य के शास्त्रीय लक्षण हैं।
76. जयशंकर प्रसाद की कौन-सी रचना नहीं है ?
सही उत्तर: B. अनामिका
व्याख्या: 'अनामिका' जयशंकर प्रसाद का काव्य-संग्रह नहीं है, बल्कि यह सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की प्रसिद्ध रचना है। जबकि लहर, झरना और आँसू जयशंकर प्रसाद के अत्यंत लोकप्रिय छायावादी काव्य-संग्रह हैं।
व्याख्या: 'अनामिका' जयशंकर प्रसाद का काव्य-संग्रह नहीं है, बल्कि यह सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की प्रसिद्ध रचना है। जबकि लहर, झरना और आँसू जयशंकर प्रसाद के अत्यंत लोकप्रिय छायावादी काव्य-संग्रह हैं।
77. सात्विक अनुभावों की संख्या है:
सही उत्तर: A. आठ
व्याख्या: भारतीय रस-सिद्धांत में सात्त्विक अनुभावों की कुल संख्या आठ मानी गई है। ये वो शारीरिक विकार या क्रियाएँ हैं जो मन में तीव्र भावावेग के कारण स्वतः और अनैच्छिक रूप से प्रकट होती हैं। ये हैं: स्तम्भ, स्वेद, रोमांच, स्वरभंग, कम्प, वैवर्णय, अश्रु और प्रलय।
व्याख्या: भारतीय रस-सिद्धांत में सात्त्विक अनुभावों की कुल संख्या आठ मानी गई है। ये वो शारीरिक विकार या क्रियाएँ हैं जो मन में तीव्र भावावेग के कारण स्वतः और अनैच्छिक रूप से प्रकट होती हैं। ये हैं: स्तम्भ, स्वेद, रोमांच, स्वरभंग, कम्प, वैवर्णय, अश्रु और प्रलय।
78. रचना-रचनाकार में सुमेलित युग्म है:
सही उत्तर: A. हिमतरंगिणी - माखनलाल चतुर्वेदी
व्याख्या: विकल्प A बिल्कुल सही सुमेलित है। 'हिमतरंगिणी' माखनलाल चतुर्वेदी की प्रसिद्ध कृति है, जिसके लिए उन्हें 1955 में प्रथम साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था। 'उर्वशी' दिनकर की रचना है और 'नीरजा' महादेवी वर्मा की रचना है।
व्याख्या: विकल्प A बिल्कुल सही सुमेलित है। 'हिमतरंगिणी' माखनलाल चतुर्वेदी की प्रसिद्ध कृति है, जिसके लिए उन्हें 1955 में प्रथम साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था। 'उर्वशी' दिनकर की रचना है और 'नीरजा' महादेवी वर्मा की रचना है।
79. 'अरे यायावर रहेगा याद' यात्रा-वृत्तान्त के लेखक हैं :
सही उत्तर: D. अज्ञेय
व्याख्या: 'अरे यायावर रहेगा याद' प्रसिद्ध प्रयोगवादी कवि और साहित्यकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण यात्रा-वृत्तांत है, जिसमें उनकी देश-विदेश की यात्राओं के साहित्यिक और सांस्कृतिक अनुभव दर्ज हैं।
व्याख्या: 'अरे यायावर रहेगा याद' प्रसिद्ध प्रयोगवादी कवि और साहित्यकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण यात्रा-वृत्तांत है, जिसमें उनकी देश-विदेश की यात्राओं के साहित्यिक और सांस्कृतिक अनुभव दर्ज हैं।
80. 'राजा निरबंसिया' कहानी के लेखक हैं:
सही उत्तर: C. कमलेश्वर
व्याख्या: 'राजा निरबंसिया' नयी कहानी आंदोलन के प्रमुख स्तंभ और कहानीकार कमलेश्वर की एक कालजयी और बहुचर्चित कहानी है। कमलेश्वर को समांतर कहानी आंदोलन (1972) के प्रवर्तन का श्रेय भी दिया जाता है।
व्याख्या: 'राजा निरबंसिया' नयी कहानी आंदोलन के प्रमुख स्तंभ और कहानीकार कमलेश्वर की एक कालजयी और बहुचर्चित कहानी है। कमलेश्वर को समांतर कहानी आंदोलन (1972) के प्रवर्तन का श्रेय भी दिया जाता है।
81. रीतिसिद्ध काव्यधारा का प्रवर्तक किसे माना जाता है ?
सही उत्तर: B. बिहारी
व्याख्या: रीतिकालीन काव्यधारा को मुख्य रूप से तीन भागों (रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध, रीतिमुक्त) में बाँटा जाता है। इसमें से 'रीतिसिद्ध काव्यधारा' का प्रवर्तक और प्रतिनिधि कवि महाकवि बिहारीलाल को माना जाता है, जिनकी एकमात्र प्रामाणिक कृति 'बिहारी सतसई' है। *(ध्यान दें: पीडीएफ के व्याख्या खंड में 'रीतिसिद्ध' स्पष्ट किया गया है)*
व्याख्या: रीतिकालीन काव्यधारा को मुख्य रूप से तीन भागों (रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध, रीतिमुक्त) में बाँटा जाता है। इसमें से 'रीतिसिद्ध काव्यधारा' का प्रवर्तक और प्रतिनिधि कवि महाकवि बिहारीलाल को माना जाता है, जिनकी एकमात्र प्रामाणिक कृति 'बिहारी सतसई' है। *(ध्यान दें: पीडीएफ के व्याख्या खंड में 'रीतिसिद्ध' स्पष्ट किया गया है)*
82. निम्नलिखित में से रीतिमुक्त काव्यधारा के कवि कौन हैं ?
सही उत्तर: C. घनानन्द
व्याख्या: घनानन्द रीतिकाल की 'रीतिमुक्त काव्यधारा' के प्रमुख और सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं। उनके काव्य में शास्त्रीय बंधनों की जगह हृदय की स्वाभाविक प्रेमानुभूति और विरह प्रधान है। आलम, बोधा और ठाकुर अन्य प्रमुख रीतिमुक्त कवि हैं।
व्याख्या: घनानन्द रीतिकाल की 'रीतिमुक्त काव्यधारा' के प्रमुख और सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं। उनके काव्य में शास्त्रीय बंधनों की जगह हृदय की स्वाभाविक प्रेमानुभूति और विरह प्रधान है। आलम, बोधा और ठाकुर अन्य प्रमुख रीतिमुक्त कवि हैं।
83. निम्नलिखित में से हिन्दी की विभाषा कौन-सी है ?
सही उत्तर: D. पूर्वी हिन्दी
व्याख्या: दिए गए विकल्पों में 'पूर्वी हिन्दी' एक विभाषा (उपभाषा) है, जबकि ब्रजभाषा, अवधी और बुंदेली इसके अंतर्गत आने वाली बोलियाँ हैं। हिंदी क्षेत्र में कुल 5 उपभाषाएँ/विभाषाएँ (पश्चिमी हिंदी, पूर्वी हिंदी, राजस्थानी, बिहारी, पहाड़ी) मानी जाती हैं।
व्याख्या: दिए गए विकल्पों में 'पूर्वी हिन्दी' एक विभाषा (उपभाषा) है, जबकि ब्रजभाषा, अवधी और बुंदेली इसके अंतर्गत आने वाली बोलियाँ हैं। हिंदी क्षेत्र में कुल 5 उपभाषाएँ/विभाषाएँ (पश्चिमी हिंदी, पूर्वी हिंदी, राजस्थानी, बिहारी, पहाड़ी) मानी जाती हैं।
84. वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध शब्द है :
सही उत्तर: D. आशीर्वाद
व्याख्या: वर्तनी की शुद्धता के नियम से विकल्प D 'आशीर्वाद' बिल्कुल सही रूप है। इसमें 'शी' के बाद आधा 'र्' का उच्चारण होता है जो अपने अगले वर्ण 'वा' के ऊपर रेफ के रूप में लगाया जाता है।
व्याख्या: वर्तनी की शुद्धता के नियम से विकल्प D 'आशीर्वाद' बिल्कुल सही रूप है। इसमें 'शी' के बाद आधा 'र्' का उच्चारण होता है जो अपने अगले वर्ण 'वा' के ऊपर रेफ के रूप में लगाया जाता है।
85. पद परिचय में सामान्यतः किन तत्वों का उल्लेख किया जाता है ?
सही उत्तर: C. लिंग, वचन, कारक एवं पद-सम्बन्ध
व्याख्या: वाक्य में प्रयुक्त किसी पद का व्याकरणिक विश्लेषण करना ही 'पद परिचय' कहलाता है। इसके अंतर्गत पद के स्वरूप के आधार पर उसका लिंग, वचन, कारक, भेद तथा वाक्य के दूसरे पदों के साथ उसके संबंध का उल्लेख किया जाता है।
व्याख्या: वाक्य में प्रयुक्त किसी पद का व्याकरणिक विश्लेषण करना ही 'पद परिचय' कहलाता है। इसके अंतर्गत पद के स्वरूप के आधार पर उसका लिंग, वचन, कारक, भेद तथा वाक्य के दूसरे पदों के साथ उसके संबंध का उल्लेख किया जाता है।
86. नई कहानी आन्दोलन के प्रमुख त्रिकोण माने जाते हैं:
सही उत्तर: B. मोहन राकेश, राजेन्द्र यादव, कमलेश्वर
व्याख्या: नई कहानी आंदोलन (1956 ई.) के प्रमुख त्रिकोण के रूप में मोहन राकेश, राजेंद्र यादव और कमलेश्वर को माना जाता है। इस आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता 'अनुभूति की प्रामाणिकता' और 'भोगे हुए यथार्थ' पर बल देना था।
व्याख्या: नई कहानी आंदोलन (1956 ई.) के प्रमुख त्रिकोण के रूप में मोहन राकेश, राजेंद्र यादव और कमलेश्वर को माना जाता है। इस आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता 'अनुभूति की प्रामाणिकता' और 'भोगे हुए यथार्थ' पर बल देना था।
87. नागार्जुन की कौन-सी रचना है ?
सही उत्तर: D. बलचनामा
व्याख्या: 'बलचनमा' (1952 ई.) प्रगतिशील कवि और उपन्यासकार नागार्जुन का प्रसिद्ध आंचलिक उपन्यास है। 'तमस' भीष्म साहनी की, 'मित्रो मरजानी' कृष्णा सोबती की और 'गुनाहों का देवता' धर्मवीर भारती की प्रसिद्ध रचना है।
व्याख्या: 'बलचनमा' (1952 ई.) प्रगतिशील कवि और उपन्यासकार नागार्जुन का प्रसिद्ध आंचलिक उपन्यास है। 'तमस' भीष्म साहनी की, 'मित्रो मरजानी' कृष्णा सोबती की और 'गुनाहों का देवता' धर्मवीर भारती की प्रसिद्ध रचना है।
88. 'चन्द्रमुख' (चन्द्र के समान मुख) में कौन-सा समास है ?
सही उत्तर: D. कर्मधारय
व्याख्या: 'चन्द्रमुख' का विग्रह 'चन्द्र के समान मुख' होता है। यहाँ 'चन्द्र' उपमान है और 'मुख' उपमेय है। जब समास में पदों के बीच उपमान-उपमेय या विशेषण-विशेष्य का संबंध होता है और उत्तरपद प्रधान होता है, वहाँ कर्मधारय समास होता है।
व्याख्या: 'चन्द्रमुख' का विग्रह 'चन्द्र के समान मुख' होता है। यहाँ 'चन्द्र' उपमान है और 'मुख' उपमेय है। जब समास में पदों के बीच उपमान-उपमेय या विशेषण-विशेष्य का संबंध होता है और उत्तरपद प्रधान होता है, वहाँ कर्मधारय समास होता है।
89. 'pushp' का पर्यायवाची निम्नलिखित में से कौन-सा है ?
सही उत्तर: B. सुमन
व्याख्या: दिए गए विकल्पों में से 'सुमन' पुष्प (फूल) का पर्यायवाची शब्द है। पुष्प के अन्य प्रमुख पर्यायवाची प्रसून, कुसुम, फूल, मंजरी आदि हैं। पल्लव का अर्थ नया पत्ता, पत्र का अर्थ पत्ता/चिठ्ठी और तरु का अर्थ पेड़ होता है।
व्याख्या: दिए गए विकल्पों में से 'सुमन' पुष्प (फूल) का पर्यायवाची शब्द है। पुष्प के अन्य प्रमुख पर्यायवाची प्रसून, कुसुम, फूल, मंजरी आदि हैं। पल्लव का अर्थ नया पत्ता, पत्र का अर्थ पत्ता/चिठ्ठी और तरु का अर्थ पेड़ होता है।
90. 'समुद्र' का पर्यायवाची निम्नलिखित में से कौन-सा नहीं है ?
सही उत्तर: D. कूल
व्याख्या: 'कूल' शब्द का अर्थ किनारा या तट होता है, इसलिए यह समुद्र का पर्यायवाची नहीं है। जबकि जलधि, रत्नाकर, सिन्धु, सागर, वारिधि, पयोधि आदि समुद्र के प्रमुख पर्यायवाची शब्द हैं।
व्याख्या: 'कूल' शब्द का अर्थ किनारा या तट होता है, इसलिए यह समुद्र का पर्यायवाची नहीं है। जबकि जलधि, रत्नाकर, सिन्धु, सागर, वारिधि, पयोधि आदि समुद्र के प्रमुख पर्यायवाची शब्द हैं।
91. 'पायो जी मैंने राम-रतन धन पायो' में कौन-सा अलंकार है ?
सही उत्तर: D. रूपक
व्याख्या: इस पंक्ति में 'राम-रतन' (राम रूपी रत्न) में उपमेय पर उपमान का सीधा आरोप कर दिया गया है। जब अभेद्यता दर्शाने के लिए उपमेय पर उपमान का सीधा आरोप किया जाता है, तो वहाँ रूपक अलंकार होता है। *(ध्यान दें: पीडीएफ के व्याख्या खंड में विकल्प संकेत में मुद्रण दोष है, शास्त्रीय रूप से यह रूपक अलंकार है)*।
व्याख्या: इस पंक्ति में 'राम-रतन' (राम रूपी रत्न) में उपमेय पर उपमान का सीधा आरोप कर दिया गया है। जब अभेद्यता दर्शाने के लिए उपमेय पर उपमान का सीधा आरोप किया जाता है, तो वहाँ रूपक अलंकार होता है। *(ध्यान दें: पीडीएफ के व्याख्या खंड में विकल्प संकेत में मुद्रण दोष है, शास्त्रीय रूप से यह रूपक अलंकार है)*।
92. 'अशोक के फूल' निबन्ध संग्रह के रचयिता कौन हैं ?
सही उत्तर: B. हजारी प्रसाद द्विवेदी
व्याख्या: 'अशोक के फूल' प्रसिद्ध आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का अत्यंत चर्चित ललित निबंध संग्रह है। कल्पलता, विचार और वितर्क, कुटज और आलोक पर्व उनके अन्य प्रमुख निबंध संग्रह हैं।
व्याख्या: 'अशोक के फूल' प्रसिद्ध आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का अत्यंत चर्चित ललित निबंध संग्रह है। कल्पलता, विचार और वितर्क, कुटज और आलोक पर्व उनके अन्य प्रमुख निबंध संग्रह हैं।
93. प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना कब हुई ?
सही उत्तर: A. 1936 ई.
व्याख्या: भारत में प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) की स्थापना सन् 1936 ई. में लखनऊ में हुई थी। इसके प्रथम ऐतिहासिक अधिवेशन की अध्यक्षता मुंशी प्रेमचंद ने की थी। इसका उद्देश्य साहित्य को सामाजिक यथार्थ और जनजीवन से जोड़ना था।
व्याख्या: भारत में प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) की स्थापना सन् 1936 ई. में लखनऊ में हुई थी। इसके प्रथम ऐतिहासिक अधिवेशन की अध्यक्षता मुंशी प्रेमचंद ने की थी। इसका उद्देश्य साहित्य को सामाजिक यथार्थ और जनजीवन से जोड़ना था।
94. 'पुनरुक्ति दोष' किस श्रेणी का दोष है ?
सही उत्तर: D. अर्थ दोष
व्याख्या: जब किसी वाक्य या काव्य में एक ही बात या अर्थ को अनावश्यक रूप से दोबारा दोहराया जाता है, तो वहाँ 'पुनरुक्ति दोष' होता है। यह काव्यशास्त्र के अंतर्गत 'अर्थ-दोष' की श्रेणी में आता है (जैसे: "वह वापस लौट आया" में वापस और लौट दोनों का अर्थ एक ही है)।
व्याख्या: जब किसी वाक्य या काव्य में एक ही बात या अर्थ को अनावश्यक रूप से दोबारा दोहराया जाता है, तो वहाँ 'पुनरुक्ति दोष' होता है। यह काव्यशास्त्र के अंतर्गत 'अर्थ-दोष' की श्रेणी में आता है (जैसे: "वह वापस लौट आया" में वापस और लौट दोनों का अर्थ एक ही है)।
95. डॉ. जॉर्ज ग्रियर्सन के अनुसार हिन्दी की प्रमुख उपभाषाओं की संख्या कितनी है ?
सही उत्तर: A. दो
व्याख्या: डॉ. जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने अपने भाषाई सर्वेक्षण ग्रंथ 'लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया' (LSI) में विशुद्ध हिंदी के अंतर्गत केवल 2 प्रमुख उपभाषाएँ मानी हैं—पश्चिमी हिंदी और पूर्वी हिंदी। उन्होंने राजस्थानी, बिहारी और पहाड़ी को स्वतंत्र भाषा-समूह माना था।
व्याख्या: डॉ. जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने अपने भाषाई सर्वेक्षण ग्रंथ 'लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया' (LSI) में विशुद्ध हिंदी के अंतर्गत केवल 2 प्रमुख उपभाषाएँ मानी हैं—पश्चिमी हिंदी और पूर्वी हिंदी। उन्होंने राजस्थानी, बिहारी और पहाड़ी को स्वतंत्र भाषा-समूह माना था।
96. 'आधे-अधूरे' नाटक के लेखक कौन हैं ?
सही उत्तर: A. मोहन राकेश
व्याख्या: 'आधे-अधूरे' (1969 ई.) आधुनिक हिंदी नाटककार मोहन राकेश की प्रसिद्ध यथार्थवादी कृति है। यह नाटक मध्यमवर्गीय शहरी परिवार के विघटन और स्त्री-पुरुष संबंधों के तनाव को दर्शाता है। इसमें सावित्री और महेंद्रनाथ मुख्य पात्र हैं।
व्याख्या: 'आधे-अधूरे' (1969 ई.) आधुनिक हिंदी नाटककार मोहन राकेश की प्रसिद्ध यथार्थवादी कृति है। यह नाटक मध्यमवर्गीय शहरी परिवार के विघटन और स्त्री-पुरुष संबंधों के तनाव को दर्शाता है। इसमें सावित्री और महेंद्रनाथ मुख्य पात्र हैं।
97. 'मृगावती' किसकी रचना है ?
सही उत्तर: B. कुतुबन
व्याख्या: 'मृगावती' कुतुबन की प्रसिद्ध सूफी प्रेमाख्यानक काव्यकृति है, जिसकी रचना दोहा-चौपाई शैली में की गई है। इसके अतिरिक्त, उसमान की 'चित्रावली', मंझन की 'मधुमालती' और जायसी की 'पद्मावत' सूफी काव्य की अन्य प्रमुख रचनाएँ हैं।
व्याख्या: 'मृगावती' कुतुबन की प्रसिद्ध सूफी प्रेमाख्यानक काव्यकृति है, जिसकी रचना दोहा-चौपाई शैली में की गई है। इसके अतिरिक्त, उसमान की 'चित्रावली', मंझन की 'मधुमालती' और जायसी की 'पद्मावत' सूफी काव्य की अन्य प्रमुख रचनाएँ हैं।
98. 'नयी कविता' पत्रिका के सम्पादक कौन थे ?
सही उत्तर: A. जगदीश गुप्त
व्याख्या: 'नयी कविता' नामक महत्वपूर्ण साहित्यिक पत्रिका का प्रकाशन सन् 1954 ई. में इलाहाबाद से आरंभ हुआ था। इसके संपादन का दायित्व मुख्य रूप से डॉ. जगदीश गुप्त और डॉ. रामस्वरूप चतुर्वेदी ने संभाला था।
व्याख्या: 'नयी कविता' नामक महत्वपूर्ण साहित्यिक पत्रिका का प्रकाशन सन् 1954 ई. में इलाहाबाद से आरंभ हुआ था। इसके संपादन का दायित्व मुख्य रूप से डॉ. जगदीश गुप्त और डॉ. रामस्वरूप चतुर्वेदी ने संभाला था।
99. मैथिलीशरण गुप्त की कौन-सी रचना द्विवेदी युग की प्रतिनिधि कृति है ?
सही उत्तर: B. भारत-भारती
व्याख्या: मैथिलीशरण गुप्त की प्रसिद्ध राष्ट्रीय चेतना से ओत-प्रोत काव्य-कृति 'भारत-भारती' (1912 ई.) को द्विवेदी युग की प्रतिनिधि कृति माना जाता है। इसी रचना के कारण महात्मा गांधी ने इन्हें 'राष्ट्रकवि' की उपाधि दी थी।
व्याख्या: मैथिलीशरण गुप्त की प्रसिद्ध राष्ट्रीय चेतना से ओत-प्रोत काव्य-कृति 'भारत-भारती' (1912 ई.) को द्विवेदी युग की प्रतिनिधि कृति माना जाता है। इसी रचना के कारण महात्मा गांधी ने इन्हें 'राष्ट्रकवि' की उपाधि दी थी।
100. 'आसमान सिर पर उठाना' मुहावरे का अर्थ निम्नलिखित में से कौन-सा है ?
सही उत्तर: B. बहुत शोर मचाना
व्याख्या: 'आसमान सिर पर उठाना' मुहावरे का अर्थ किसी बात को लेकर बहुत शोर मचाना या हंगामा खड़ा करना होता है। क्रोधित होने के लिए 'आग-बबूला होना' और घमंड करने के लिए 'इतराना या हवा में उड़ना' प्रयुक्त होता है।
व्याख्या: 'आसमान सिर पर उठाना' मुहावरे का अर्थ किसी बात को लेकर बहुत शोर मचाना या हंगामा खड़ा करना होता है। क्रोधित होने के लिए 'आग-बबूला होना' और घमंड करने के लिए 'इतराना या हवा में उड़ना' प्रयुक्त होता है।
101. 'अनिल' एवं 'अनल' शब्दों का सही अर्थ-युग्म निम्नलिखित में से कौन-सा है ?
सही उत्तर: A. वायु - अग्नि
व्याख्या: श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द युग्म में 'अनिल' का अर्थ वायु (हवा) होता है और 'अनल' का अर्थ अग्नि (आग) होता है। अतः सही विकल्प A होगा।
व्याख्या: श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द युग्म में 'अनिल' का अर्थ वायु (हवा) होता है और 'अनल' का अर्थ अग्नि (आग) होता है। अतः सही विकल्प A होगा।
102. 'राग दरबारी' किस विधा की रचना है ?
सही उत्तर: A. व्यंग्य उपन्यास
व्याख्या: 'राग दरबारी' श्रीलाल शुक्ल का प्रसिद्ध व्यंग्यात्मक उपन्यास है, जिसका प्रकाशन 1968 ई. में हुआ था। इस महान कृति के लिए उन्हें 1969 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसका परिवेश 'शिवपालगंज' गाँव है।
व्याख्या: 'राग दरबारी' श्रीलाल शुक्ल का प्रसिद्ध व्यंग्यात्मक उपन्यास है, जिसका प्रकाशन 1968 ई. में हुआ था। इस महान कृति के लिए उन्हें 1969 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसका परिवेश 'शिवपालगंज' गाँव है।
103. 'सूर साहित्य' के लेखक हैं:
सही उत्तर: B. हजारी प्रसाद द्विवेदी
व्याख्या: 'सूर साहित्य' आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की पहली ऐतिहासिक आलोचनात्मक कृति है। इस पुस्तक में उन्होंने सूरदास के काव्य, व्यक्तित्व, भक्ति-भावना और काव्य-सौंदर्य का सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत किया है।
व्याख्या: 'सूर साहित्य' आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की पहली ऐतिहासिक आलोचनात्मक कृति है। इस पुस्तक में उन्होंने सूरदास के काव्य, व्यक्तित्व, भक्ति-भावना और काव्य-सौंदर्य का सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत किया है।
104. 'राम राज बैठे त्रैलोका, हरषित भए गए सब सोका' किस गुण का उदाहरण है ?
सही उत्तर: C. प्रसाद
व्याख्या: दी गई पंक्ति 'प्रसाद गुण' का सुंदर उदाहरण है। जिस काव्य को पढ़ते ही उसका अर्थ बिना किसी कठिनाई के तुरंत, सहज और स्पष्ट रूप से समझ आ जाए, वहाँ प्रसाद काव्य-गुण होता है। श्लेष एक अलंकार है, गुण नहीं।
व्याख्या: दी गई पंक्ति 'प्रसाद गुण' का सुंदर उदाहरण है। जिस काव्य को पढ़ते ही उसका अर्थ बिना किसी कठिनाई के तुरंत, सहज और स्पष्ट रूप से समझ आ जाए, वहाँ प्रसाद काव्य-गुण होता है। श्लेष एक अलंकार है, गुण नहीं।
105. शुद्ध शब्द कौन-सा है ?
सही उत्तर: D. उज्ज्वल
व्याख्या: वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध शब्द 'उज्ज्वल' है जिसमें दोनों 'ज' आधे होते हैं। इसका संधि विच्छेद 'उद् + ज्वल' (या उत् + ज्वल) होता है, जो व्यंजन संधि का एक प्रमुख नियम दर्शाता है।
व्याख्या: वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध शब्द 'उज्ज्वल' है जिसमें दोनों 'ज' आधे होते हैं। इसका संधि विच्छेद 'उद् + ज्वल' (या उत् + ज्वल) होता है, जो व्यंजन संधि का एक प्रमुख नियम दर्शाता है।
106. 'जिसकी उपमा न हो' के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा एक शब्द उपयुक्त है ?
सही उत्तर: D. अनुपम
व्याख्या: जिसकी किसी से उपमा या तुलना न की जा सके, उसके लिए एक शब्द 'अनुपम' (या अद्वितीय) उपयुक्त है। जिसकी तुलना न हो उसे 'अतुलनीय' और जो इस लोक का न हो उसे 'अलौकिक' कहा जाता है।
व्याख्या: जिसकी किसी से उपमा या तुलना न की जा सके, उसके लिए एक शब्द 'अनुपम' (या अद्वितीय) उपयुक्त है। जिसकी तुलना न हो उसे 'अतुलनीय' और जो इस लोक का न हो उसे 'अलौकिक' कहा जाता है।
107. 'इन्दुमती' कहानी का प्रकाशन किस पत्रिका में और कब हुआ था ?
सही उत्तर: B. सरस्वती में 1900 ई. में
व्याख्या: 'इन्दुमती' कहानी का प्रकाशन सन् 1900 ई. में 'सरस्वती' पत्रिका के पहले वर्ष के अंकों में हुआ था। इसके रचनाकार किशोरीलाल गोस्वामी हैं। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इसे हिंदी की पहली मौलिक कहानी माना था।
व्याख्या: 'इन्दुमती' कहानी का प्रकाशन सन् 1900 ई. में 'सरस्वती' पत्रिका के पहले वर्ष के अंकों में हुआ था। इसके रचनाकार किशोरीलाल गोस्वामी हैं। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इसे हिंदी की पहली मौलिक कहानी माना था।
108. सरहपा किस साहित्यिक परम्परा के कवि माने जाते हैं ?
सही उत्तर: C. सिद्ध साहित्य
व्याख्या: सरहपा (सरहपाद) को हिंदी साहित्य के 'सिद्ध साहित्य' परंपरा का प्रमुख एवं प्रारंभिक कवि माना जाता है। वे बौद्ध धर्म की वज्रयान परंपरा से संबद्ध थे और उन्हें हिंदी का प्रथम कवि भी स्वीकार किया जाता है।
व्याख्या: सरहपा (सरहपाद) को हिंदी साहित्य के 'सिद्ध साहित्य' परंपरा का प्रमुख एवं प्रारंभिक कवि माना जाता है। वे बौद्ध धर्म की वज्रयान परंपरा से संबद्ध थे और उन्हें हिंदी का प्रथम कवि भी स्वीकार किया जाता है।
109. 'आषाढ़ का एक दिन' को सामान्यतः किस प्रकार का नाटक माना जाता है ?
सही उत्तर: C. ऐतिहासिक
व्याख्या: 'आषाढ़ का एक दिन' (1958 ई.) मोहन राकेश का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाला नाटक है। इसका कथानक महाकवि कालिदास के जीवन, मल्लिका के प्रेम और उनके राजकवि बनने की ऐतिहासिक कड़ियों तथा आधुनिक मनुष्य के आंतरिक द्वंद्व पर आधारित है।
व्याख्या: 'आषाढ़ का एक दिन' (1958 ई.) मोहन राकेश का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाला नाटक है। इसका कथानक महाकवि कालिदास के जीवन, मल्लिका के प्रेम और उनके राजकवि बनने की ऐतिहासिक कड़ियों तथा आधुनिक मनुष्य के आंतरिक द्वंद्व पर आधारित है।
110. 'तितली' उपन्यास के लेखक हैं:
सही उत्तर: A. जयशंकर प्रसाद
व्याख्या: 'तितली' उपन्यास के लेखक जयशंकर प्रसाद हैं, जिसका प्रकाशन 1934 ई. में हुआ था। इसमें ग्रामीण जीवन, नारी-जीवन और सामाजिक परिवर्तन का चित्रण है। कंकाल और इरावती (अपूर्ण) प्रसाद जी के अन्य उपन्यास हैं।
व्याख्या: 'तितली' उपन्यास के लेखक जयशंकर प्रसाद हैं, जिसका प्रकाशन 1934 ई. में हुआ था। इसमें ग्रामीण जीवन, नारी-जीवन और सामाजिक परिवर्तन का चित्रण है। कंकाल और इरावती (अपूर्ण) प्रसाद जी के अन्य उपन्यास हैं।
111. 'काली घटा का घमण्ड घटा' में कौन-सा अलंकार है ?
सही उत्तर: D. यमक
व्याख्या: इस पंक्ति में 'घटा' शब्द दो बार आया है और दोनों ही जगह इसका अर्थ अलग है। पहली 'घटा' का अर्थ काले बादल से है और दूसरी 'घटा' का अर्थ 'कम होना' (घट जाना) है। अतः जहाँ एक शब्द बार-बार आए और अर्थ अलग हों, वहाँ यमक अलंकार होता है।
व्याख्या: इस पंक्ति में 'घटा' शब्द दो बार आया है और दोनों ही जगह इसका अर्थ अलग है। पहली 'घटा' का अर्थ काले बादल से है और दूसरी 'घटा' का अर्थ 'कम होना' (घट जाना) है। अतः जहाँ एक शब्द बार-बार आए और अर्थ अलग हों, वहाँ यमक अलंकार होता है।
112. 'अनुकरण' शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग कौन-सा है ?
सही उत्तर: D. अनु
व्याख्या: 'अनुकरण' शब्द में 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है, जिसका सामान्य अर्थ 'पीछे', 'अनुसार' या 'सदृश' होता है। मूल शब्द 'करण' के आगे 'अनु' जोड़ने से अनुकरण (पीछे चलना या नकल करना) बनता है।
व्याख्या: 'अनुकरण' शब्द में 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है, जिसका सामान्य अर्थ 'पीछे', 'अनुसार' या 'सदृश' होता है। मूल शब्द 'करण' के आगे 'अनु' जोड़ने से अनुकरण (पीछे चलना या नकल करना) बनता है।
113. निम्नलिखित में से हिन्दी साहित्य के आदिकाल की प्रमुख प्रवृत्ति कौन-सी है ?
सही उत्तर: B. वीरगाथा एवं चरितकाव्य
व्याख्या: आदिकाल (वीरगाथा काल) की प्रमुख साहित्यिक प्रवृत्ति 'वीरगाथा एवं चरितकाव्य' की रही है, जिसमें आश्रयदाता राजाओं के शौर्य, युद्धों और जीवन-चरित का अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन प्रमुख था (जैसे: पृथ्वीराज रासो)। रीतिनिरूपण रीतिकाल की विशेषता है।
व्याख्या: आदिकाल (वीरगाथा काल) की प्रमुख साहित्यिक प्रवृत्ति 'वीरगाथा एवं चरितकाव्य' की रही है, जिसमें आश्रयदाता राजाओं के शौर्य, युद्धों और जीवन-चरित का अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन प्रमुख था (जैसे: पृथ्वीराज रासो)। रीतिनिरूपण रीतिकाल की विशेषता है।
114. 'आदान' (ग्रहण) का विलोम निम्नलिखित में से कौन-सा है ?
सही उत्तर: D. प्रदान
व्याख्या: 'आदान' का शाब्दिक अर्थ लेना या ग्रहण करना होता है। इसका ठीक विपरीत या विलोम शब्द 'प्रदान' होगा, जिसका अर्थ देना या सौंपना होता है। क्रय का विलोम विक्रय होता है।
व्याख्या: 'आदान' का शाब्दिक अर्थ लेना या ग्रहण करना होता है। इसका ठीक विपरीत या विलोम शब्द 'प्रदान' होगा, जिसका अर्थ देना या सौंपना होता है। क्रय का विलोम विक्रय होता है।
115. 'त्रिवेणी' में किस-किस कवि की आलोचना संकलित है ?
सही उत्तर: B. जायसी, सूरदास, तुलसीदास
व्याख्या: 'त्रिवेणी' आचार्य रामचंद्र शुक्ल की एक अत्यंत महत्वपूर्ण आलोचनात्मक कृति है। इसमें उन्होंने भक्तिकाल के तीन प्रमुख कवियों—मलिक मुहम्मद जायसी, सूरदास और गोस्वामी तुलसीदास के काव्य का विस्तृत मूल्यांकन व विवेचन किया है। इसमें कबीरदास शामिल नहीं हैं।
व्याख्या: 'त्रिवेणी' आचार्य रामचंद्र शुक्ल की एक अत्यंत महत्वपूर्ण आलोचनात्मक कृति है। इसमें उन्होंने भक्तिकाल के तीन प्रमुख कवियों—मलिक मुहम्मद जायसी, सूरदास और गोस्वामी तुलसीदास के काव्य का विस्तृत मूल्यांकन व विवेचन किया है। इसमें कबीरदास शामिल नहीं हैं।
116. परम्परागत संस्कृत व्याकरण के अनुसार हिन्दी में कुल कितने मूल व्यंजन माने जाते हैं ?
सही उत्तर: B. 33
व्याख्या: परंपरागत संस्कृत व्याकरण के अनुसार मूल व्यंजनों की संख्या 33 मानी जाती है। इनमें 25 स्पर्श व्यंजन (क से म तक), 4 अन्तःस्थ व्यंजन (य, र, ल, व) और 4 ऊष्म व्यंजन (श, ष, s, ह) शामिल हैं। आधुनिक हिन्दी में ड़ और ढ़ को जोड़कर यह संख्या 35 भी मानी जाती है।
व्याख्या: परंपरागत संस्कृत व्याकरण के अनुसार मूल व्यंजनों की संख्या 33 मानी जाती है। इनमें 25 स्पर्श व्यंजन (क से म तक), 4 अन्तःस्थ व्यंजन (य, र, ल, व) और 4 ऊष्म व्यंजन (श, ष, s, ह) शामिल हैं। आधुनिक हिन्दी में ड़ और ढ़ को जोड़कर यह संख्या 35 भी मानी जाती है।
117. 'नमस्कार' का सन्धि विच्छेद है:
सही उत्तर: B. नमः + कार
व्याख्या: 'नमस्कार' का सही संधि विच्छेद 'नमः + कार' है। यह विसर्ग संधि का उदाहरण है, जहाँ नियमानुसार विसर्ग (ः) का परिवर्तन आधे 'स्' में हो जाता है।
व्याख्या: 'नमस्कार' का सही संधि विच्छेद 'नमः + कार' है। यह विसर्ग संधि का उदाहरण है, जहाँ नियमानुसार विसर्ग (ः) का परिवर्तन आधे 'स्' में हो जाता है।
118. 'रामः' किस विभक्ति का रूप है ?
सही उत्तर: A. प्रथमा एकवचन
व्याख्या: 'रामः' रूप संस्कृत व्याकरण में अकारांत पुल्लिंग 'राम' शब्द का प्रथमा विभक्ति, एकवचन का रूप है। इसके प्रथमा विभक्ति के तीनों वचनों के रूप 'रामः (एकवचन), रामौ (द्विवचन), रामाः (बहुवचन)' होते हैं।
व्याख्या: 'रामः' रूप संस्कृत व्याकरण में अकारांत पुल्लिंग 'राम' शब्द का प्रथमा विभक्ति, एकवचन का रूप है। इसके प्रथमा विभक्ति के तीनों वचनों के रूप 'रामः (एकवचन), रामौ (द्विवचन), रामाः (बहुवचन)' होते हैं।
119. 'सूरसागर' की काव्य-रचना मुख्यतः किस शैली में की गई है ?
सही उत्तर: A. भागवत-आधारित पद-शैली
व्याख्या: महाकवि सूरदास कृत 'सूरसागर' की रचना ब्रजभाषा में मुख्यतः श्रीमद्भागवत पुराण के दशम स्कंध पर आधारित मुक्तक पद-शैली (गेय पदों) में की गई है। दोहा-चौपाई शैली मुख्य रूप से रामकाव्य (तुलसीदास) तथा सूफी काव्य में मिलती है।
व्याख्या: महाकवि सूरदास कृत 'सूरसागर' की रचना ब्रजभाषा में मुख्यतः श्रीमद्भागवत पुराण के दशम स्कंध पर आधारित मुक्तक पद-शैली (गेय पदों) में की गई है। दोहा-चौपाई शैली मुख्य रूप से रामकाव्य (तुलसीदास) तथा सूफी काव्य में मिलती है।
120. 'चिन्तामणि' निबन्ध संग्रह के लेखक कौन हैं ?
सही उत्तर: D. रामचन्द्र शुक्ल
व्याख्या: 'चिंतामणि' आचार्य रामचंद्र शुक्ल के प्रसिद्ध निबंधों का संग्रह है। इसका प्रथम भाग सन् 1930 ई. में सर्वप्रथम 'विचार-वीथी' नाम से प्रकाशित हुआ था। बाद में इसके अन्य भागों का संपादन विश्वनाथ प्रसाद मिश्र, नामवर सिंह आदि विद्वानों द्वारा किया गया।
व्याख्या: 'चिंतामणि' आचार्य रामचंद्र शुक्ल के प्रसिद्ध निबंधों का संग्रह है। इसका प्रथम भाग सन् 1930 ई. में सर्वप्रथम 'विचार-वीथी' नाम से प्रकाशित हुआ था। बाद में इसके अन्य भागों का संपादन विश्वनाथ प्रसाद मिश्र, नामवर सिंह आदि विद्वानों द्वारा किया गया।
121. 'हरि पद कोमल कमल से' में कौन-सा अलंकार है ?
सही उत्तर: C. उपमा
व्याख्या: इस पंक्ति में भगवान के चरणों (हरि पद) की तुलना कोमलता के आधार पर कमल से की गई है। यहाँ तुलना का सूचक वाचक शब्द 'से' प्रयुक्त हुआ है, इसलिए यहाँ उपमा अलंकार है।
व्याख्या: इस पंक्ति में भगवान के चरणों (हरि पद) की तुलना कोमलता के आधार पर कमल से की गई है। यहाँ तुलना का सूचक वाचक शब्द 'से' प्रयुक्त हुआ है, इसलिए यहाँ उपमा अलंकार है।
122. 'झूठा सच' उपन्यास के रचयिता कौन हैं ?
सही उत्तर: D. यशपाल
व्याख्या: 'झूठा सच' उपन्यास के रचयिता यशपाल हैं। यह भारत विभाजन (1947) की पृष्ठभूमि पर लिखा गया एक वृहद् उपन्यास है जो दो भागों में विभाजित है—पहला भाग 'वतन और देश' (1958) तथा दूसरा भाग 'देश का भविष्य' (1960)।
व्याख्या: 'झूठा सच' उपन्यास के रचयिता यशपाल हैं। यह भारत विभाजन (1947) की पृष्ठभूमि पर लिखा गया एक वृहद् उपन्यास है जो दो भागों में विभाजित है—पहला भाग 'वतन और देश' (1958) तथा दूसरा भाग 'देश का भविष्य' (1960)।
123. 'गेहूँ और गुलाब' संस्मरण-संग्रह के रचयिता हैं:
सही उत्तर: D. रामवृक्ष बेनीपुरी
व्याख्या: 'गेहूँ और गुलाब' (1950 ई.) रेखाचित्र और संस्मरण विधा की प्रसिद्ध रचना है जिसके रचयिता रामवृक्ष बेनीपुरी हैं। इसमें 'गेहूँ' को मनुष्य की भौतिक आवश्यकताओं (भूख) का तथा 'गुलाब' को उसकी मानसिक व सांस्कृतिक आवश्यकताओं (सौंदर्य-बोध) का प्रतीक माना गया है।
व्याख्या: 'गेहूँ और गुलाब' (1950 ई.) रेखाचित्र और संस्मरण विधा की प्रसिद्ध रचना है जिसके रचयिता रामवृक्ष बेनीपुरी हैं। इसमें 'गेहूँ' को मनुष्य की भौतिक आवश्यकताओं (भूख) का तथा 'गुलाब' को उसकी मानसिक व सांस्कृतिक आवश्यकताओं (सौंदर्य-बोध) का प्रतीक माना गया है।
124. इनमें से स्त्रीलिंग शब्द कौन-सा है ?
सही उत्तर: A. मिठाई
व्याख्या: दिए गए विकल्पों में 'मिठाई' एक स्त्रीलिंग शब्द है (जैसे: मिठाई स्वादिष्ट है)। जबकि 'दही, घी और तेल' व्याकरणिक नियमों और प्रचलित प्रयोगों के अनुसार अपवाद स्वरूप पुल्लिंग शब्दों के अंतर्गत आते हैं।
व्याख्या: दिए गए विकल्पों में 'मिठाई' एक स्त्रीलिंग शब्द है (जैसे: मिठाई स्वादिष्ट है)। जबकि 'दही, घी और तेल' व्याकरणिक नियमों और प्रचलित प्रयोगों के अनुसार अपवाद स्वरूप पुल्लिंग शब्दों के अंतर्गत आते हैं।
125. 'त्यागपत्र' उपन्यास के लेखक कौन हैं ?
सही उत्तर: C. जैनेन्द्र कुमार
व्याख्या: 'त्यागपत्र' (1937 ई.) हिन्दी के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार जैनेन्द्र कुमार की एक कालजयी रचना है। इस उपन्यास की मुख्य पात्र 'मृणाल' है, जिसके जीवन के माध्यम से स्त्री-जीवन के अंतर्द्वंद्व और सामाजिक रूढ़ियों को मनोवैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
व्याख्या: 'त्यागपत्र' (1937 ई.) हिन्दी के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार जैनेन्द्र कुमार की एक कालजयी रचना है। इस उपन्यास की मुख्य पात्र 'मृणाल' है, जिसके जीवन के माध्यम से स्त्री-जीवन के अंतर्द्वंद्व और सामाजिक रूढ़ियों को मनोवैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
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